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ल:क अदालत के फैसलों को ऊपरी किसी अदालत में चुनौती नहीं : सीजेएम

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अमर उजाला ब्यूरो
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फतेहाबाद। जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के अध्यक्ष और जिला एवं सत्र न्यायाधीश एके जैन के दिशा निर्देशानुसार शनिवार को न्यायिक परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। इसमें जिला स्तर पर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरती सिंह व मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अर्चना यादव की कोर्ट में विभिन्न मामलों की सुनवाई की गई। इसके अलावा उपमंडल टोहाना में उपमंडल न्यायिक दंडाधिकारी विनय शर्मा व रतिया में उपमंडल न्यायिक दंडाधिकारी अशोक मान की कोर्ट में भी लोक अदालत आयोजित कर विभिन्न मामलों को सुनवाई के लिए रखा गया।
उन्होंने बताया कि आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में 1423 मामलों में से 816 मामलों का निपटान करते हुए 55 लाख 31 हजार 311 रुपये की राशि जुर्माना व समझौता के रूप में पास की गई। उन्होंने बताया कि इन मामलों में प्री-लिटिगेशन के 856 मामलों में से 653 का निपटारा और 20 लाख 89 हजार 861 रुपये की राशि जुर्माना व समझौता के तौर पर पास की गई। जबकि कोर्ट में लंबित मामलों के 567 मामलों में से 163 का निपटारा करते हुए 34 लाख 41 हजार 450 रुपये की राशि जुर्माना व समझौता के रूप में पास की गई।
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इस अवसर पर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी राहुल बिश्नोई ने बताया कि लोक अदालत के फैसलों को किसी ऊपरी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती है। इसलिए लोगों को चाहिए कि वे इन लोक अदालतों में केसों का निपटान करवाकर लाभान्वित हों। उन्होंने कहा कि इस राष्ट्रीय लोक अदालत में आपराधिक मामलों, एनआई एक्ट 138, एमएसीटी, एआईआर, ट्रांसपोर्ट, वैवाहिक, श्रम विवाद, भूमि अधिग्रहण, किराया, बैंक रिकवरी, राजस्व, बिजली व पानी बिल सहित विभिन्न प्रकार के मामलों की सुनवाई की गई। इस राष्ट्रीय लोक अदालत में न्यायाधीशों की मौजूदगी में पैनल के अधिवक्ताओं के सहयोग से दोनों पक्षों की आपसी सहमति के आधार पर मामलों का निपटारा किया गया। सीजेएम ने लोगों से आह्वान किया है कि वे आगामी समय में आयोजित की जाने वाली लोक अदालत में अपने केसों को रखकर धन व समय की बचत करें। लोक अदालत में रखे गए केसों का निपटान आपसी सहमती के आधार पर किया जाता है।
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