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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने दिए फतेहाबाद को ‘मॉडल सिटी’ बनाने के निर्देश, नप प्रशासन के हाथ-पांव फूले

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फतेहाबाद। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने प्रदेश के सात शहरों को सफाई के मामले में मॉडल सिटी बनाने के लिए चुना है। इन सात शहरों में फतेहाबाद शहर का भी नाम शामिल है। लेकिन एनजीटी के इन आदेशों ने फतेहाबाद नगर परिषद के अधिकारियों की नींद उड़ा दी है। दरअसल मॉडल सिटी बनाने के लिए एनजीटी ने जिन शर्तों को रखा है, फतेहाबाद नगर परिषद के पास उनमें से एक भी शर्त पूरा करने के न तो संसाधन है और न ही कोई अन्य वैकल्पिक व्यवस्था। एनजीटी ने इन सात शहरों को मॉडल सिटी बनाने के लिए सितंबर तक का समय दिया है और इस लिहाज से फतेहाबाद नप प्रशासन के पास वक्त बेहद कम बचा है।
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एनजीटी ने प्रदेश के जिन सात शहरों को मॉडल सिटी बनाने के लिए चुना है उनमें फतेहाबाद के अलावा सीएम सिटी करनाल, रोहतक, पानीपत, थानेसर, जींद एवं पंचकूला भी शामिल हैं। एनजीटी के आदेश आने के बाद स्थानीय निकाय विभाग भी हरकत में आया है और सभी संबंधित नगर निकाय प्रशासन के साथ संबंधित जिला उपायुक्तों को भी इस संदर्भ में एक पत्र जारी कर आदेशों की पालना करने के निर्देश दिए गए हैं।
इन तीन शर्तों को करना होगा लागू
1. सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट
2. बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट
3. प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट
फतेहाबाद में ये है तीनों शर्तों की मौजूदा स्थिति
1. सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट : कचरा प्रबंधन प्लांट की घोषणा साढ़े तीन साल पहले की गई थी। लेकिन इसके बाद से नगर परिषद प्रशासन आज तक इसका टेंडर ही अलाट नहीं कर सका है। दरअसल इसके लिए कोई कंपनी ही मैदान में नहीं आई। पहले महज एक कंपनी के आवेदन करने के चलते नप प्रशासन टेंडर रद्द करता रहा। लेकिन हाल ही फरवरी में आखिरकार नगर परिषद प्रशासन ने कचरा प्रबंधन प्लांट के लिए टेंडर अलाट कर दिए थे लेकिन वर्क आर्डर जारी होने से पहले उन अलाट किए गए टेंडर को रद्द कर दिया गया। अब दोबारा टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई और दस जून को टेंडर खुलने हैं। सितंबर तक पूरा होने की स्थिति वैसे भी किसी हाल में नहीं है। 2. बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट : फतेहाबाद में जब सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का काम ही साढ़े तीन साल से अधूरा है तो बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट का सपना तो दूर की कौड़ी है। वैसे भी ये व्यवस्था स्वास्थ्य विभाग को अपने स्तर पर करनी थी। लेकिन स्वास्थ्य विभाग अभी तक ये सुनिश्चित तक नहीं कर सका है कि इंसानी खून से रंगे ग्लब्स और रूई आदि खुले में ना फेंके जाएं। आज भी उनके कर्मचारी खून से रंगे ग्लब्स, रूई और अन्य बायो मेडिकल वेस्ट खुले ही में फेंक देते हैं।
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3. प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट : इसके लिए जरूर नगर परिषद प्रशासन ने तैयारियां शुरू की हैं। उन दुकानों को चिह्नित किया जा रहा है जो प्लास्टिक का बहुतायत में इस्तेमाल करती हैं। इसके अलावा सामान्य रेहड़ियों, दुकानों में पॉलिथीन के लिफाफों को प्रतिबंधित किया गया है, हालांकि अभी तक चालान करने की प्रक्रिया शुरू ना होने के चलते ये व्यवस्था उतनी प्रभावी नहीं है, जितनी इसे होनी चाहिए थी। ----------------------
शर्तें पूरी हुईं तो स्वच्छता सर्वेक्षण रैंकिंग में आ सकता है सुधार
पिछली बार स्वच्छता सर्वेक्षण रैंकिंग में फतेहाबाद की रैंकिंग सुधरी है लेकिन इतनी नहीं कि वो टॉप टेन में जगह बना पाता। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण था कि फतेहाबाद नप के पास अपना सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट नहीं था। अगर ऐसा होता तो फतेहाबाद को सीधे एक हजार प्वाइंट्स का फायदा पहुंचाता और फतेहाबाद टॉप टेन सिटी में शामिल होता।
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सार्वजनिक स्वच्छता के मामले में ओडीएफ प्लस रैंक पर है फतेहाबाद
फतेहाबाद शहर को ओडीएफ प्लस रैंक इसी साल ही मिल चुका है। फतेहाबाद में कुल 25 वार्ड हैं जिसके मुकाबले सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालय मिलाकर शहर में कुल 27 सार्वजनिक शौचालय हैं। केंद्र सरकार की टीम द्वारा जनवरी में किए गए औचक निरीक्षण में भी ये सब अच्छी हालत में मिले थे।
वर्जन
एनजीटी के आदेशों के अनुसार कार्य शुरू कर दिया गया है। कचरा प्रबंधन प्लांट का टेंडर जून में खोला जाना है और प्लास्टिक बैन के लिए पॉलिथीन बेचने वाले दुकानदारों के चालान काटने शुरू कर दिए गए हैं। हमारी कोशिश है कि एनजीटी की डेडलाइन तक सभी जरूरी प्रबंध कर लिए जाएं।
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- जितेंद्र सिंह, नगर परिषद ईओ, फतेहाबाद।
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