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थोक में गिरे हरी सब्जियों के दाम, रिटेल में नहीं

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फतेहाबाद। हरी सब्जियों के थोक भाव में काफी गिरावट हो गई है लेकिन इसका लाभ आम उपभोक्ताओं को नहीं मिल पा रहा है। थोक भाव में दाम गिरने का खामियाजा सीजनल व बेलदार सब्जियों के उत्पादक किसानों को उठाना पड़ रहा है। किसान जब अलसुबह मंडियों में सब्जी लेकर आता है तो उसे औने-पौने दामों पर बेचना पड़ रहा है। हालांकि इसके पीछे बागवानी के अधिकारी फसल के उत्पादन का ज्यादा होना बता रहे हैं।
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प्राप्त जानकारी के अनुसार इस समय फतेहाबाद की होल सेल सब्जी मंडी में घीया तीन रुपये किलो, पेठा पांच रुपये, शिमला मिर्च 10 रुपये, प्याज छह रुपये, तोरी व तर 7 रुपये किलो के भाव से बिक रही है। ये वो दाम हैं जिनकी फसल अलसुबह बिक गई। सुबह न बिकने पर 11 बजे के बाद ये फसल नहीं बिकती। इसके चलते किसान या तो फसल वापस ले जाते हैं या फिर गोशाला में डाल देते हैं। रविवार को फतेहाबाद की सब्जी मंडी में गांव एमपी रोही से पेठा, घीया और तोरी लेकर आए किसान प्रहलाद सिंह ने बताया कि एक दिन छोड़कर सुबह चार बजे आने के बाद सात बजे तक बोली के द्वारा सब्जी बिकती है। न बिकने पर वह सब्जी को वहीं छोड़ जाता है और अगले दिन ये सब्जी नहीं बिकती। बेलदार सब्जी होने के कारण ये ढीली पड़ जाती है और इसका खरीददार नहीं होता।
प्रहलाद ने बताया कि उसके पास तीन एकड़ में पेठा, घीया और तोरी लगी हुई है। शुरू में उसे 15 रुपये प्रति किलो के दाम मिले थे। लेकिन अब तीन रुपये प्रति किलो के दाम आ गए हैं जबकि वह गांव से सब्जी मंडी में ऑटो रिक्शा से सब्जी भरकर लाता है तो उसे एक रुपये प्रति किलो किराया भी पड़ जाता है। उसके साथ आए माली भी चाय-नाश्ते के दौ सौ रुपये खर्च कर देते हैं। ऐसे में उसे एक रुपये प्रति किलो का ही रेट मिलता है जबकि लागत इससे ज्यादा है। ऐसे ही गांव माजरा से शिमला मिर्च व भिंडी लेकर आए रामस्वरूप नले बताया कि शुरू में भिंडी 60 रुपये प्रति किलो बिकी थी लेकिन अब ये 18 से 20 रुपये किलो आ गई है। इसी तरह शिमला मिर्च 10 रुपये किलो बिक रही है।
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बठिंडा, पटियाला व मानसा से आता है खीरा
खीरा फतेहाबाद की सब्जी मंडी में बठिंडा, पटियाला व मानसा से आता है। रविवार को ये तीन रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिका। मानसा से खीरा लेकर आए सरदार हीरा सिंह ने बताया कि उसे एक रुपये प्रति किलो बिक गया। अब वो 11 बजे तक उसका खीरा नहीं बिका है। वो एक-एक मन के 20 बोरी खीरा लेकर आया था, लेकिन महज 4 बोरी खीरा ही बिका है। अब पूरा दिन बैठने के बाद रविवार को दोबारा खीरे की मंडी लगेगी और इसके अलावा तुलाई व लेबर उसे अपनी जेब से भरनी पड़ेगी। उधर जिला बागवानी अधिकारी कुलदीप सिंह श्योराण का कहना है कि इस बार मौसम ने गर्मी नहीं पकड़ी, क्योंकि ये फसलें फरवरी में आनी शुरू हो जाती हैं और अप्रैल तक खत्म हो जाती हैं। इसके बाद बाहर से सब्जी आती है। यहां लोकल तापमान अप्रैल अंत तक कम रहा और फसल का बंपर उत्पादन हुआ। उन्होंने माना कि शुरू में रेट ज्यादा था, लेकिन किसानों ने इतनी सब्जी बेच दी कि वो पिछले साल के मुकाबले अभी तक तीन गुणा फायदे में हैं। एक अनुमान के अनुसार पिछले साल एक एकड़ में 10 क्विंटल घीया हुआ तो इस बार तीस क्विंटल की पैदावार हो गई है। मंडी में आढ़ती एसके फ्रूट कंपनी के मालिक सुरेश मताना ने बताया कि पिछले तीन माह से घीया, पेठा, तोरी व खीरा आ रहा है। शुरू में इसके काफी रेट थे, लेकिन अब इसके दाम कम हो गए हैं। शादी ब्याह का कोई सीजन ना होना इसके पीछे प्रमुख कारण है।
तीन रुपये थोक में बिकने वाली सब्जी उपभोक्ता को मिल रही 15 रुपये प्रति किलो
सबसे बड़ी बात ये है कि किसान का खीरा या तोरी मंडी में तो तीन रुपये प्रति किलो बिक रही है। बीच में आढ़ती, होलसेलर व रिटेल के बाद ये उपभोक्ता तक 15 रुपये प्रति किलो तक पहुंच रहा है। किसान की फसल तीन रुपये प्रति किलो बिकी तो कुछ सब्जी मंडी के आढ़ती ने मुनाफा कमाया, होलसेलर से रिटेलर फसल लेकर आता है तो बाजार में उसे 15 रुपये प्रति किलो बेचता है। किसान की फसल का दाम 3 रुपये प्रति किलो होता है लेकिन उपभोक्ता तक पहुंचते पहुंचते इसके दाम 5 गुणा बढ़कर 15 रुपये प्रति किलो हो जाती है।
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