शहर के चर्चित पिंकी हत्याकांड मामले में मंगलवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश शालिनी सिंह नागपाल की अदालत ने फैसला सुनाते हुए सात आरोपियों सुंदर, टोनी नाई, प्रदीप, रूपा, टीटू, दीपा व मुकेश को दोषी करार दिया है, जबकि सोनू, सिकंदर, सुमित, रघुबीर, करतार, खुशहाल, सुरेंद्र, राजली को बरी कर दिया।
अदालत दोषियों को 24 दिसंबर को सजा सुनाएगी। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीए राजेंद्र कुकड़ेजा व बीएस शर्मा ने पैरवी की।
मृतक पिंकी के भानजे विक्रम कुमार ने 25 अप्रैल 2014 को शहर पुलिस को दिए बयान में बताया कि सुबह करीब 11 बजे कबीर बस्ती निवासी सोनू धानक व सुंदर ने उसके साथ झगड़ा किया था।
उस समय इनके साथ 10-11 आदमी और थे मेरे मामा पिंकी ने उनसे मुझे छुड़वाया था। उस समय भी सोनू ने मेरे मामा पिंकी को चाकू लगा दिया था और वहां से फरार हो गए थे। उसके बाद टीटू धानक ने मेरे मामा पिंकी को फोन पर धमकियां दी थी।
उसके बाद करीब 1 बजे मेरे मामा पिंकी अपने घर के गेट के आगे कुर्सी डालकर बैठे थे कि सोनू धानक, सुंदर जिनके हाथों में तलवारें थी और इनके साथ टोनी नाई, बीघड़ निवासी रूपा, कबीर बस्ती निवास इलू धानक, टीटू धानक जिनके पास चाकू थे तथा सन्नी धानक, डाबला, सिकंदर के पास कांपे थे इनके साथ 30-40 अन्य व्यक्ति भी थे, आते ही सोनू व सुंदर ने मेरे मामा पिंकी पर तलवार से हमला कर दिया, मेरा मामा पिंकी भागकर घर के अंदर जाने लगे तो यह सभी घर में घुस गए।
सन्नी, डाबला, सिंकदर व अन्य 30-40 व्यक्तियों ने मेरे मामा पिंकी को तलवारों व चाकुओं और कापों से घायल कर दिया। इस दौरान मेरा मामा पिंकी वहीं पर गिर गए। मेरे शोर करने पर मेरी मामी सुनीता छत से भागकर नीचे आई शोर सुनकर मोहल्ले के काफी व्यक्ति एकत्रित हो गए।
इस पर हमलावर वहां से फरार हो गए। मेरे मामा का लड़का संजू और मैं पिंकी को बाइक पर सरकारी अस्पताल ले गए जहां डाक्टरों ने मेरे मामा पिंकी को मृत घोषित कर दिया।
फैसले के बाद बेहोश हुई आरोपी की पत्नी
अतिरिक्त जिला सत्र न्यायधीश की अदालत में पिंकी मर्डर केस में फैसला सुनाने के बाद अदालत के बाहर मौजूद मुकेश नाम के युवक की पत्नी सुनीता को पता चला की उसके पति को इस मामले में दोषी करार दे दिया गया है तो वह जोर-जोर से रोने लगी और बेहोश हो गई।
चर्चित रहा है पिंकी हत्याकांड
पिंकी हत्याकांड के इस मामले को जातिगत रूप दे दिया गया था। धानक जाति के घरों पर पथराव हुआ था। जिसके बाद कई लोग दूसरी जगह पर पलायन कर गए थे और काफी दिनों तक कबीर बस्ती में भारी पुलिस फोर्स तैनात रही थी।