अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद/टोहाना/रतिया। भैया दूज का त्योहार शनिवार को जिलाभर में बड़े ही हर्षोल्लास व पारंपरिक तरीके से मनाया गया। इस अवसर पर बहनों ने अपने भाइयों को तिलक लगाया व रक्षा सूत्र बांधकर उनकी लंबी आयु की कामना की। टोहाना में भैया दूज के उपलक्ष्य में ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दीवाली के दूसरे दिन भैया दूज का त्योहार हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन यमराज की पूजा करने से अकाल मृत्यू का भय नहीं रहता। बहनें भी अपने भाइयों की लंबी उम्र की कामना करते हुए भैया दूज पर उनके माथे पर तिलक लगाती हैं और रक्षा सूत्र बांधती हैं। शनिवार को फतेहाबाद क्षेत्र में भैया दूज को भी पारंपरिक तरीके से मनाया गया। बहनों ने अपने भाइयों के हाथ पर रक्षा सूत्र बांधा व उनके माथे पर तिलक लगाया। भाइयों ने भी अपनी बहनों को उपहार दिए। टोहाना संवाददाता के अनुसार, टोहाना क्षेत्र में भैया दूज हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
इस उपलक्ष्य में रेलवे रोड स्थित ब्रहमाकुमरीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य रूप से सैंटर इंचार्ज बहन वंदना, बहन कौशल्या व बहन बिंदु ने भाग लिया। इस दौरान बहन वंदना ने बताया कि भैया दूजा का पर्व पूरे देश भर में धूमधाम से मनाया जाता है। इसी प्रकार प्रत्येक ब्रहमाकुमारीज केंद्र पर आने वाले भाई- बहनों को इस दिन तिलक लगाकर यह स्मृति दिलाई जाती है कि आप सभी आत्मा स्वरूप में उस परमपिता शिव की संतान है तथा आपस में भाई- बहन हो। उन्होंने कहा कि इस पर्व पर तिलक भृकुटी के बीच में इसलिए लगाया जाता है कि भृकुटी में आत्मा का निवास रहता है। जिससे मनुष्य को अपने आत्मिक स्वरूप की पहचान होती है। कार्यक्रम में बताया गया कि जब परमात्मा किसी भी आत्मा को इस सृष्टि रंगमंच पर अपनी कला का प्रदर्शने के लिए भेजते है तो उन्हे यह स्वरूप बताते है कि आप सभी आपस में भाई-बहन है लेकिन मनुष्य यहां आकर देह के वशीभूत होकर अपने पिता की बात को भुला देता है। इसी स्वरूप की स्मृति को लेकर ही राजयोग का अभ्यास करवाया जाता है।