फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अस्पताल संचालकों को नई आफत, प्रत्येक अस्पताल को लगाना होगा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

फतेहाबाद।
जिले के अस्पतालों को अपना वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाना होगा, वह चाहे निजी हों या फिर सरकारी। यह आदेश नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने जारी किए हैं। एनजीटी के आदेशानुसार अब अस्पतालोें को वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाकर उसी में अस्पताल का वेस्ट लिक्विड मटीरियल इस वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से होने के बाद ही सीवरेज में गिराना होगा। ऐसा नहीं करने पर अस्पताल संचालक या अधिकारी को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। प्रदूषण बोर्ड के अधिकारियों ने इस खबर की पुष्टि की है। बता दें कि प्रदूषण बोर्ड ही इस मामले की पूरी निगरानी करेगा और दिसंबर 2018 में अपनी रिपोर्ट एनजीटी को सौंपेगा। दूसरी ओर आईएमए जिलाध्यक्ष डॉ. एमएम पाहवा ने इस आदेश को मानने से इंकार तो नहीं किया, लेकिन इस मामले में सरकार की भूमिका पर सवाल जरूर खड़े किए हैं।

अस्पतालों में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के आदेश की वजह
एनजीटी ने अपने आदेशों में कहा है कि अस्पतालों से निकलने वाली तरल चीजों में कई संक्रामक कीटाणु होते हैं। बिना ट्रीटमेंट किए अस्पताल से बाहर भेजने पर ये भूमिगत जल को भी संक्रमित करते हैं। इससे भूमिगत जल को पेयजल या अन्य इस्तेमाल में लाने वाले लोग भी इस संक्रमण की चपेट में आ सकते हैं। एनजीटी के आदेशों के मुताबिक इस प्रकार का संक्रमित तरल पदार्थ भले ही अस्पताल के अंदर से ही सीवरेज में बहा दिया जाता हो, लेकिन इनके भूमिगत जल से मिलने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट ही इसका एकमात्र उपाय हो सकता है।
विज्ञापन


जिले में 65 के करीब निजी अस्पताल, दो सरकारी अस्पताल
आईएमए के तहत आने वाले जिले में लगभग 65 के करीब निजी अस्पताल हैं। इसके अलावा गली-मोहल्लों में भी कई अस्पताल खुले हुए हैं। जिले में दो सरकारी अस्पताल हैं और दो दर्जन से अधिक स्वास्थ्य केंद्र हैं जिनमें मेडिकल लिक्विड वेस्ट निकलता है। हालांकि ये स्पष्ट नहीं हैं कि वाटर ट्रीटमेंट प्लांट सिर्फ अस्पतालों में लगाया जाना है या गांवों में स्थित स्वास्थ्य केेंद्रों में भी बनाना होगा। अगर ऐसा होता है तो सरकार पर भी काफी बोझ पड़ना तय है।

दिसंबर 2018 है डेडलाइन, चार से पांच लाख आएगी लागत
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इसके लिए जिले के सभी अस्पतालों को नोटिस जारी करने जा रहा है। माना जा रहा है कि बहुत जल्द ही जिले के सभी सरकारी और प्राइवेट चिकित्सकों को नोटिस जारी कर दिए जाएंगे। दूसरी ओर, इस नियम के लागू होने का अर्थ ये है कि प्रत्येक अस्पताल पर कम से 4-5 लाख खर्च होगा। ऐसे में चिकित्सकों द्वारा इस खर्च को मरीजों पर डालने की भी पूरी संभावना है।

चिकित्सकों पर दबाव बनाना अनुचित, सरकार करे प्रबंध : आईएमए
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की जिला इकाई ने मामले में सरकार पर सवाल उठाए हैं। आईएमए के जिलाध्यक्ष डॉ. एमएम पाहवा ने कहा है कि सरकार एक कल्याणकारी संस्था है। स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। आज ये कहा जा रहा है कि अस्पताल संचालक वाटर ट्रीटमेंट लगाएं, कल को आम दुकानदार को भी ये कहा जा सकता है कि वो भी अपनी दुकान पर वाटर ट्रीटमेंट लगाएं।
विज्ञापन


एनजीटी के आदेश आए हैं कि सभी अस्पताल, चाहे वो प्राइवेट हों या सरकारी, सभी में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगना चाहिए। इससे भूमिगत जल संक्रमित नहीं होगा। पेयजल में दिक्कत नहीं आएगी। इसके लिए प्रदूषण बोर्ड ही निगरानी करेगा कि दिसंबर 2018 तक सभी अस्पतालों में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगा दिया जाए।
प्रदीप कुमार, एसडीओ, प्रदूषण बोर्ड।

अमर उजाला खास खबर...
जिले के 65 निजी और 2 सरकारी अस्पताल में लगाना होगा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट
एनजीटी ने दिए आदेश, दिसंबर 2018 तक का अल्टीमेटम, प्रदूषण बोर्ड करेगा निगरानी
आईएमए ने उठाए सवाल, सरकार उठाए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की जिम्मेदारी

15एफटीबीपी01 : फतेहाबाद का सरकारी अस्पताल, एनजीटी के आदेशों के मुताबिक सरकारी अस्पताल को भी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाना है।
15एफटीबीपी02 : आईएमए के अध्यक्ष डॉ. मनमोहन पाहवा ।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें