फतेहाबाद। एंबुलेंस विवाद से अभी-अभी राहत पाकर निकले नगर परिषद प्रधान दर्शन नागपाल के सामने दस पार्षदों ने मोर्चा खोल दिया है। शहर के विभिन्न वार्डों के 10 पार्षदों ने दर्शन नागपाल पर विकास में भेदभाव के आरोप लगाए हैं। विरोधी पार्षदों का आरोप है कि नागपाल अपने चंद चहेते पार्षदों के वार्डों से इतर शहर के विकास के बारे में सोच ही नहीं रहे हैं। उन्होंने दर्शन नागपाल को शहर के विकास की परवाह ना करने वाला प्रधान बताया है। उधर दर्शन नागपाल ने भी इस मामले में आरोप लगाने वाले पार्षदों पर पलटवार किया है। नागपाल ने साफ तौर पर कहा है कि विकास में भेदभाव नहीं, बल्कि 15 अगस्त समारोह में सम्मानित ना होने की टीस के चलते विरोधी पार्षद उनपर आरोप लगा रहे हैं।
दस पार्षदों ने की बैठक, उठाए विभिन्न मुद्दे
शुक्रवार को एडवोकेट वीरेंद्र, नेहा मित्तल, वजीर जाखड़, पार्षद प्रतिनिधि रणजीत ओड, सतीश चराईपोत्रा, महेश मक्कड़, मनोहर लाल कुका नारंग, एडवोकेट विनय शर्मा, प्रतिनिधि दीपू टूटेजा व सौरभ मेहता ने बैठक की और प्रधान को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की रणनीति बनाई। बैठक उपरांत लामबंद हुए पार्षदों ने नप प्रधान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे 2-4 चहेते पार्षदों से बाहर शहर के विकास के बारे में कुछ सोच ही नहीं पा रहे हैं, जिससे शहर में सफाई व्यवस्था, स्ट्रीट लाइटों, जर्जर गलियों के हालात सुधारने जैसे अनेक मुद्दे गंभीर रूप ले चुके हैं। रोष जताने वाले इन पार्षदों ने कहा कि उनके वार्डों के लोगों ने बड़ी उम्मीदों के साथ उन्हें वार्ड पार्षद बनाकर नगर परिषद में भेजा था ताकि वे अपने वार्डों का विकास करवा सकें। लेकिन नगर परिषद प्रधान दर्शन नागपाल ने अपनी गलत कार्य प्रणाली के चलते उनके वार्डों के लोगों की उम्मीदों पर पानी फेरने का काम किया है। विरोधी हुए पार्षद यहीं नहीं रूके और बोले की नप प्रधान अपना निजी द्वेष निकालने के लिए भी उनके वार्डों के विकास कार्यों को प्रभावित कर रहा है। उनके वार्डों की अनेक गलियां स्ट्रीट लाइटें न होने के चलते शाम होते ही अंधेरे की चपेट में आ जाती है, जबकि चंद चहेते पार्षदों के वार्डों में नियमों को ताक पर रखकर प्रधान ने एक ही जगह 10-10 लाइटें लगवा डाली है। इसके अलावा नगर परिषद प्रधान जानबूझ कर शहर में लगातार बढ़ रही सफाई कर्मियों की कमी को पूरा करने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठा रहे, जिससे शहर में गंदगी के ढेर आमजन के जी का जंजाल बन चुके हैं। पार्षदों ने स्पष्ट किया कि यदि जल्द नप प्रधान ने अपनी कार्य प्रणाली को सुधारते हुए शहर व उनके वार्डों की समस्याओं को हल करवाने की तरफ ध्यान नहीं दिया तो वे जनहित में धरना-प्रदर्शन जैसे कठोर कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।
नगर परिषद प्रधान नागपाल ने भी किया पलटवार
इस बारे में बात करने पर नप अध्यक्ष दर्शन नागपाल ने विरोधी पार्षदों को चुनौती देते हुए कहा कि एक भी पार्षद उनकी आंखों में आंखें डालकर ये नहीं कह सकता कि उनके वार्ड में काम नहीं हुआ है। नागपाल ने कहा कि पार्षद नेहा मित्तल के वार्ड में उन्होंने खड़े होकर सीवरेज लाइन डलवाई है, उस वक्त तो स्थानीय पार्षद मौजूद ही नहीं थी। इसके अलावा एमसी कॉलोनी में पानी की निकासी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। नागपाल ने कहा कि इस बार सामाजिक कामों में योगदान के लिए नगर परिषद की तीन महिला पार्षद सम्मानित हुई हैं। इस पर गर्व करने की बजाए आरोपों की आड़ में इस बात की टीस निकाली जा रही है कि उन्हें सम्मानित नहीं किया गया। दर्शन नागपाल ने कहा कि एलईडी लाइट्स के प्रस्ताव के चलते स्ट्रीट लाइटें नहीं खरीदी जा रही, इसके आदेश बाकायदा सरकार ने दिए हैं। शहर की सफाई व्यवस्था को सुधारने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। नए उपकरण और सफाई कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने के प्रयास चल रहे हैं।
सौरभ मेहता हमेशा से नागपाल के पक्षधर रहे, अब हुए खिलाफ
जगजीवनपुरा की पार्षद ज्योति मेहता एवं उनके पति सौरभ मेहता को शुरु से ही नप प्रधान दर्शन नागपाल का कट्टर समर्थक माना जाता रहा है। कार्यकाल के शुरुआती दिनों में सौरभ मेहता और उनकी पार्षद पत्नी ज्योति मेहता हमेशा नप प्रधान के साथ ही देखे जाते रहे हैं। लेकिन एकाएक उनका विरोधी पक्ष के साथ आना अचरज भरा रहा है। इससे पहले नगर परिषद की बैठक में भी पार्षद ज्योति मेहता ने नप प्रशासन पर घोटाले का आरोप लगाया था। इसके अलावा पार्षद सतीश चराईपौत्रा अब तक पर्दे के पीछे से काम कर रहे थे लेकिन शुक्रवार को वो भी खुलकर दर्शन नागपाल के विरोध में आ खड़े हुए। उनके रिश्तेदार एवं पार्षद प्रतिनिधि महेश मक्कड़ पहले भी दर्शन नागपाल को घेरते रहे हैं। ये माना जाता रहा है कि महेश मक्कड़ की खिलाफत को सतीश चराईपौत्रा हमेशा पर्दे के पीछे से समर्थन देते रहे हैं। वैसे भी ये भी चर्चाएं थी कि नप प्रधान के चुनाव के समय सतीश चराईपौत्रा ने दर्शन नागपाल की ‘मदद’ की थी, लेकिन अब उनके भी खिलाफ आने से नागपाल की मुश्किलें आगे और बढ़ सकती हैं।