अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद। पिछले दिनों हुई बारिश से खराब फसल के मुआवजे की मांग को लेकर वीरवार को लगातार तीसरे दिन भारी संख्या में लघु सचिवालय में मुआवजा के फार्म देने पहुंचे। कृषि अधिकारियों ने मुआवजे के अंतिम तिथि बीत जाने का हवाला देते हुए फार्म लेने से इंकार कर दिया, इस पर किसान भड़क उठे और कृषि विभाग के कार्यालय में जमकर हंगामा किया। किसानों के हंगामे को देखते हुए उपायुक्त डा. जेके आभीर ने किसानों को लघु सचिवालय के सभागार में बुलाया और उनसे बातचीत के बाद उनके फार्म स्वीकार करने के आदेश कृषि विभाग के अधिकारियों को दिए।
22 से लेकर 24 सितंबर को हुई बारिश के बाद प्रदेश सरकार द्वारा 48 घंटे के अंदर मुआवजे के आवेदन कृषि विभाग को दिए गए थे। बुधवार सांय कृषि वि भाग के पास भारी संख्या में किसान मुआवजे का फार्म भरने के लिए उमड़े। बुधवार सांय तक साढ़े 8 हजार किसानों ने अपने आवेदन विभाग को जमा करवाए थे लेकिन दूर-दराज करे क्षेत्रों में बसे किसान बुधवार सांय तक नहीं पहुंच पाए और वीरवार सुबह आवेदन फार्म जमा करवाने के लिए कृषि विभाग के दफ्तर जा पहुंचे। इस पर जैसे ही कृषि अधिकारियों ने कहा कि फार्म लेने की अंतिम तिथि जा चुकी है। इस पर किसानों ने नारेबाजी शुरू कर दी। गांव डुल्ट के किसान तजिंद्र सिंह, सत्यवान, श्रवण, दहमण के अजमेर, सतबीर दहिया, टिब्बी के मांगेराम, ढाणी डुल्ट के दीपक ने बताया कि उन्हें 48 घंटे के भीतर आवेदन जमा करने की बात कही गई थी जबकि नुकसान को अभी तक इतना समय नहीं हुआ। अभी भी खेतों में पानी खड़ा है। किसानों ने बताया कि उनकी नरमे की फसल चौपट हो चुकी है जबकि कृषि विभाग के अधिकारी उनके मुआवजे के आवेदन लेने से ही मना कर रहे हैं। किसानों के एकत्रित होने के बाद उपायुक्त जेके आभीर ने सभी किसानों को सभागार कक्ष में बुलाया और उन्हें बताया कि सरकार द्वारा जारी तारीख तो बीत चुकी है लेकिन इसके बावजूद वो किसानों से आवेदन फार्म लेकर सरकार को भेजेंगे। उन्होंने कहा कि अगले सीजन में सरकार से मांग की जाएगी कि किसानों को अधिक समय दिया जाए। इस मौके पर उपायुक्त से बातचीत में किसानों ने डीडीए बलवंत सिंह सहारण पर अभद्र व्यवहार के आरोप भी जड़े।
एक साल पहले का मुआवजा न मिलने वाले किसानों ने भी जताया रोष
वीरवार सुबह खंड भूना व टोहाना के दर्जनों किसान कृषि विभाग के दफ्तर पहुंचे और मार्च 2017 में गेहूं की फसल के दौरान ओलावृष्टि से बर्बाद फसल का मुआवजा ना मिलने पर रोष जताया। गांव सांचला के किसान टेकराम, बुधराम, टिब्बी के देसराज, लहरियां के ओमप्रकाश ने बताया कि बीते साल गेहूं की फसल के दौरान ओलावृष्टि हो गई थी और उनकी 45 फीसदी गेहूं नष्ट हो गई थी। उन्होंने कहा कि विभाग के अधिकारी व बीमा कंपनी के कर्मचारी सर्वेे करने गए थे और सर्वे में भी उनकी फसल को खराब दर्शाया गया था। लेकिन इसके बावजूद अभी तक उन्हें मुआवजा नहीं मिला। किसानों ने तकनीकी सहायक सुभाष भांभू के कार्यालय में जाकर खूब हंगामा किया। किसानों ने वहां पर एडीओ व बीमा कंपनी के अधिकारियों पर मिलीभगत पर आरोप लगाए। इस बारे में कृषि उपनिदेशक बलवंत सिंह सहारण ने माना कि गांव कन्हड़ी, समैण सहित भूना खंड के कई किसानों के मुआवजा अभी तक नहीं मिला है। इसके लिए उन्होंने आईसीआईसीआई कंपनी को दोषी मानते हुए बातचीत करने की बात कही है।
वर्जन
अंतिम तिथि निकलने के बाद भी सभी किसानों के आवेदन ले लिए गए है, किसानों की आवेदन करने की समयावधि बढ़ाने की बात जायज है लेकिन हम केवल इस बारे में उच्चाधिकारियों को लिख सकते है। हमारा प्रयास है कि किसानों के नुकसान का सही आकलन हो और उन्हेें मुआवजा मिले।
- डा. जेके आभीर, डीसी फतेहाबाद
किसानों के आवेदन करने की समयावधि बढ़ाने के लिए उच्चाधिकारियों को लिखा है और उच्चाधिकारियों ने भी इस बात को माना है कि किसानों के लिए 48 घंटे में आवेदन करना मुश्किल है। उम्मीद है अगले साल होने वाले टेंडर में आवेदन करने की समयावधि बढ़ जाएगी। किसानों द्वारा लगाए गए बदतमीजी करने के आरोप गलत हैं।
- डॉ. बलवंत सहारण, कृषि उप निदेशक फतेहाबाद।