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एक शिशु रोग विशेषज्ञ के सहारे 18 बेड की नर्सरी और ओपीडी

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नागरिक अस्पताल में ओपीडी के बाहर शिशुओं को लेकर खड़े अभिभावक - फोटो : Fatehabad
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फतेहाबाद। स्वास्थ्य विभाग शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए प्रयासों का दावा कर रहा है। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। जिला अस्पताल की नर्सरी और ओपीडी में एक भी रेगुलर शिशु रोग विशेषज्ञ नहीं है जबकि यहां पर 18 बेड की स्पेशल केयर यूनिट है। इसके अलावा रोजाना 150 से 200 शिशुओं की ओपीडी है। लेकिन इसके बावजूद एक भी रेगुलर डॉक्टर नहीं है। एनएचएम पर तैनात एक शिशु रोग विशेषज्ञ नर्सरी और ओपीडी संभाल रहा है। एक डाक्टर को ही 24 घंटे ऑन कॉल ड्यूटी रहना पड़ रहा है।
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शिशु रोग विशेष की यहां पर तीन पद स्वीकृत हैं लेकिन एक ही डॉक्टर है। इसके अलावा नर्सरी को चलाने के लिए 8-8 घंटे की शिफ्ट में तीन डाक्टर होने चाहिए लेकिन एक ही मेडिकल आफिसर है। एक एमओ भी डेपुटेशन पर तैनात किया गया है। हालात यह है कि दिन के समय शिशु रोग विशेषज्ञ को ओपीडी और नर्सरी संभालनी पड़ रही है। इसके बाद एमओ नर्सरी संभाल रहे हैं।
स्वीकृत पद स्थिति
शिशु रोग विशेषज्ञ 3 1 (रेगुलर कोई नहीं)
नर्सरी में जरूरत 3 एमओ 1 डेपुशन पर
कभी नीचे तो कभी ऊपर दौड़ रहा डॉक्टर
नागरिक अस्पताल में इस समय व्यवस्था यह है कि एक ही डॉक्टर है। उसे कभी नीचे ओपीडी देखने के लिए दौड़ना पड़ रहा है तो कभी नर्सरी में शिशु की तबीयत बिगड़ने पर ऊपर दौड़ना पड़ रहा है। नर्सरी में रोजाना 10 से 15 शिशु दाखिल हो रहे हैं। ऐसे में डॉक्टर को ओपीडी छोड़कर नर्सरी में इमरजेंसी भी संभालनी पड़ रही है। इसके चलते ओपीडी में आने वाले शिशुओं को घंटो इंतजार करना पड़ रहा है।
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वर्जन
डॉक्टरों की काफी कमी है। मेडिकल आफिसर भी करीब 95 कम हैं। डेपुटेशन पर फील्ड से डाक्टरों को बुलाकर इमरजेंसी चलानी पड़ रही है। डाक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए मुख्यालय को लिखा गया है।
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डॉ. मनीष बंसल, सिविल सर्जन, फतेहाबाद।
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