फतेहाबाद। नई सोच के साथ समाज आगे बढ़ रहा है। हालांकि आज भी कई जगह बेटियों को बोझ समझा जा रहा है। तय उम्र से पहले बेटियों की शादी की जा रही है। पिछले तीन सालों में करीब 53 लड़कियां बालिका वधू बनने से बची हैं। मां-बाप और बालिकाओं की काउंसिलिंग के दौरान कम उम्र में बालिकाओं की शादी करने की हकीकत सामने आई है। कई अभिभावकों ने स्वीकार किया है कि अपना बोझ कम करने के लिए लड़कियों की शादियां कम उम्र में कर देते हैं।
निर्धारित से कम उम्र में लड़कियों की शादी करना अपराध है। कई स्थानों पर लड़कों की भी कम उम्र में शादी करने का मामला सामने आया है। इसकी वजह घर में मां के नहीं होने पर लड़के की जल्दी शादी की जा रही है। परिवार के सदस्यों का मानना होता है कि बहू आ जाए और परिवार संभाल ले। वहीं, पिछले तीन सालों में 80 शिकायतें मिली हैं। इसमें 18 शिकायतें झूठी भी पाई गई हैं। अहम बात यह भी है कि कोरोना काल के दौरान सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं, जिसमें काउंसिलिंग करके शादी रुकवाई गई है। संवाद
वर्ष शिकायत मिली शादी रुकवाई पुलिस के पास भेजे झूठी मिली
2020-21 30 20 2 8
2021-22 27 16 4 7
2022-23 20 17 0 3
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केस एक
जिले के एक गांव में मां-बाप अपनी बेटी की 17 साल की उम्र में ही शादी कर रहे थे। सूचना पर टीम गई और दस्तावेज जांचे तो लड़की की उम्र कम मिली। काउंसिलिंग में सामने आया कि मां-बाप को शक था कि लड़की का प्रेम प्रसंग चल रहा था। इसलिए उसकी जल्दी शादी कर रहे थे।
केस दो
पिता शराबी होने के चलते लड़की की साढ़े 17 साल की उम्र में ही शादी की जा रही थी। काउंसिलिंग में सामने आया कि पिता शराबी है और वह बच्चों के सामने पत्नी के साथ मारपीट करता है। बेटी की शादी का बोझ समझ मां उसकी कम उम्र में ही शादी कर रही थी।
अब तय उम्र से पहले शादी नहीं होगी मान्य, न होगा पंजीकरण
कानून के मुताबिक तय उम्र से पहले की गई शादी अब मान्य नहीं होगी। पहले अगर उम्र कम मिलती थी तो शादी रुकवा दी जाती थी। अब सरकार ने नया नियम लागू कर दिया है। अगर लड़का या लड़की उम्र पूरी नहीं है तो शादी मान्य ही नहीं होगी और न ही पंजीकरण होगा।
कोट
लड़कियों की जल्दी शादी करना समस्या का हल नहीं है। मां-बाप बच्चों के भविष्य को दलदल में फंसा रहे हैं। बच्चे अगर गलत दिशा में जा रहे है तो उनकी काउंसिलिंग की जानी चाहिए। उनके पढ़ने का मौका दिखा जाना चाहिए।
-रेखा अग्रवाल, महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी