अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद।
भूकंप के दौरान आपात स्थिति से निबटने के लिए अपनी तैयारी को परखने के लिए जिला प्रशासन ने वीरवार को मॉक ड्रिल किया। प्रशासन ने इसके लिए मई महीनों से तैयारियां भी की थी लेकिन विंडबना है कि वीरवार सुबह जब मॉक ड्रिल का समय आया तो अग्रवाल धर्मशाला में दमकल और एंबुलेंस गाड़ियां देरी से पहुंची और जेसीबी मशीन की अगली तरफ एक कुत्ता बैठा था। इससे प्रशासन की सभी तैयारियों की हवा निकल गई। प्रशासन ने ऐलान कर दिया गया था कि सुबह दस बजे से बारह बजे तक शहर के अंदर पांच स्थानों पर मॉक ड्रिल की जाएगी ताकि आपातकालीन तैयारियाें की समीक्षा की जा सके। मॉक ड्रिल के दौरान जैसे ही एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और अन्य सरकारी गाड़ियां सायरन बजाते हुए इधर-उधर दौड़ने लगी तो सारे शहर में एक बारगी तो कौतूहल का माहौल हो गया। जिसके बाद लोगों को जब मॉक ड्रिल का पता चला तो उन्होंने राहत की सांस ली।
स्थान : अग्रवाल धर्मशाला, नए बस अड्डे के पास
समय : सुबह दस बजे
हालात : भूकंप आते ही हर ओर हाहाकार और चीख-पुकार। आनन-फानन में पुलिस टीमें मौके पर पहुंची और अग्रवाल धर्मशाला के अंदर घुसी। इंस्पेक्टर मुकेश बैनीवाल ने तुरंत वायरलेस के जरिये कंट्रोल रूम में सूचित कर एंबुलेंस और फायर बिग्रेड की गाडिय़ों की डिमांड भेजी। पुलिस के जवान अग्रवाल धर्मशाला से घायल लोगों को कंधे और स्ट्रेचर पर लिटाकर बाहर निकले, लेकिन ये क्या, पांच मिनट की कॉल की बजाये 25 मिनट तक भी एंबुलेंस नहीं पहुंची। घायलों को कंधे और स्ट्रेचर पर लिटाकर उठाये पुलिस के जवान अग्रवाल धर्मशाला के बाहर एंबुलेंस का इंतजार करते रहे। खैर कॉल करने के 25 मिनट बाद छोटी एंबुलेंस पहुंची जिसमें महज दो मरीज लेकर जाए जा सकते थे जबकि अस्पताल के बाहर पुलिस जवानों के पास ही चार घायल थे और अंदर आधा दर्जन। बहरहाल एंबुलेंस दो मरीजों को ही लेकर जा सकी। इसके बाद अगली एंबुलेंस को आने में फिर 20 मिनट का समय लगा जिसके इंस्पेक्टर मुकेश बैनीवाल को पुलिस की गाड़ी में ही घायलों को उपचार के लिए भेजना पड़ा। इसके बाद मलबा हटाने के लिए बुलाई गई जेसीबी मशीन में अजब ही सीन दिखा। जेसीबी मशीन की अगली तरफ एक कुत्ता बैठा था और जिस घटनास्थल पर किसी को भी जाने की अनुमति नहीं थी, वहां पर आवारा कुत्ता बेधड़क घुस गया। पूरी मॉक ड्रिल में अव्यवस्थाओं की भरमार थी लेकिन डीएसपी जगदीश मौके पर आकर जांच में सब ठीक बता कर चलते बने। इस मॉक ड्रिल में भूकंप से निबटने में प्रशासनिक टीम फेल ही साबित हुई।
स्थान : ताऊ देवीलाल मार्केट
समय : सुबह दस बजकर 27 मिनट
हालात : ताऊ देवीलाल मार्केट में मॉक ड्रिल में भूकंप के चलते एक दुकान गिर गई जिसकी चपेट में आने से कई बच्चे घायल हो गए। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस, एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां समय पर मौके पर पहुंची। चिकित्सकों ने बच्चों को प्राथमिक उपचार देकर एंबुलेंस में बिठा दिया और अस्पताल के लिए रवाना कर दिया। इसके अलावा इमारत गिरने के कारण मलबा हटाने और राहत काम में अंधेरा होने के चलते समय रहते रोशनी के लिए फोक्स लाइट्स व जनरेटर का भी इंतजाम कर लिया गया। हालांकि एक जेसीबी मशीन भी बिना बुलाये यहां पहुंच गई जिसे पुलिसकर्मियों ने तुरंत यहां से वापस भेज दिया। इस घटनास्थल पर पुलिसकर्मियों की कई राहगीरों व आसपास के लोगों से धक्का-मुक्की और बहस भी हुई। डीएसपी जगदीश यहां भी सिटी एसएचओ सुरेंद्र कंबोज को लेकर निरीक्षण को पहुंचे।
स्थान : लघु सचिवालय
समय : सुबह 11 बजकर पांच मिनट
हालात : मॉक ड्रिल को शुरू हुए एक घंटा हो चुका था। इस दौरान सचिवालय के अंदर एक ओर तो कर्मचारियों को बाहर निकाला जा रहा था और दूसरी ओर हाई लेवल इमरजेंसी बैठक में शामिल होने के लिए विधायक, नगर परिषद अध्यक्ष और अन्य अधिकारी सचिवालय के अंदर भेजे जा रहे थे। ये विरोधाभास साफ तौर पर तैयारियों में दिख रहा था। एक घंटा होने तक तो कर्मचारी सचिवालय के सामने स्थित पार्क में आराम करते दिखे। कर्मचारियों की आरामदारी देखकर ये लग ही नहीं रहा था कि वे किसी आपातकालीन स्थिति की रिहर्सल कर रहे हैं।
स्थान : पंचायत भवन
समय : सुबह 11 बजकर 27 मिनट
हालात : शहर भर में हुए हादसों में घायल हुए लोगों को उपचार की व्यवस्था पंचायत भवन में की गई थी। मॉक ड्रिल के मुताबिक विधायक बलवान सिंह दौलतपुरिया को यहां भी निरीक्षण करना था। विधायक दौलतपुरिया यहां पहुंचे ही थे कि एक हादसे की कॉल आ गई लेकिन एंबुलेंस नहीं होने के कारण व्यवस्था बिगड़नी तय थी। इस मौके पर विधायक ने अपनी निजी गाड़ी भेजकर मरीज को लाने को कहा। विधायक ने अपनी निजी गाड़ी नहीं दी होती तो पंचायत भवन में भी मॉक ड्रिल का मजाक बनना तय था।
स्थान : राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय
समय : सुबह 11 बजकर 40 मिनट
हालात : शहर के अंदर जिन पांच स्थानों को केंद्र बनाकर मॉक ड्रिल आयोजित की गई थी, उसमें वाल्मीकि चौक स्थित राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भी एक था। यहां पर भूकंप के कारण पेड़ गिर गया जिसकी चपेट में दो छात्राएं आकर गंभीर रूप से घायल हो गई। ये मामला सामने आते ही सचिवालय के सामने स्थित मैदान में बने प्रशासनिक कंट्रोल रूम में सूचना मिली और एंबुलेंस भेजी गई। एंबुलेंस तकरीबन 15 मिनट बाद जाकर वहां पहुंची और बच्चियों को उपचार मिल सका। दमकल विभाग और जेसीबी की दिक्कत यहां पर भी बनी रही।
मॉक ड्रिल में दिखी यह कमियां
1. घायलों को प्राथमिक उपचार मुहैया करवाने में पुलिसकर्मियों को नहीं मिली ट्रेनिंग, वे बस घायलों को उठाकर एंबुलेंस का इंतजार करते दिखे।
2. लघुसचिवालय के कर्मचारियों ने आपात स्थिति में बाहर आने के बाद मौके पर जारी कार्यवाही को देखने की बजाये पार्क में आराम करना बेहतर समझा, जबकि वे वहां पर महज देखकर ही राहतकर्मियों से आपात स्थिति से खुद निकलने की व्यवस्था सीख सकते थे।
3. लघुसचिवालय के सामने मेला ग्राऊंड में बने कंट्रोल रूम में वन्य जीव विभाग के कर्मचारी नहीं दिखे। अग्रवाल धर्मशाला में सांप निकलने की सूचना पर मजबूरन वन विभाग के कर्मचारियों को भेजना पड़ा।
4. एंबुलेंस और दमकल की गाडिय़ों को तेजी से दौड़ाया तो गया लेकिन रास्ते में उनके लिए ट्रैफिक भी क्लियर किया जा सकता था।
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भूकंप के दौरान ये रखी जानी चाहिए सावधानियां
1. घर या दफ्तर में भूकंप आपातकालीन किट तैयार करें जिसमें कम से कम दो दिन की खाद्य सामग्री व अन्य जरूरी सामान शामिल हो। 2. भयभीत ना होकर शांत रहें।
3. रेडियो, टीवी या लाउड स्पीकर या आवश्यक सूचना और निर्देश प्राप्त करते रहें और अपनी लोकेशन की जानकारी भी देें।
4. भूकंप के समय फर्श पर झुक कर किसी मजबूत मेज या कुर्सी के नीचे शरण लें ।
5. भवन निर्माण करते समय ईमारत भारतीय मानक ब्यूरो की संहिताओं द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार प्रशिक्षित अभियंता के सुझाव से बनवाएं ।
इस प्रकार से रही प्रशासनिक मॉक ड्रिल, पांच लोगों की डमी मौत, 49 डमी घायल
भूकंप की मॉक एक्सरसाइज के दौरान भूकंप आपदा में देवीलाल मार्केट में पुरानी बिल्डिंग गिरने व उसमें आग लगने के कारण दो व्यक्तियों, कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में दो छात्राओं, अग्रवाल धर्मशाला में एक व्यक्ति की मौत की सूचना मिली जबकि 10 व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुए जिसमें दो महिलाएं व आठ पुरुष शामिल है, इन्हें इलाज के लिए अग्रोहा मेडिकल रेफर किया गया। इस दौरान 39 व्यक्ति घायल हुए, जिनमें 28 पुरुष तथा 11 महिला शामिल हैे, जिनका इलाज स्थानीय नागरिक अस्पताल में किया गया। मृतक व्यक्तियों की पहचान कर उनके परिवार तथा रिश्तेदारों को सूचना दी गई। मेगा मॉक एक्सरसाइज के दौरान नागरिक अस्पताल के नजदीक के क्षेत्र में एक बैल तथा एक गाय को चोट लगने की खबर मिली, जिसे पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर पशुओं का इलाज किया। इस दौरान धांगड़ गांव के ग्राम सचिवालय का भवन क्षतिग्रस्त हुआ, जहां पर जान-मालज का कोई नुकसान नहीं है। वहां पर पुलिस तथा बचाव दल की टीम मौके पर पहुंचकर स्थिति का मुआयना किया। कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में वाटर सप्लाई की पाईपें बंद हो गई, जिस कारण पानी की किल्लत रही और सूचना मिलते ही जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा इसे तुरंत ठीक किया गया। एक्सरसाइज के दौरान ड्रोन कैमरा, अग्रिशमन, एंबुलेंस, जेसीबी मशीनों सहित अन्य संसाधनों का प्रयोग किया गया।
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प्रशासन का दावा, पूरी तरह सफल रही मॉक ड्रिल
डीसी डा. हरदीप सिंह ने कहा कि जिला में मॉक ड्रिल के दौरान इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर, स्टेजिंग एरिया, राहत शिविर आदि लगाने के लिए प्रशासन की ओर से व्यापक प्रबंध किए गए। मॉक ड्रिल में एनसीसी सीनियर कैडेट्स, सेना, पुलिस, होमगार्ड, रेडक्रॉस व सिविल डिफेंस सहित अन्य संगठनों को भी शामिल किया गया। उपायुक्त के अनुसार फतेहाबाद शहर में आयोजित की गई मॉक ड्रिल पूरी तरह सफल रही। जिला प्रशासन किसी भी प्रकार की आपातकालीन स्थिति से निबटने में पूरी तरह सक्षम है।