फतेहाबाद। स्वास्थ्य विभाग प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान चला रहा है। इसके तहत हर माह की 9, 10 और 23 तारीख को जांच शिविर लगाया जाता है। ये शिविर जिला नागरिक अस्पताल, उप नागरिक अस्पताल रतिया और टोहाना समेत सीएचसी में भी लगाए जा रहे हैं।
मुख्यालय ने गर्भवती की जांच में गंभीरता बरतने के निर्देश दिए हैं। उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की पहचान के शिविर में जांच के लिए छह काउंटर लगाने होंगे। इन काउंटर से गर्भवती को गुजरना होगा ताकि उच्च जोखिम का पता चलने पर समय रहते उपचार शुरू करके जच्चा बच्चा की जान बचाई जा सके।
स्वास्थ्य विभाग ने अल्ट्रासाउंड कराने के लिए फतेहाबाद और भूना में एक-एक केंद्र को चिह्नित किया है। इन्हें जननी सुरक्षा योजना के तहत भुगतान किया जाएगा। शिविर में पंजीकरण करवाने वाली प्रत्येक गर्भवती को गुड़ और चना मिलेगा।
महिला रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में आने वाली गर्भवती को भी लाभ मिलेगा। इसके लिए अस्पताल प्रशासन संस्था का सहयोग ले सकेंगे।
डायटीशियन को बताना होगा कैसा लेना है खानपान :
एनएचएम निदेशक डॉ. वीरेंद्र यादव ने पिछले दिनों नागरिक अस्पताल में निरीक्षण किया था। इस दौरान महिला रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में गर्भवती को डायटीशियन से जानकारी न मिलने पर उन्होंने नाराजगी जाहिर की थी। इस कारण डायटीशियन को शिविर समेत ओपीडी में भी गर्भवती को खानपान के बारे में बताने के लिए कहा गया है।
इन तरह रहेंगे जांच के लिए काउंटर
पहले काउंटर पर गर्भवती का पंजीकरण होगा। उसे आहार में गुड़ और चना मिलेगा।
दूसरे काउंटर पर गर्भवती का रक्तचाप (बीपी) और वजन जांचा जाएगा।
तीसरे काउंटर पर रक्त और मूत्र के नमूने लिए जाएंगे।
चौथे काउंटर पर स्टाफ नर्स और काउंसलर से पुरानी बीमारी, पहले बच्चे के बारे में जानकारी ली जाएगी। पूछा जाएगा कि पहले हुआ प्रसव सामान्य था या सिजेरियन हुआ था।
पांचवें काउंटर पर स्त्री रोग विशेषज्ञ रिपोर्ट जांच कर उपचार और दवा के बारे में बताएंगी।
छठे काउंटर पर गर्भवती को पौष्टिक आहार के बारे में जागरूक किया जाएगा।
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत स्वास्थ्य केंद्रों पर हर माह 9, 10 और 23वीं तिथि को शिविर लगाया जाता है। इन शिविरों छह काउंटर बनाए जाएंगे ताकि उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था का पता चल सके और समय रहते जोखिम का पता चलने से जच्चा-बच्चा की जान बचाई जा सके।
- डॉ. भरत सहारण, उप सिविल सर्जन,फतेहाबाद।