फतेहाबाद। शहर के सरकारी संस्थानाें और सड़कों के किनारे लगे पेड़-पौधे लगातार सूख रहे हैं। मगर इसका कोई समाधान नहीं हो रहा है। वन विभाग की ओर से इन्हें बचाने की कोशिश की जा रही है। मगर पेड़ और पौधों के सूखने के कारणों का पता नहीं लग पा रहा है। बीमारी के कारण जिले में एक वर्ष में आठ हजार पेड़ सूख चुके हैं।
वन विभाग की ओर से इन पेड़ पौधों में दवाई का छिड़काव किया जा रहा है। पेड़ों में फैली बीमारी के कारण वन विभाग के कार्यालय में लगे काफी पुराने पेड़ भी नष्ट हो गए हैं। जिले में हर वर्ष 4 से 5 लाख तक पौधे लगाए जाते हैं। मगर उचित देखभाल नहीं होने के कारण ये पौधे नष्ट हो रहे हैं। भारतीय वन अनुसंधान देहरादून के अधिकारी भी खराब पेड़ों के कारण की रिपोर्ट नहीं दे पाए हैं।
वन विभाग की लापरवाही के कारण सड़कों के किनारे लगे 20 फुट से अधिक ऊंचाई के पेड़ भी दीमक से सूखकर नष्ट हो रहे हैं। गांव भोडियाखेड़ा से मताना रोड, मानावाली और ढिंगसरा रोड के बीच लगे शीशम के पेड़ जिनमें पानी की कमी नहीं है, फिर भी सूखकर नष्ट हो रहे हैं। हालांकि, इनमें से कुछ किसानों के द्वारा जलाए गए फसल अवशेष से झुलसकर खराब हुए हैं।
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पिछले दो-तीनों सालों से लगातार पेड़ सूख रहे हैं। वन विभाग की ओर से भारतीय वन अनुसंधान देहरादून की टीम को बुलाकर सैंपल दिया गया था। मगर दो वर्षों के बाद भी अभी तक कोई रिपोर्ट नहीं मिली है। इस बार जिले में पौधे लगाने का काम जोरों पर है। वन विभाग ने अभी तक 4 लाख पौधे लगा दिए हैं। जिले में पिछले एक साल में 8000 पेड़ सूख गए हैं, जिनको कटवाने का ठेका दे दिया गया है।
राजेश कुमार, जिला वन अधिकारी, फतेहाबाद