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दो साल में खत्म हो जाएगी साढ़े तीन करोड़ की लागत से बनी जिले की इकलौती इंटरनेशनल एस्ट्रोटर्फ अकादमी

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दो साल में खत्म हो जाएगी साढ़े तीन करोड़ की लागत से बनी इंटरनेशनल एस्ट्रोटर्फ अकादमी
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सुरेंद्र असीजा
फतेहाबाद। कभी खेल विभाग का सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट रहा दरियापुर खेल अकादमी महज दो साल की मेहमान रह गई है। जिले की इकलौती एस्ट्रोटर्फ वाली फुटबॉल अकादमी अपने शुभारंभ से पहले दम तोड़ती नजर आ रही है। दरअसल एस्ट्रोटर्फ घास की मियाद 8 साल के आसपास होती है। लेकिन दरियापुर अकादमी शुभारंभ के इंतजार में ही छह साल बीत चुके हैं। जिस तरह से लोक निर्माण व खेल विभाग इसे लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं, उसे देखते हुए बाकी का बचा वक्त भी इस फुटबॉल अकादमी को ना तो सुविधाएं प्राप्त होती दिख रही हैं और ना ही औपचारिक शुभारंभ।
लोकनिर्माण विभाग और खेल विभाग में खींचतान
दरियापुर फुटबाल अकादमी सही मायनों में लापरवाही की फुटबॉल बनी हुई है। जिसे एक विभाग एक साइड से किक मार रहा है तो दूसरा विभाग दूसरी ओर से। लोकनिर्माण विभाग के कार्यकारी अभियंता जगबीर सिंह का कहना है कि उनके विभाग ने लगभग तीन साल पहले ही खेल विभाग को ये अकादमी हैंडओवर कर दी थी। वहीं दूसरी ओर खेल विभाग के अधिकारी हैंडओवर की बात को सिरे से ही खारिज कर रहे हैं। जिला खेल अधिकारी सुदेश कुमार का तर्क है कि खेल विभाग के पास ऐसा कोई पत्र ही नहीं मिला है, जिसमें लोकनिर्माण विभाग से इस अकादमी को खेल विभाग को सुपुर्द करने की बात कही हो। सुदेश कुमार का कहना है कि उन्होंने कई बार अकादमी का विजिट किया है, वहां पर सुविधाएं छोड़िए, ठेकेदार का सामान ही पड़ा हुआ है। इसके अलावा एस्ट्रोटर्फ घास के अलावा कोई सुविधा नहीं है।
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खेल विभाग के अनुसार इन सुविधाओं का है अभाव
1. खिलाड़ियों के बैठने की जगह नहीं
2. कांटेदार झाड़ियों तक को साफ नहीं किया गया है।
3. पेयजल कनेक्शन न शौचालय
4. चेजिंग रूम नहीं
5. हॉस्टल सुविधा तक नहीं
6. चौकीदार सुविधा नहीं
7. एस्ट्रोटर्फ के अलावा सारा मैदान उबड़-खाबड़
केंद्र सरकार ने दिया था 10 करोड़ का बजट
दरियापुर में इंटरनेशनल फुटबाल अकादमी स्थापित करने के लिए वर्ष 2012 में केंद्र सरकार ने दस करोड़ का बजट दिया था। जिसमें सात एकड़ जगह खरीदी गई। इस अकादमी का शिलान्यास 7 अक्तूबर 2012 को तत्कालीन खेल मंत्री अजय माकन, मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने किया था। एस्ट्रोटर्फ घास विशेष रूप से विदेश से मंगवाई गई थी जिस पर कुल साढ़े तीन करोड़ की लागत आई। लोकनिर्माण विभाग ने अकादमी के अंदर जालीदार फेंसिंग करके एस्ट्रोटर्फ तो लगवा दी लेकिन फिर इसे लावारिस छोड़ दिया। अब वहां पर जगह-जगह खरपतवार उग चुके हैं, जगह को समतल तक नहीं किया गया है। गेट पर ताला लगा है। अब हालात यह है कि इस खेल स्टेडियम की देखभाल के लिए विभाग के पास चौकीदार तक नहीं है।

खिलाड़ियों को नहीं मिली सुविधा
केंद्र सरकार व प्रदेश सरकार ने आपसी साझेदारी में इस फुटबॉल अकादमी को इंटरनेशनल स्तर की बनाने का एलान किया था, लेकिन इंटरनेशनल तो दूर, इससे लोकल खिलाड़ियों तक को फायदा नहीं मिल सका। वर्तमान में सुब्रतो कप के लिए प्रदेश स्तरीय टूर्नामेंट विभिन्न स्कूलों के मैदानों में आयोजित किए जा रहे हैं, जबकि अगर यहां पर सुविधाएं होती तो इन टूर्नामेंट का रोमांच ही अलग हो सकता था।
दरियापुर खेल अकादमी खेल विभाग को तीन साल पहले ही हैंडओवर कर दी गई है। ये मेरे आने से पहले का मामला है, इसलिए इस बारे में ज्यादा विस्तार से नहीं बता सकता। लेकिन इतना तय है कि खेल विभाग को ये अकादमी सौंपी जा चुकी है। अब इसका ध्यान उन्होंने रखना था।
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- जगबीर सिंह, कार्यकारी अभियंता, लोकनिर्माण विभाग फतेहाबाद

मुझे फतेहाबाद आए हुए एक साल से अधिक हो चुका है, लेकिन अभी तक मेरी जानकारी में नहीं है कि दरियापुर अकादमी खेल विभाग को सौंप दी गई है। मैंने कुछ दिन पहले भी वहां विजिट की थी, निर्माण कार्य करने वाले ठेकेदार का सामान अभी तक वहां पड़ा है। इसके अलावा शौचालय, पेयजल, बैठने के लिए स्थान, इनमें से कोई सुविधा नहीं है तो कैसा हैंडओवर किया है। इस बारे में कोई पत्र भी नहीं मिला।
- सुदेश कुमार, जिला खेल अधिकारी, फतेहाबाद।
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