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जिले में दुर्लभ वन्यजीवों के सरंक्षण का रास्ता साफ, तीन पंचायतों द्वारा %सामुदायिक संरक्षित क्षेत्र’ का प्रस्ताव

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अमर उजाला ब्यूरो
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फतेहाबाद।
जिले की तीन पंचायतों ने सामुदायिक सरंक्षित क्षेत्र घोषित करने के लिए प्रस्ताव दिया है। दुर्लभ प्रजातीय वन्यप्राणियों के सरंक्षण की दिशा में इसे ऐतिहासिक शुरुआत मानी जा रही है। इसके बाद राष्ट्रीय पक्षी मोर, राज्य पक्षी काला तीतर और राज्य पशु काले हिरण का सरंक्षण किया जा सकेगा। तीन पंचायतों धांगड़, ढाणी माजरा और काजलहेड़ी से प्रस्ताव मिलने के बाद जिला प्रशासन ने जिला में सामुदायिक संरक्षित क्षेत्र बनाने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। उपायुक्त डॉ. हरदीप सिंह के दिशा निर्देशानुसार अतिरिक्त उपायुक्त डॉ. जय कृष्ण आभीर ने इस विषय पर काम शुरू करते हुए प्रथम चरण के तहत तीन पंचायतों को सामुदायिक संरक्षित क्षेत्र के लिए जमीन देने के लिए रजामंद करते हुए उनका सहयोग लिया है।
इस विषय पर जिला फतेहाबाद में अतिरिक्त उपायुक्त डॉ. जय कृष्ण आभीर ने बताया कि हमारे जिले के लगभग 40 गांवों में काफी जगह ऐसी है, जो कि पंचायत के अधीन है और यह इलाका बणी के रूप में पूर्ण विकसित है, जहां तालाब, बहुत प्रकार के पुराने पेड़, कई प्रकार के पशु पक्षी जैसे कालाहिरण, मोर, काला तीतर, खरगोश आदि रहते हैं, जिनमें से कुछ तो दुर्लभ प्रजाति के हैं और कुछ दुर्लभ होते जा रहे हैं। आज के समय में पक्षियों व वन्यप्राणियों के प्राकृतिक निवास क्षेत्र सिकुड़ते जा रहे हैं। इस कारण दुर्लभ वन्यजीवों की संख्या घटती व सिमटती जा रही है। इसलिए बचे हुए कुदरती वन्यजीव आवासों का सरंक्षण आवश्यक हो गया है।
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अतिरिक्त उपायुक्त ने बताया कि वन्यजीव संरक्षण कानून (संशोधित) 2002 की धारा 36 (सी) व 36 (डी) के अनुसार पंचायत भूमि को 'सामुदायिक संरक्षित क्षेत्र’ घोषित किया जा सकता है, जिसमें जमीन का स्वामित्व नहीं बदलेगा अर्थात पंचायत का ही रहेगा और पंचायत द्वारा गठित कमेटी ही इसका प्रबंधन करेगी। 'सामुदायिक संरक्षित क्षेत्र' घोषित होने के बाद इसमें मनरेगा से प्रबन्धन कार्य करवाए जा सकेंगे। वन व वन्यप्राणी विभाग द्वारा भी पेड़-पौधे व बजट उपलब्ध कराया जा सकेगा तथा जीवों को मुक्ममल निवास स्थान मिला रहेगा।
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इसी दिशा में सार्थक पहल करते हुए प्रथम चरण में ग्राम पंचायत काजलहेड़ी ने दुर्लभ प्रजाति के कछुओं के संरक्षण के लिए, ग्राम पंचायत धांगड़ ने काले हिरणों (राज्य पशु) के संरक्षण के लिए और ग्राम पंचायत ढाणी माजरा ने राष्ट्रीय पक्षी मोर व राज्य पक्षी काला तीतर के संरक्षण के लिए पंचायती जमीन देने फैसला लिया है। अतिरिक्त उपायुक्त डॉ. आभीर स्वयं इन गावों का दौरा करके ऐसे स्थानों का निरीक्षण किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री सुशासन सहयोगी अंजू आर्य, पीएफ.ए. अध्यक्ष विनोद कड़वासरा और इन गावों के सरपंच भूपसिंह फौजी, प्रेम कुमार, सुशील कुमार आदि मौजूद थे।
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