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निजी अस्पतालों में 8 माह में 43 तो सरकारी में 56 फीसदी डिलिवरी

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फतेहाबाद के नागरिक अस्पताल का प्रसूति कक्ष। - फोटो : Fatehabad
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फतेहाबाद। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में जाकर गर्भवती डिलिवरी करवाने से पीछे हट रही हैं और निजी अस्पतालों में जा रही है। जबकि सरकार करोड़ों रुपये का बजट सिर्फ स्वास्थ्य केंद्रों में होने वाली डिलिवरी पर ही खर्च कर रही है, जमीनी हकीकत ये है कि जिले में कई ऐसे स्वास्थ्य केंद्र हैं जहां पर महीने में तीन से पांच ही डिलिवरी हो रही है, ये ही नहीं सिविल सर्जन कार्यालय के नीचे पॉलीक्लीनिक में भी महीने में मात्र एक ही डिलिवरी हो रही है। जबकि यहां पर स्टाफ नर्स तक उपलब्ध है।
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जिले के 16 सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर पिछले 8 माह में 56 फीसदी तो निजी अस्पतालों में 43 फीसदी तक डिलिवरी हुई है। जिले के सबसे बड़े गांवों में शामिल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी हालात अच्छे नहीं हैं। गांव भिरड़ाना, कुलां, समैन के पीएचसी पर 10 से भी कम डिलिवरी हर माह हो रही है। इसके अलावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर हर माह जहां 30 से ज्यादा डिलिवरी होनी चाहिए वहीं बड़ोपल और जाखल में कम डिलिवरी केस आ रहे हैं। जिले के निजी अस्पताल में हर माह 494 डिलिवरी हो रही है। जिला नागरिक अस्पताल में हर माह होने वाली डिलिवरी से भी ये आंकड़ा ज्यादा है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक यहां पर अप्रैल माह से लेकर नवंबर माह तक 3948 डिलिवरी हो चुकी है। नवंबर माह तक हुई कुल डिलिवरी का ये 43.83 फीसदी है। संवाद
स्वास्थ्य केंद्र अप्रैल से नवंबर तक हुई डिलिवरी औसत
सीएचसी भूना 259 32
सीएचसी भट्टूकलां 216 27
सीएचसी बड़ोपल 195 24
सीएचसी जाखल 132 17
पॉलीक्लीनिक 9 1
प्राइवेट अस्पताल 3948 494
नागरिक अस्पताल फतेहाबाद 2392 299
उप नागरिक अस्पताल टोहाना 638 80
पीएचसी भिरड़ाना 65 8
पीएचसी नागपुर 211 26
सीएचसी रतिया 484 61
पीएचसी पिरथला 161 20
पीएचसी कुलां 25 3
पीएचसी समैन 38 5
पीएचसी पीलीमंदोरी 89 11
पीएचसी नहला 71 9
पीएचसी बनगांव 74 9
बडे़ गांवों के पीएचसी पर भी कम डिलिवरी
जिले के सबसे बड़े गांवों में शामिल पीएचसी पर भी डिलिवरी कम हो रही है। गांव समैन की पीएचसी पर हर माह मात्र 5 और पीएचसी कुलां में मात्र 3 ही डिलिवरी केस हो रहे हैं। इसके अलावा भिरड़ाना पीएचसी के हालात ये है कि यहां पर हर माह 8 डिलिवरी हो रही है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जाखल में भी डिलिवरी कम हो रही है।
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पॉलीक्लीनिक में 8 माह में मात्र 9 डिलिवरी
सिविल सर्जन कार्यालय के नीचे पॉलीक्लीनिक में भी डिलिवरी के लिए केस नहीं आ रहे हैं या फिर यहां का स्टाफ गर्भवती को डिलिवरी के लिए जागरूक नहीं कर पा रहा है। पॉलीक्लीनिक में पिछले 8 माह में मात्र 9 ही डिलिवरी हुई है। यानि हर माह औसत एक ही डिलिवरी हो रही है।
स्टाफ तो कहीं डॉक्टर, तो कहीं सुविधा नहीं
विशेषज्ञों की माने तो सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर डिलिवरी कम होने का कारण ये है कि पीएचसी समैन में स्टाफ नर्स दो ही है और डॉक्टर और फार्मासिस्ट नहीं है। समैन की डिलिवरी टोहाना रेफर की जा रही है। पीएचसी कुलां में डॉक्टर है लेकिन सुविधा न होने का हवाला देकर डिलिवरी नहीं करवा रहे है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जाखल में भी डिलिवरी कम है, यहां पर पहले पंजाब से डिलिवरी आती थी, लेकिन कोरोना के चलते केस नहीं लिए जा रहे है। पॉलीक्लीनिक में पहले डिलिवरी केस हो रहे थे लेकिन अब नाममात्र काम हो रहा है।
कोट
जिले के कुछ स्वास्थ्य केंद्रों पर डिलिवरी कम हो रही है। पीएचसी में हर माह 10 से ज्यादा और सीएचसी पर हर माह 30 से ज्यादा होनी चाहिए। स्टाफ नर्स को सख्ती से कहा गया है कि वह अपने केंद्रों में डिलिवरी बढ़ाएं, नहीं तो उन पर एक्शन लिया जाएगा।
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- डॉ. सुनीता सोखी, उप सिविल सर्जन
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