रतिया। कहने को रतिया शहर है लेकिन आज भी यहां की करीब 55 हजार आबादी नहरी पानी से वंचित है। घरों में नहरी की जगह ट्यूबवेलों का पानी पहुंच रहा है। इसमें टीडीएस 600 से 650 तक रहता है। ऐसे में बीमारी से बचने के लिए लोगों ने घरों में आरओ लगवा रखे हैं।
शहर को 22 वाटर वर्क्स से ट्यूबवेल का पानी सप्लाई हो रहा है। दूसरी तरफ जनस्वास्थ्य विभाग का दावा है कि शहर में नहरी पानी प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है, लेकिन अभी इसमें समय लगेगा। जनस्वास्थ्य विभाग अधिकारियों का दावा है कि 11 करोड़ की लागत से 20 साल पुरानी पाइप लाइनों को जल्द ही बदला जाएगा ताकि लीकेज की समस्या खत्म हो सके।
जन स्वास्थ्य विभाग के एसडीओ आंचल जैन ने बताया खंड के 75 फीसदी क्षेत्र में ट्यूबवेल का पानी सप्लाई हो रहा है। क्षेत्र में नहरी पानी की सप्लाई देने की योजना का 75 फीसदी काम पूरा हो गया है। बाकी काम अगले 6 माह में पूर्ण होने की उम्मीद है। स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर समय-समय पर पानी के सैंपल लिए जाते हैं। हर वर्ष मानसून से पहले और बाद में 200 सैंपल तथा स्वास्थ्य विभाग की ओर से हर महीने अलग से टेस्ट लिए जा रहे हैं। विभाग की ओर से फिजिकल सैंपल के तहत हर वर्ष 3000 सैंपल जांच के लिए उनकी लैब में भेजे आते हैं।
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पेट व दांतों की बीमारियां बढ़ रहीं
रतिया खंड में आने वाले करीब 50 गांवों में से आधे में नहरी पानी सप्लाई हो रहा है। शहरी और बाकी गांवों में फ्लोराइड व 450 से 650 टीडीएस युक्त पानी सप्लाई किया जा रहा है। इसके पीने से पेट व दांतों की बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है।
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शहरी में डलेगी 12 ईंची लाइन
जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से शहर में 11 करोड़ की लागत से 20 साल पुरानी पाइप लाइन को बदला जाएगा। पहले जो पाइपलाइन डाली गई थी उसका लेवल काफी नीचा पड़ गया है और वह 4 से 6 इंच मोटी है। प्रेशर पड़ने पर यह लाइन कई बार फट जाती है। अब 8 से 12 इंच मोटी पाइपलाइन डाली जाएगी। इससे शहरवासियों को स्वच्छ पेयजल की सप्लाई मिल सकेगी।
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लोग माग रहे नहरी पानी की उपलब्धता
सप्लाई में ट्यूबवेल का पानी आ रहा है। यह फ्लोराइडयुक्त होता है। इससे बीमारियां बढ़ने का खतरा होता है। जनस्वास्थ्य विभाग से मांग है कि नहरी पानी उपलब्ध करवाया जाए।
- एडवोकेट नरेंद्र मलिक, पूर्व सचिव, रतिया बार एसोसिएशन।
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शहर में पिछले डेढ़ वर्ष से नहरी पानी सप्लाई पर काम चल रहा है लेकिन अभी तक यह उपलब्ध नहीं हो सका है। उनकी मांग है कि जल्द से जल्द नहरी पानी उपलब्ध करवाया जाए।
-केतन मेहता, समाजसेवी।
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नहरी पानी सप्लाई होने पर पेट की होने वाली बीमारियों से निजात मिलेगी फिलहाल पानी में टीडीएस ज्यादा होने के चलते विशेष कर गर्मियों में पथरी व अन्य पेट की बीमारियां बढ़ जाती है।
-सोनू ग्रोवर, स्थानीय निवासी।
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पिछले वर्ष 2025 में विभाग की ओर से शहर में 44 सैंपल लिए गए थे। इनमें मात्र एक फेल पाया गया था। जिसे जन स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर दुरुस्त करवाया गया था।
-राजेश कुमार, हेल्थ इंस्पेक्टर, स्वास्थ्य विभाग।
नहरी पानी उपलब्ध करवाने के लिए चल रहा है कार्य:संवाद