अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद।
जिले में डेंगू का प्रकोप किसी महामारी की भांति बढ़ता ही जा रहा है। इस बार फतेहाबाद शहर की 11 साल की मासूम बच्ची डेंगू का शिकार बनी है। डेंगू की बिमारी के चलते शहर के रोटरी क्लब सदस्य एवं प्रमुख समाजसेवी कपिल चंदेल की बेटी मानवी ने चंडीगढ़ में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया है। डेंगू से फतेहाबाद में दूसरी एवं जिले में ये नौंवी मौत हुई है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग ने एक भी मौत का कारण डेंगू नहीं माना है। स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में अभी भी डेंगू पीड़ित मौतों की संख्या शून्य ही बताई जा रही है। जबकि वास्तविकता ये है कि डेंगू के चलते फतेहाबाद शहर में ही दो मौतें हो चुकी हैं जबकि टोहाना में अब तक रिकॉर्ड 7 मौतें डेंगू के कारण हो चुकी हैं।
रोटरी क्लब के सदस्य एवं अनाजमंडी के आढ़ती कपिल चंदेल की 11 वर्षीय पुत्री मानवी को कुछ दिन पहले बुखार हुआ था और डेंगू की पुष्टि हुई थी। पहले उसका शहर के निजी हस्पताल में इलाज चल रहा था। बताया गया है कि इलाज के दौरान अचानक उसकी तबियत बिगड़ गई। इसके बाद परिजन उसे हिसार के निजी अस्पताल और फिर फोर्टिस अस्पताल मोहाली में ले गए। फोर्टिस अस्पताल में मानवी को लाइफ सपोर्टिंग सिस्टम पर रखा गया था, लेकिन शनिवार को मानवी ने दम तोड़ दिया। मानवी शहर के निजी स्कूल में चौथी कक्षा में पढ़ती थी। उसके निधन से शहरभर में शोक की लहर दौड़ गई है।
टोहाना और फतेहाबाद सर्वाधिक प्रभावित
टोहाना और फतेहाबाद शहर डेंगू से सर्वाधिक प्रभावित इलाके हैं। सरकारी अस्पताल छोड़िए, इन जगहों पर निजी अस्पतालों में भी मरीजों के लिए जगह नहीं बची है। एक अनुमान के मुताबिक अकेले फतेहाबाद शहर में ही डेंगू के दो हजार से अधिक मरीज मिल चुके हैं। कमोबेश यही स्थिति टोहाना शहर की भी है। टोहाना में तो डेंगू के चलते 7 लोगों की मौत भी हो चुकी है। इनमें भाटिया नगर निवास मिलन भाटिया और आजाद नगर निवासी अमीरचंद गर्ग, पार्षद ठकराल के भाई, अशोक कुमार सहित कई लोग शामिल हैं। हैरत की बात तो ये है कि टोहाना के भाटिया नगर में जिस मिलन भाटिया की मौत हुई थी, उसके घर में विभाग को डेंगू का लार्वा मिला था, लेकिन इसके बावजूद कोई कार्रवाई न होने से आखिरकार मिलन को डेंगू ने डस लिया।
निजी अस्पतालों के कार्ड टैस्ट पॉजिटिव को डेंगू पीड़ित नहीं मानता स्वास्थ्य विभाग
दरअसल स्वास्थ्य विभाग के औपचारिक आंकड़ों और जिले के डेंगू मरीजों की संख्या में जमीन आसमान का अंतर इसलिए है क्योंकि स्वास्थ्य विभाग निजी अस्पतालों द्वारा किए गए जाने डेंगू के कार्ड टेस्ट की रिपोर्ट की पुष्टि नहीं करता और ना ही इन मरीजों को डेंगू पीड़ित मानता है। अभी तक जिन मरीजों की भी मौत हुई है, वे सभी निजी अस्पतालों में ही उपचाराधीन रहे थे। सिविल सर्जन डॉ. मनीष बंसल की मानें तो अलाइजमा टैस्ट में पॉजिटिव आने के बाद ही मरीज में डेंगू की पूरी तरह पुष्टि होती है। इसी कारण से स्वास्थ्य विभाग के औपचारिक आंकड़े सवा दो सौ डेंगू पीड़ित मरीजों के हैं।
ये हैं डेंगू के लक्षण
1. तेज सिरदर्द व बुखार का होना
2. मांसपेशियों तथा जोड़ों में दर्द होना
3. आंखों के पीछे दर्द होना
4. जी मिचलाना या उल्टी होना
5. शरीर पर लाल चकते होना
6. गंभीर मामलों में नाक, मुंह और मसूढ़ों से खून आना
इस प्रकार कर सकते हैं डेंगू से बचाव
1. पानी से भरे हुए बर्तनों और टंकियों को ढक कर रखें।
2. कूलर में भरे पानी को निकाल दें और कूलर को पूरी तरह सुखा दें।
3. डेंगू मच्छर दिन के समय ज्यादातर पैर पर काटता है, उसी अनुसार कपड़े और जुराब पहने।
4. अपने आसपास मच्छरों की संख्या बढ़ने पर उनके लिए आवश्यक कदम उठाएं
ये हैं जिले में डेंगू का प्रकोप बढ़ने की मुख्य वजह
1. पूरे जिले में सफाई व्यवस्था के बुरे हालात
2. जिलेभर में उम्मीद से काफी कम फोगिंग का होना
3. फतेहाबाद शहर में फोगिंग मशीन ही नहीं है
4. सड़कों पर गड्ढों के चलते जलभराव हुआ और मच्छरों को पनपने का मौका मिला
5. स्वास्थ्य विभाग ने लगातार लचीला रवैया अपनाया, जिसके चलते डेंगू का प्रकोप बढ़ा