शहर में सुबह-सुबह दो घंटे हुई 70 एमएम बारिश ने बाढ़ जैसे हालात बना दिए। पानी के बीच जीटी रोड पर वाहन एक किलोमीटर तक रेंगते नजर आए तो पुलिसकर्मी बेबस दिखे। जल निकासी के बेहतर प्रबंध करने में प्रशासन की नाकामी फिर साबित हो गई। जीटी रोड से लेकर शहर के भीतरी बाजारों में भी दुकानों व घरों में पानी घुस गया। लोग बाल्टियों से घरों का पानी बाहर निकालते रहे। जलभराव से जूझते शहरवासियों के हालात जांचने न कोई आला अधिकारी कार्यालय से बाहर निकला तो न ही किसी जनप्रतिनिधि को फुरसत मिली।
दरअसल, शुक्रवार सुबह 8.30 बजे ही शहर में रिमझिम बारिश शुरू हो गई। सुबह 9.15 बजे मूसलाधार बारिश होने लगी जो 10.30 बजे तक लगातार चलती रही। सवा घंटे की तेज बारिश ने शहर को पूरी तरह जलमग्न कर दिया। जीटी रोड पर दोपहर 2.30 बजे तक भी जलभराव खत्म नहीं हो सका था। बारिश के बाद चिल्ली की तरफ जाने वाले पानी के तेज बहाव के कारण शक्ति नगर निवासी नगर परिषद के सफाईकर्मी अशोक के घर की दीवार गिर गई। कर्मचारी अशोक ने बताया कि उसने कर्जा लेकर दो कमरे बनाए थे। शहर का बरसाती पानी चिल्ली की तरफ होते हुए खेतों में जा रहा है। यह पानी उसके मकान के बिल्कुल पीछे से खेतों जाता है। शुक्रवार को पानी का बहाव तेज था, जिससे उसके मकान की दीवार की नींव हिल गई। थोड़ी ही देर में दीवार गिर गई। पानी के साथ लगती दीवार के नीचे की जमीन भी धंस गई। संयोगवश वह ड्यूटी पर जाते समय अपने बच्चों को मां-बाप के घर छोड़ गया, अन्यथा जान की हानि भी हो सकती थी।
सिर्फ दो ही पंपसेट के सहारे हो रही पानी की निकासी
जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने शहर में सिर्फ दो ही जगह पर पानी निकासी के लिए पंपसेट लगाए। एक पंपसेट चिल्ली क्षेत्र की ओर लगाया गया जबकि दूसरा तुलसीदास चौक पर लगा। बाकी शहर को सिर्फ सीवरेज सिस्टम के सहारे छोड़ दिया गया। यही कारण रहा कि प्रमुख रास्तों से जलभराव खत्म होने में पांच घंटे से भी अधिक समय लगा। विडंबना यह है कि बारिश के मौसम में जनस्वास्थ्य विभाग यह भी पड़ताल नहीं करवाता है कि कौन से एरिया में सही तरीके से निकासी हो रही है।
स्वीमिंग पुल की तरह नहाने लगा युवक
जवाहर चौक से चिल्ली को जाने वाले रास्ते पर एक युवक ने बारिश के पानी का अलग ढंग से मजा लिया। युवक स्वीमिंग पुल की तरह गली में बह रहे बारिश के पानी में तैरने लगा। इसके अलावा बच्चों ने ट्रैक्टर व गाड़ियों के टायरों से किश्तियां बनाकर जहां मजे लिए, वहीं सोशल मीडिया पर नगर परिषद से लेकर जनस्वास्थ्य विभाग तक की नाकामी पर तंज कसे।
बरसाती पानी की निकासी के लिए नाले की व्यवस्था ही नहीं
हैरानीजनक बात यह है कि अधिकांश शहरों में बरसाती पानी की निकासी के लिए अलग से नालों का निर्माण करवाया जाता है। मगर फतेहाबाद में सालों से अधिकारियों व इंजीनियरों ने ऐसी व्यवस्था ही नहीं की है कि बारिश का पानी नालों के जरिये निकाला जा सके। सिर्फ सीवरेज सिस्टम पर ही जल निकासी टिकी है।
यह रही बारिश की स्थिति
फतेहाबाद : 70 एमएम
जाखल : 50 एमएम
टोहाना : 38 एमएम
रतिया : 22 एमएम
भट्टू : 50 एमएम
यहा पर हुआ जलभराव
जवाहर चौक
तुलसीदास चौक
लालबत्ती चौक
शक्ति नगर
भट्टू रोड
बीघड़ रोड
धर्मशाला रोड
माजरा रोड
जीटी रोड
एमसी कॉलोनी
अग्रवाल कॉलोनी
कोट---------
पता नहीं कब रुकेगा शहर का झील बनना
थोड़ी सी बारिश में ही शहर झील बन जाता है, पता नहीं कब यह सिलसिला रुकेगा। पुराने बस स्टैंड से जगजीवनपुरा का प्रमुख रोड है, फिर भी यहां घुटनों तक पानी जमा होता है। अधिकारियों से लेकर विधायक तक को जानकारी है, फिर भी कोई समाधान नहीं हो रहा है।
सुशील अरोड़ा, समाजसेवी।
बरसाती पानी के लिए अलग से बनें नाले: सिंह
शहर में बरसाती पानी की निकासी के लिए अलग से नालों का निर्माण करना बहुत जरूरी है। सीवरेज के सहारे तो पांच घंटों में भी जलभराव खत्म नहीं होता है। जीटी रोड जैसे प्रमुख रास्ते पर भी कोई बेहतर व्यवस्था नहीं है। हर बार यही स्थिति रहती है, इंजीनियर्स की कार्यशैली पर सवालिया निशान लग रहे हैं।
हरदीप सिंह, अध्यक्ष, जिंदगी संस्था।
कोट
शहर में बरसाती पानी की निकासी के लिए दो पंपसेट लगाए गए हैं। 15 एमएलडी के सीवरेज प्लांट में पानी जाता है। 80 फीसदी जलभराव शाम 5 बजे से पहले खत्म हो गया था।
आशीष गर्ग, एसडीओ, जनस्वास्थ्य एवं आभियांत्रिकी विभाग।
दोपहर 2.15 बजे जीटी रोड पर भरा बरसाती पानी।- फोटो : Fatehabad
बीघड़ चौक पर जलभराव के बीच से गुजरते वाहनों को देखता पुलिसकर्मी।- फोटो : Fatehabad