फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दावा : बच्चों को निजी स्कूलों की माफिक स्मार्ट एजुकेशन देंगे सरकारी स्कूल 17-51-45

विज्ञापन
विज्ञापन
दावा : बच्चों को प्राइवेट स्कूलों की तरह स्मार्ट एजुकेशन देंगे सरकारी स्कूल
विज्ञापन

हकीकत : 15 सालों से स्कूलों में नहीं पहुंचे डेस्क, जमीन पर बैठने को मजबूर बच्चे
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद । दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जब हरियाणा के सरकारी स्कूलों की हालत पर सवाल उठाते हैं तो प्रदेश के मंत्री और अफसर निजी स्कूलों की माफिक सरकारी स्कूलों में स्मार्ट एजुकेशन पहुंचाने का दावा करते हैं। लेकिन हकीकत ना केवल इससे जुदा है बल्कि खालिस स्याह भी है। बारिश के बाद इन दिनों जारी सर्दी रजाई में बैठने के बाद भी शरीर को कंपा देती है। मगर जरा सोचिये, सर्दी में जमीन पर बैठना पड़े और जमीन पर बैठने वाले भी नौनिहाल हों तो कलेजा मुंह को आने लगता है। लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कलेजा मानों पत्थर का बना हुआ है, तभी जिले के अनेक प्राइमरी स्कूलों में इस ठिठुरती ठंड में भी बच्चों को जमीन पर बैठना पड़ रहा है। मंगलवार सुबह ‘अमर उजाला’ टीम ने जिले के विभिन्न प्राइमरी स्कूलों की पड़ताल की और अधिकतर स्कूलों में अनेक बच्चे जमीन पर बैठकर ही पढ़ाई करते मिले।
स्थान : गांव भड़ोलावाली सरकारी स्कूल
समय : सुबह नौ बजकर 45 मिनट
हालात : स्कूल में तकरीबन 450 बच्चे हैं लेकिन डेस्क केवल डेढ़ सौ बच्चों को ही साल 2014 में डेस्क मुहैया करवाए गए थे, लेकिन अब हालात और बदतर हो चुके हैं कि उन डेढ़ सौ डेस्क में से तकरीबन सौ से अधिक डेस्क कंडम हो चुके हैं। जिसके कारण इनको कबाड़ में रख दिया गया है। अब बाकी बच्चों के लिए 50 डेस्क पूरे होने का तो सवाल ही नहीं पैदा होता। तकरीबन तीन सौ से अधिक बच्चे प्रतिदिन इस ठंड में जमीन पर ही टाटपट्टी बिछाकर बैठते हैं। स्कूल प्रशासन की ओर से कई बार शिक्षा विभाग से डेस्क की मांग की गई है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। हालांकि अब तो ठंड दिनोंदिन कम होती जा रही है।
विज्ञापन

स्थान : गांव हिजरावांकलां मिडल स्कूल
समय : सुबह 10 बजकर 35 मिनट
हालात : इस स्कूल में कुल 185 से अधिक बच्चे हैं लेकिन आधे से अधिक बच्चों को अभी भी ठंड के दौरान जमीन पर ही बैठना पड़ता है। हालांकि स्कूल में काफी कमरे होने के कारण सर्दियों में बच्चों को कमरों के अंदर बिठाया जाता है लेकिन इसके बावजूद इस आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता कि कमरों के अंदर बिठाने के बावजूद बच्चे ठंड की चपेट में आते हैं। स्कूल प्रबंधन का दावा है कि कई बार बच्चों के लिए बैंच आदि की मांग भेजी गई है लेकिन आज तक पूरी नहीं हुई।
स्थान : स्वामी नगर प्राइमरी स्कूल
समय : सुबह 11 बजकर 22 मिनट
हालात : प्राइमरी स्कूलों में सबसे बुरे हालात इसी स्वामी नगर स्कूल के ही हैं। हालांकि नई इमारत का प्रस्ताव विभाग ने मंजूर कर दिया है और 44 लाख की ग्रांट भी आ चुकी है। लेकिन अभी तक स्कूल निर्माण का काम शुरू नहीं हो सका है। महज दो कमरे और 344 बच्चे होने के चलते आधे से अधिक बच्चे स्कूल इमारत के आंगन में ही पढ़ाई करते हैं। हालांकि स्कूल प्रशासन द्वारा आंगन में शेड लगाया हुआ है ताकि बच्चे ठंड से बच सकें लेकिन जमीन पर बैठने के अलावा उनके पास कोई विकल्प भी नहीं है।
2008 में आए थे डेस्क, मौजूदा सरकार में तीन बार डिमांड मांगी, नहीं हुई पूरी
शिक्षा विभाग के सूत्रों की मानें तो साल 2008-09 के सत्र में आखिरी बार डेस्क स्कूलों में भेजे गए थे। इसके बाद दस साल तक किसी स्कूल में कोई डेस्क नहीं भेजे गए। इतना ही नहीं, लगभग 11 बरस पहले जो डेस्क स्कूलों में भेजे गए, वो उन स्कूलों की तत्कालीन विद्यार्थियों की संख्या के आधे भी नहीं थे और अब तो स्कूलों में संख्या और बढ़ी है जबकि डेस्क पहले के मुकाबले कंडम हुए हैं। नाम ना छापने की शर्त पर कुछ स्कूलों के मुख्याध्यापक बताते हैं कि मौजूदा बीजेपी सरकार में तीन बार स्कूलों से डेस्क की डिमांड मांगी गई है लेकिन सरकार का आखिरी साल होने को है, लेकिन अभी तक डिमांड पूरी नहीं हो सकी है।
सरकारी स्कूलों और विद्यार्थियों की स्थिति
स्कूल संख्या कुल विद्यार्थी
प्राइमरी 386 44632
मिडल स्कूल 84 28332
हाई और सी.सै. स्कूल 146 28459
सरकारी स्कूल लगातार रिजल्ट के मामले में पहले से बेहतर हो रहे हैं, लेकिन सुविधाओं के मामले में अभी भी सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी अफसरों की ओर टकटकी लगाकर देख रहे हैं। बार-बार डिमांड भेजने के बावजूद अभी तक बच्चों के बैठने के लिए बेंच ही नहीं भेजे जा सके हैं। बच्चों को इतनी ठंड में बैठे देखना काफी दुखदायी है। सरकार इस पर सकारात्मक कदम उठाए।
विज्ञापन

- देवेंद्र सिंह दहिया, संरक्षक, हरियाणा राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ।
उच्चाधिकारियों को कई बार फतेहाबाद जिले की डिमांड भेजी गई है लेकिन ऊपर से ही कुछ दिक्कत चल रही है। पीछे टेंडर में कोई समस्या हो गई थी जिसके चलते बेंच नहीं आ सके। शायद छह-सात साल से सरकारी स्कूलों में डेस्क नहीं पहुंचे हैं। एक बार फिर उच्चाधिकारियों के साथ बैठक में इस मुद्दे को उठाएंगे।
- दयानंद सिहाग, जिला शिक्षा अधिकारी, फतेहाबाद ।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें