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योग भारतीय संस्कृति का मूलाधार

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योग भारतीय संस्कृति का मूलाधार : आर्य
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अमर उजाला ब्यूरो
भट्टूकलां। योग केवल आध्यात्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण विद्या नहीं है, बल्कि यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को ठीक बनाए रखने के लिए भी अति महत्वपूर्ण है। यह बात पंतजलि योगपीठ हरिद्वार के योगाचार्य मदन गोपाल आर्य ने शाखा पार्क भट्टू मण्डी में चल रहे सात दिवसीय निशुल्क योग विज्ञान शिविर के चौथे दिन उपस्थित साधकों को योगाभ्यास करवाते हुए कही। उन्होंने कहा कि योग भारतीय संस्कृति का मूलाधार है। यह जिन्दगी जीने का नया अहसास है। योग से खोई हुई शक्तियां वापस आती है। योग व्यक्ति के अंतस की दिव्य शक्तियों को जागृत करता है। इससे साधक का मन मजबूत होता है। योग से जिन्दगी सन्तुलित हो जाती है तथा व्यक्ति निरोगी बन जाता है। दवाओं के सेवन से शक्ति क्षीण होती हैं। उन्होंने कहा कि जो योग और प्राणायाम को अपना लेता है वह धर्म के प्रति, कर्म के प्रति,स्वभाव के प्रति और राष्ट्र के प्रति समर्पित हो जाता है। अनुलोम विलोम प्राणायाम का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे सांसों का शुद्धिकरण होता है। इससे दूषित वायु शरीर से बाहर निकलती हैं और आक्सीजन की मात्रा शरीर में बढ़ जाती है।
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