अपने सपूत हरि सैनी का 54 वर्षों से टोहना कर रहा इंतजार
अमर उजाला ब्यूरो
टोहाना। विंग कमांडर अभिनंदन भले ही 60 घंटे में ही भारत वापस लौट आए हों लेकिन टोहाना का एक परिवार पाकिस्तान के खिलाफ जंग में गए अपने परिवार के मुखिया का आज तक इंतजार कर रहा है। टोहाना निवासी वीरेंद्र सैनी के पिता हरि सिंह सैनी 1965 की जंग के दौरान ड्यूटी पर जम्मू के छंग सैक्टर में गए थे लेकिन कभी वापस नहीं लौटे। उनकी काफी तलाश की गई तो आसपास के कुछ लोगों ने बताया था कि पाकिस्तानी सैनिकों ने एक व्यक्ति को बार्डर के पास से अपने साथ ले जाते देखा गया था। इसके बाद अगले ही साल यानी 1966 में ही सरकार ने बिना उनके पिता हरि सिंह सैनी का शव मिले, उन्हें शहीद घोषित कर दिया। नम आंखों से वीरेंद्र सैनी बताते हैं कि वो इतने बदकिस्मत रहे कि अंतिम बार अपने पिता का चेहरा भी नहीं देख सके। तब से लेकर आज तक वो इस उम्मीद में हैं कि शायद उसके पिता कभी वापस लौट आए।
कौन थे हरी सिंह सैनी
टोहाना निवासी विरेंद्र सैनी ने बताया कि उनके पिता शहीद हरि सिंह सैनी संयुक्त पंजाब आर्म्स पुलिस में कांस्टेबल के पद पर भर्ती हुए थे। उन्होंने बताया कि वर्ष 1965 में जब वे इंस्पेक्टर के पद पर पहुंचे तो भारत-पाकिस्तान के साथ युद्ध का ऐलान हो गया। इसके बाद भारत सरकार ने आदेश पर वे जम्मू के छंब सैक्टर में ड्यूटी पर चले गए। सैनी ने बताया कि युद्ध के दौरान ही उनके पिता की गायब होने की जानकारी उन्हें दी गई। कुछ समय बाद तत्कालीन एसपी ने कहा कि पाकिस्तान के रेडियो पर उनकी आवाज सुनी है लेकिन वर्ष 1966 में उन्हें उनके पिता का शव दिए बिना मृत घोषित कर एक पत्र जारी कर दिया गया। भावुक होते हुए वीरेंद्र सैनी बोले कि वे अपने पिता के अंतिम दर्शन भी नहीं कर पाए।
तत्कालीन सरकार ने दिया अवॉर्ड लेकिन अभी तक नहीं मिला वीरता पुरस्कार
विरेंद्र सैनी ने बताया कि उनके पिता की उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उनकी माता स्वर्गीय मान कौर को तत्कालीन पंजाब एंड हरियाणा गवर्नर बीएम चक्रवर्ती द्वारा 26 जनवरी को 1967 को अवॉर्ड दिया गया। उस समय वीरता पुरस्कार की घोषणा भी हुई लेकिन अनदेखी के चलते अभी तक दिया नहीं गया। सैनी ने बताया कि तत्कालीन हिसार जिला के उपायुक्त हरफूल सिंह ने उनके परिजनों को सहायता राशि के रूप में 6 हजार रुपये और दमकौरा गंाव में सिंचाई विभाग की 20 एकड़ जमीन में से 11 एकड़ जमीन लीज पर दे दी। उस समय उन्होंने रुपया लगाकर काम किया तो कुछ समय बाद उनसे कब्जा धारकों द्वारा जमीन छीन ली गई। सैनी ने बताया कि उनके दो भाई व चार बहनों का परिवार था जिनका पालन-पोषण स्वर्गीय माता मान कौर ने मेहनत व 121 रुपये महीना मिलने वाली पेंशन से किया। जमीन छिन जाने के बाद उनकी माता व परिजनों ने सरकारों से मदद मांगी, कोर्ट का दरवाजा खटखटाया लेकिन उनकी कहीं सुनवाई नहीं हुई।