अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद।
हिसार रोड पर गांव दुर्जनपुर के पास हुए हादसे के बाद मानो परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा हो। अपने पिता की जान बचाने निकले चार और लोग काल का ग्रास बन गए। हादसे में मृतक ओमप्रकाश के अलावा उसका भाई रघुबीर, बेटा प्रवीण, राधेश्याम और पड़ोसी विकास की मौत हो गई है। परिवार के सभी सदस्य कारपेंटर का काम करते थे। बुधवार दोपहर को ओमप्रकाश को अचानक हरे-नीले रंग की उलटी हुई और उसके बाद उसकी तबियत बिगड़ने लगी। पिता की तबियत बिगड़ते देखकर प्रवीण और राधेश्याम ने घर से बाहर निकलकर पड़ोसी विकास को मदद के लिए बुलाया और सभी कार से पहले ओमप्रकाश को शहर के एक निजी अस्पताल में ले गए जहां से जवाब मिलने के बाद वो पहले अग्रोहा और फिर हिसार के लिए निकले थे लेकिन रास्ते में ही हादसे का शिकार हो गए।
दिसंबर में हुआ था एक बेटे का विवाह, दूसरे के लिए चल रही थी बातचीत
मृतकों में शामिल राधेश्याम पुत्र ओमप्रकाश का अभी बीते दिसंबर माह में ही विवाह हुआ था और पिता की जान बचाने में जुगत में राधेश्याम खुद ही इस दुनिया से चल बसा। इसी हादसे में उसके भाई प्रवीण की भी मौत हो गई और जिसकी शादी की सरगर्मियां तेज होने लगी थी। लेकिन होनी को शायद कुछ और ही मंजूर था। इसी हादसे में मौत का शिकार हुए रघुबीर के सबसे छोटे बेटे का रिश्ता पक्का हो चुका था और इसी माह शादी की तारीख पक्की होनी थी।
भाई को तड़पता देखकर दूसरे भाई ने की थी साथ जाने की जिद, हादसे में उसने भी तोड़ा दम
ओमप्रकाश की हालत बिगड़ने पर पहले ओमप्रकाश के परिवार की किसी महिला रिश्तेदार गाड़ी में साथ जा रही थी लेकिन अपने भाई को तड़पते देखकर रघुबीर से रहा नहीं गया। उसने ऐन मौके पर कार में सवार महिला रिश्तेदार को उतरवाकर खुद गाड़ी में सवार हो गया। घर से निकलने के एक घंटे बाद तो हादसे की सूचना ही आ गई। अगर रघुबीर ने ऐन मौके पर खुद भाई के साथ जाने की जिद ना की होती तो शायद आज वो जीवित होते।
चार दिन पहले गाड़ी खरीदी थी पड़ोसी ने, उसी ने आगे बढ़कर कहा था साथ चलने को
इस हादसे का शिकार हुए विकास (19) पुत्र वेदप्रकाश उर्फ पप्पू ने चार-पांच दिन पहले ही सेकेंड हैंड होंडा सिटी गाड़ी खरीदी थी। बुधवार दोपहर जब राधेश्याम ने घर से बाहर निकलकर आवाज मारी तो सबसे पहले विकास ही घर से बाहर निकला और ओमप्रकाश की बिगड़ती हालत देखकर वह अपनी गाड़ी उठा लाया। परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार विकास उसी वक्त ही कहीं बाहर से लौटा था। हादसे के दौरान भी विकास ही गाड़ी चला रहा था। विकास के जानकारों ने बताया कि विकास को छोटी उम्र से ही गाड़ी चलाने का शौक था, और इसी शौक को पूरा करने के लिए उसने कुछ दिन पहले ही गाड़ी खरीदी थी लेकिन किसे पता था कि अंत में गाड़ियों को लेकर यही शौक उसकी जिंदगी लील जाएगा।