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42 फीसदी महिलाएं बनी गांवों की चौधराइन

Mon, 11 Jan 2016 11:16 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला फतेहाबाद
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इस बार रिकार्ड 41.37 फीसदी महिलाओं व बेटियों के हाथ में गांव की चौधर आई है। जबकि 58.62 पुरुष इस बार सरपंच बने हैं। हालांकि पढ़ी लिखी पंचायत की बात को ज्यादा तवज्जो नहीं मिली।
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सरपंचों में ग्रेजुएट की संख्या न के बराबर है। सरकार की 10वीं पास की योग्यता को ही अधिक तवज्जो मिली है। पहले चरण में 60 फीसदी उम्मीदवार 10वीं पास हैं जबकि ग्रेजुएट उम्मीदवारों की संख्या मात्र 7.76 फीसदी रही।

ग्रेजुएट उम्मीदवारों में भी महिलाओं ने बाजी मारी है। ग्रेजुएट सरपंचों में 6 महिलाएं शामिल हैं, जबकि 3 पुरुष प्रत्याशी शामिल हैं।

 फतेहाबाद में पहले चरण के चुनाव संपन्न होने पर कुल 116 पंचायतों में 48 पदों पर महिलाएं काबिज हुई हैं। जबकि 68 गांवों में पुरुषों की सरकार बनी हैं।

ये हैं छोटी सरकार के सबसे ज्यादा पढ़े लिखे:
सरपंच           पंचायत           पढ़ाई                 जाति
इंद्रावती           अयाल्की         बीए                  जनरल
सतिंद्र कौर        काताखेड़ी        बीए                   जनरल
सुनीता रानी          नागपुर        एम.ए.बीएड              जनरल
ज्याति चंदेल         रजाबाद         बी.ए. बीएड            जनरल
कविता रानी         अमानी           बी.ए.                     जनरल
प्रीति               कंहडी              बी.ए.                       एससी
हरजिंन्द्र कुमार         बनावाली सोतर  बीए अकाउंट            बीसी
विजय हरिपाल सिंह     गाजूवाला           बीए एलएलबी         जनरल
पवन कुमार                बीए                बीए                    जनरल

कौन कितना पढ़ा-लिखा चलाएगा गांव की सरकार
         फतेहाबाद                             टोहाना
पंचायत-   67                              49
महिलाएं-  39                             29
पुरुष-    28                                20
एससी-   14                               12
बीसी व ओबीसी-17                   8
जनरल व अन्य -36                  29
पांचवीं पास- 0                          0
आठवीं पास- 11                        9
दसवीं पास- 45                         25
बारहवीं पास- 6                        11
ग्रेजुएशन व ऊपर- 5                   4


पिता नहीं बन पाए तो 21 साल की ज्योति बनी रजाबाद की चौधराइन
कभी सपने में नहीं सोचा था कि सरपंच बनूंगी। लेकिन वक्त ऐसा आया कि सब कुछ बदलकर रख दिया। ये बात कही है गांव रजाबाद से सरपंच चुनी गई 21 साल की ज्योति चंदेल ने जो एम.एम.कॉलेज से बीएड की पढ़ाई कर रही है।
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पिता किरनपाल रजाबाद पंचायत से चुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन सरकार की नई नीति आड़े आ गई। गांव के लोगों ने बेटी ज्योति चंदेल को चुनाव लड़वाने की सलाह दी।

रविवार को चुनाव के बाद आए परिणाम में दीपक चंदेल ने सामने खड़े उम्मीदवार गुरतेज को 190 वोटों से हराकर सरपंच बन गई।
 
मुनीम को ग्रामीणों ने बनाया सरपंच
फतेहाबाद की अनाजमंडी में आढ़त की दुकान पर मुनीमी कर रहे हरजिंद्र को ग्रामीणों ने गांव की चौधर सौंपी है। हरजिन्द्र बीए अकाउंटेंट हैं। हरजिन्द्र को ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से गांव का सरपंच चुना है।

पत्नी की जगह पति तो सास की जगह बहू संभालेगी गांव की चौधर
मताना गांव की चौधर अब पत्नी की जगह पति तो गांव बड़ोपल की चौधर अब सास की जगह बहू संभालेगी। यानि गांव की चौधर घर की जगह घर पर ही रह गई।

बड़ोपल में निर्वतमान सरपंच रामूर्ति देवी की जगह उनकी बहू शारदा देवी ने चुनाव जीता है। सास राममूर्ति देवी दो बार सरपंच रह चुकी है।

खास बात यह भी रही कि गांव बड़ोपल पंचायत महिला के लिए रिजर्व नहीं थी बावजूद इसके यहां से एक बार फिर महिला सरपंच चुनी गई।

मताना गांव पंचायत में पिछली बार दीपक रानी सरपंच बनी थी जबकि इस बार उनके पति संजय रूखाया ने चुनाव जीता है।


शहीदांवाली की सुमन 4 तो भिरड़ाना से सुभाष चंद्र 2025 वोटों से हुए विजयी
गांव शहींदावाली की सुमन को मात्र 4 वोटों से जीत हासिल हुई है। शहीदांवाली पंचायत में कुल 1380 वोट हैं जिसमें से सुमन को 394 जबकि निकटतम प्रतिद्वंद्वी गुरमीत कौर को 390 वोट मिले।

गांव भिरड़ाना से सुभाष चंद्र ने सबसे अधिक वोटों से जीत हासिल की है। सुभाष चंद्र ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कालासिंह को 2025 वोटों से हराया। गांव में कुल 7880 वोट हैं। जिसमें से सुभाष को 3092 वोट तथा काला सिंह को 1067 वोट मिले।

सबसे अधिक बस्ती भीमां में तो दरियापुर में हुआ सबसे कम मतदान
प्रथम चरण के मतदान में मतदाताओं में खूब जोश रहा। फतेहाबाद व टोहाना ब्लाक की बात करें तो सबसे अधिक बस्ती भीमा में 95.5 फीसदी तथा सबसे कम दरियापुर में 78.4 प्रतिशत वोट डले।
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