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मेडिकल-नॉन मेडिकल व कामर्स का नहीं एक भी टीचर

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अमर उजाला ब्यूरो
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जाखल(फतेहाबाद)।
मन में डॉक्टर, इंजीनियर व सीए बनने का सपना लेकर जाखल मंडी के राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल में दाखिला लेने वाले मेडिकल, नॉन मेडिकल व कॉमर्स के विद्यार्थियों को अब उनके सपने टूटते दिखाई दे रहे हैं। विद्यार्थियों को उनके सब्जेक्ट पढ़ाने के लिए एक भी अध्यापक ही नहीं है। या तो उन्हें स्कूल में खाली बैठकर लौटना पड़ता है या वे खुद ही किताबों में माथापच्ची कर रहे हैं। बाजार में जिन विषयों को पढ़ाने के लिए 10 से 15 हजार रुपये की मांग की जा रही हो, उन्हें अपने स्तर पर व बिना अध्यापकों के कैसे पढ़ा जाएगा, इसका अंदाजा खुद ही लगाया जा सकता है। ऐसे में जहां विद्यार्थियों को फेल होन का डर सता रहा है, वहीं भविष्य भी धूमिल नजर आ रहा है।
सरकार प्रदेश में बेहतर शिक्षा का ढोल पीट रही है, लेकिन हकीकत कुछ और है। जाखल मंडी के राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल में प्रदेश सरकार की ओर से सात साल पहले मेडिकल, नॉन मेडिकल व कॉमर्स संकाय की कक्षाएं शुरू हुईं। सरकार ने यहां इन विषयों को लागू तो कर दिया, लेकिन इन्हें पढ़ाने के लिए कोई अध्यापक नियुक्त नहीं किया। पहले स्कूल में पार्ट टाइम, रिटायर्ड एवं अन्य विषयों के अध्यापक सेवाभाव से अपनी सेवाएं देते रहे। लेकिन सरकार ने अभी तक कोई अध्यापक नियुक्त नहीं किया। इसका सबसे ज्यादा गरीब बच्चों को उठाना पड़ रहा है, क्योंकि वे कोचिंग सेंटर में हजारों रुपये की फीस नहीं भर सकते।
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क्या है विद्यार्थियों की स्थिति
जाखल मंडी के राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 11वीं में मेडिकल, नॉन मेडिकल व कॉमर्स के 17 विद्यार्थी हैं तो वहीं 12वीं में तीनों संकायों के 39 विद्यार्थियों ने दाखिला लिया हुआ है। लेकिन जाखल मंडी के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में पढ़ रहे इन विद्यार्थियों को तीनों संकायों में फिजिक्स, कैमिस्ट्री, बायोलॉजी, अकाउंट, बिजनेस स्ट्डीज पढ़ाने के लिए कोई भी शिक्षक नहीं है। विद्यार्थी केवल हिंदी व इंग्लिश का ही पीरियड लगाकर अपने घर लौट रहे हैं।
विद्यार्थी बोले फेल होने के साथ भविष्य खराब होने का खतरा
12वीं कक्षा में मेडिकल के स्टूडेंट मनप्रीत, गुरदीप, रमनदीप, शालू इत्यादि ने बताया कि वह गरीब घर से संबंधित हैं। इसीलिए सरकारी स्कूल में दाखिला लेकर मन में किसी को डॉक्टर बनने की इच्छा है तो कोई इंजिनियर बनना चाहता है। लेकिन स्कूल में उन्हें पढ़ाने के लिए कोई अध्यापक ही नहीं है। ट्यूशन पर एक विषय कैमिस्ट्री के 9 हजार रुपये मांगे जा रहे हैं तो बायोलॉजी के लिए 12 हजार की मांग है। इतनी भारी फीस वे नहीं दे सकते। ऐसे में उन्हें अपने सपने टूटते दिख रहे हैं। विद्यार्थियों ने भरी आंखों से कहा कि वह खुद ही अपने स्तर पर एक दूसरे का सहारा बने हैं। कैमिस्ट्री, फिजिक्स व बायोलॉजी के विषयों की अपने स्तर पर पढ़ाई कर रहे हैं। लेकिन अध्यापकों की कमी उन्हें पूरी तरह से अखर रही है। उन्हे फेल होने का डर है और भविष्य अंधकार मय दिख रहा है। ऐसे में वह क्या करें, कुछ भी समझ नहीं आ रहा है।
हर महीने भेजी जाती है रिपोर्ट
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के कार्यकारी प्रधानाचार्य धर्मेंद्र ढांडा ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं है कि अध्यापक न होने के कारण विद्यार्थियों का भविष्य खतरे में है। वह हर महीने विभाग को विद्यार्थियों की जरूरत अनुसार अध्यापक न होने व इनके कारण आ रही परेशानी ये उच्च अधिकारियों को अवगत करा रहे हैं। लेकिन फिलहाल मेडिकल, नॉन मेडिकल व कॉमर्स के बच्चों को इनके विषयों के अध्यापक नहीं भेजे जा रहे हैं। जिस कारण समस्या आ रही है।
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विभाग के निदेशक को भेज चुके हैं प्रस्ताव
इस बारे जिला शिक्षा अधिकारी दयानंद सिहाग ने कहा कि वह दो महीने पहले ही विभाग के निदेशक को इन अध्यापकों की नियुक्ति के बारे प्रस्ताव भेज चुके हैं, लेकिन अभी तक उनकी ओर से कोई ज्वाब नहीं आया। विद्यार्थियों की समस्या देखते हुए सेवानिवृत्त अध्यापकों का भी सहारा लेना चाहा, लेकिन साइंस के अध्यापक नहीं मिले। जबकि अन्य विषय के अध्यापक तैयार नहीं हुए।
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