अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद। प्रदेश सरकार ने बिजली बिल के बकायादारों को मुख्यधारा में लाने के लिए बिजली बिल निपटान योजना-2018 शुरू की है, ताकि वे अपने पुराने लंबित बिलों का निपटारा करवाकर मुख्यधारा में शामिल हो सकें। यह योजना 31 दिसंबर 2018 तक लागू रहेगी। विभाग के अधीक्षण अभियंता राजेंद्र सबरवाल ने बताया कि नई योजना के अनुसार दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम द्वारा उपभोक्ताओं को उनके लंबित बिलों की बकाया राशि के निपटान के लिए छूट दी गई है।
यह योजना बिजली चोरी के मामलों के निपटारे के लिए भी लागू की गई है, बशर्ते कि उपभोक्ता आंकी गई राशि की, बिना सरचार्ज के, 50 प्रतिशत राशि जमा करवाएं। इसके अलावा उसे पूरी समझौता राशि भरनी होगी और न्यायालय में यदि कोई केस दायर किया हुआ है तो उसे भी वापस लेना होगा। उन्होंने बताया कि जो मामले बिल विवादों के चलते इस समय किसी न्यायिक फोरम में हैं, वे इस योजना के तहत कवर नहीं होंगे। हालांकि यदि उपभोक्ता मामला वापस लेता है तो वह योजना का लाभ उठाने का पात्र होगा। आवेदक या उपभोक्ता को इस योजना का लाभ उठाने के लिए केवाईसी दस्तावेज जमा करवाने होंगे।
सबरवाल ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य 20 किलोवाट तक के घरेलू श्रेणी के उपभोक्ताओं और पांच किलोवाट तक के गैर- घरेलू श्रेणी के उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचाना है। बिजली बिल माफी योजना -2005 के प्रावधानों के दृष्टिगत वर्ष 2005 से पहले के लंबित बिलों को पूर्ण रूप से माफ कर दिया गया है। जून-2005 से जून, 2018 तक बकाया बिलों के निपटान के लिए ग्रामीण घरेलू उपभोक्ताओं के मामले में 40 यूनिट प्रति किलोवाट प्रति माह की दर से बिल की अदायगी करनी होगी। इसी प्रकार, शहरी घरेलू उपभोक्ताओं के मामले में 50 यूनिट प्रति किलोवाट प्रति माह की दर से बिल भरना होगा। ग्रामीण गैर-घरेलू (कामर्शियल) के मामले में उपभोक्ता 75 यूनिट प्रति किलोवाट प्रति माह की दर से जबकि शहरी गैर-घरेलू उपभोक्ताओं के मामले में 150 यूनिट प्रति किलोवाट प्रति माह की दर से बिल भरकर लंबित बिलों से छुटकारा पा सकते हैं। उन्होंने बताया कि बीपीएल श्रेणी के बिजली उपभोक्ताओं द्वारा उपरोक्त दरों पर केवल पिछले एक साल का ही बिल भरने पर पिछली पूरी बकाया राशि माफ कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को राहत देते हुए बिजली के बिलों में प्रति यूनिट दो रुपये की कमी की है, जिससे गरीब उपभोक्ता भी बिजली बिल भरने में सक्षम होंगे। इससे लगभग 90 प्रतिशत बिजली उपभोक्ताओं को फायदा होगा।