रतिया की रहने वाली बुजुर्ग श्रद्धालु ने सकारात्मकता और चिकित्सकों पर भरोसे के साथ कोरोना के खिलाफ जंग जीती है। उसकी इसी हिम्मत और सकारात्मकता के चलते अग्रोहा मेडिकल प्रशासन ने भट्टू की पॉजिटिव युवती को भी इसी 60 साल की बुजुर्ग महिला के साथ एक ही कमरे में रखा गया ताकि युवती को हिम्मत मिल सके। आपको बता दें कि जिले के दो कोरोना मरीज ठीक होकर अपने घर लौट चुके हैं। पहला जांडवाला बागड़ का युवक एक माह पहले ही वापिस लौट चुका है तो रतिया की बुजुर्ग श्रद्धालु मंगलवार देर रात अग्रोहा मेडिकल से डिस्चार्ज होकर रतिया स्थित अपने घर लौटी है। ये कहा जा रहा है कि बुजुर्ग और बच्चे कोरोना के खिलाफ जंग में हाई रिस्क पर हैं। ऐसे में बुधवार सुबह अमर उजाला से कोरोना के खिलाफ जंग जीतकर वापिस लौटी बुजुर्ग श्रद्धालु ने फोन पर बातचीत की और कोरोना के खिलाफ जंग के उनके अनुभव साझे किए। बुजुर्ग महिला के घर में उनके अलावा बेटा-बहु और दो बच्चे रहते हैं।
अच्छा खाना और बेहतर उपचार मिला, हिम्मत भी बंधाते थे स्वास्थ्य कर्मी
अग्रोहा मेडिकल में बिताए समय के बारे में जब बुजुर्ग महिला से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि बहुत अच्छे तरीके से रखा गया था। खाने में रोटी-सब्जी सलाद के साथ दिन में एक बार खिचड़ी भी देते थे ताकि पाचन सही रहे। इसके अलावा वहां का स्टाफ काफी मददगार रहा। बहुत अच्छे से इलाज किया और साथ ही वहां के कर्मचारी बार-बार आकर हिम्मत भी बंधाते थे। इससे खुद को संभालने में मदद मिली।
पहले अकेली रहती थी तो पाठ करती थी, फिर भट्टू की युवती आई तो उससे बातचीत हुई
अमर उजाला से बातचीत में कोरोना से जंग जीतकर लौटी बुजुर्ग महिला ने बताया कि पहले कमरे में अकेली रहती थी तो थोड़ा अजीब लगता था तो पाठ वगैरह करके भगवान का नाम जपती रहती थी। फिर कुछ दिन बाद भट्टू से पॉजिटिव मिली युवती को भी वहीं रखा गया। फिर उससे बातचीत होती रही। उन्होंने बताया कि कमरा जरूर एक था, लेकिन बेड, दवाइयां और यहां तक की शौचालय भी दोनों का अलग-अलग था। उन्हें आपस में थोड़ी दूरी बनाकर ही बैठने व बात करने को बोला गया था।
17 मार्च को गई थी नांदेड़ साहिब, दो माह बाद नसीब हुआ घर
बुजुर्ग महिला से जब पूछा गया कि घर आकर कैसा लग रहा है तो भरी आवाज में उन्होंने कहा कि खुश हूं कि वापिस आ गई। 17 मार्च को नांदेड़ साहिब के लिए घर से निकले थे और 30 अप्रैल को रतिया में लेकर आए थे। लेकिन घर नहीं आ सकी थी। फिर अग्रोहा लेकर चले गए मुझे और अब आखिरकार घर आ ही गई। दो माह बाद जाकर घर आने का मौका मिला है। वापिस घर आकर खुश हूं।