जान जोखिम में डालकर करते हैं विद्यार्थी सफर
टोहाना।
टोहाना में आसपास के गांवों से शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्र अपनी जान जोखिम में डालकर यहां पहुंचते हैं। गांवों में बस सेवा कम होने के कारण आलम यह है कि छात्र बसों की छत पर तो खिड़कियों पर लटकर सफर करने को मजबूर हैं। छात्र अपनी परेशानियां कई बार रोडवेज विभाग के समक्ष रख चुके हैं, लेकिन विभाग है कि उसके कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। विद्यार्थियों का कहना है कि शायद ये लापरवाह अधिकारी किसी बडे़ हादसे का इंतजार कर रहे हैं।
नरवाना रूट पर जाने वाले बसों की संख्या कम होने के कारण आईजी कॉलेज और अन्य शिक्षण संस्थान से पढ़ने वाले छात्र निजी बसों की छत पर बैठकर या पीछे लटकर गांवों की ओर जाते हैं। ये छात्र बस की छत पर बैठे होते हैं तो रास्ते में पेड़ों की टहनियां नीची होने के कारण कभी उनके मुंह पर लगती है तो कभी सिर पर। रोज उनको इन्हीं खतरों से जूझकर घर जाना पड़ता है या कॉलेज आना पड़ता है। जब बच्चों से भरी यह बस बलियाला फाटक पर पहुंचती है तो यहां बिजली लाइन से रेलवे का काम चल रहा है तो वहां 25000 वोल्टेज की तारों को सप्लाई देने वाले खंभों के नीचे ये बस निकलती है, जिसके चलते आने वाले समय में कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है।
क्या कहते हैं निजी बस चालक
निजी बस चालक ने बताया कि बच्चों के पास सरकारी बसों के पास हैं, लेकिन बावजूद उसके ये निजी बसों में लटक कर जान को जोखिम में डालकर सफर करते हैं। इन बच्चों को कई बार समझाया भी गया, लेकिन यह बच्चे नहीं मानते।
क्या कहते हैं छात्र
इस बारे में छात्र सागर, सुनील, राजेश, मुकेश ने बताया कि रोडवेज की इस रूट पर बसो ंकी संख्या कम होने के कारण मजबूरन उन्हें इस तरह बस पर जाना पड़ता है। बसों की संख्या को लेकर अधिकारियों को अवगत करवा चुके हैं, लेकिन समस्या का कोई हल नहीं हो पाया है।
छात्र ही रखते हैं नियमों को ताक पर: अड्डा इंचार्ज
इस बारे में अड्डा इंचार्ज सतबीर सिंह ने कहा कि बस स्टैंड से हर बीस मिनट में बसों की सर्विस कैथल रूट की है, लेकिन ये छात्र नियमों को ताक पर रखकर बसों की छत पर बैठकर सफर करते हैं। इसके लिए पुलिस का होना जरूरी है, लेकिन यहां कोई पुलिसकर्मी नहीं होता जो इन छात्रों पर लगाम लगा सके। उन्होंने कहा कि बसों की यहां कोई समस्या नहीं है।