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फर्जी कंपनियां बनाकर किया करोड़ों का लेनदेन, सेल्स टैक्स के छापे में काटन फैक्ट्री की साइट पर मिली झुग्गी झोपड़ी

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अमर उजाला ब्यूरो
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फतेहाबाद। फतेहाबाद जिले में फर्जी कंपनियां बनाकर काले धन को सफेद करने का बड़ा मामला सामने आया है। सेल टैक्स विभाग ने ऐसी ही चार फर्जी कंपनियों का भंडाफोड़ किया है। फर्जी कंपनियों द्वारा कराधान विभाग को जो पते दिए गए थे, उन जगहों पर सोमवार को छापेमारी की गई तो उन पतों पर कोई फैक्ट्री या इमारत तक नहीं दिखी। रतिया में गोशाला रोड पर दो फर्जी कंपनियों व फतेहाबाद के भूना रोड पर विश्वकर्मा सर्विस स्टेशन के पास दो फर्जी कंपनियों के पते रजिस्टर्ड थे। सेल टैक्स विभाग के आबकारी विभाग के आयुक्त वीके शास्त्री ने इसके पीछे एक बड़ा गिरोह होने की आशंका जाहिर की है।
कॉटन फैक्ट्री की साइट पर मिली झुग्गी, म्यूजिक उपकरण की फैक्ट्री की जगह खाली मिला प्लाट
करोड़ों रुपये के लेन-देन के बाद जब सेल टैक्स विभाग के अधिकारियों ने चार कंपनियों के रजिस्ट्रेशन के दौरान दिए गए पते पर छापेमारी की तो रतिया में कॉटन फैक्ट्री की साइट पर खाली प्लाट मिला। इतना ही नहीं, भूना रोड पर एक कंपनी के पते पर काटन फैक्ट्री की जगह पर झुग्गी झोपड़ी मिली। इसी तरह महम की एक म्यूजिक उपकरण बनाने वाली कंपनी द्वारा दी गई फैक्ट्री की साइट पर खाली प्लाट में एक कमरा ही बना मिला। लेकिन उसमें भी कोई व्यक्ति नहीं मिला।
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दो माह में दिखा दिया 67 करोड़ का लेनदेन तो पड़ी अफसरों की नजर
दरअसल इन कथित फर्जी कंपनियों ने अक्टूबर और नवंबर में कॉटन खरीद बेच के 67 करोड़ 65 लाख 79 हजार के बिल काट डाले, जिसका टैक्स 40 करोड़ 76 लाख बनता है। डीईटीसी वीके शास्त्री ने बताया कि फतेहाबाद जिले की ये चार कंपनियां केवल कागजों में चलाई जा रही हैं। धरातल पर न कोई दफ्तर मिला है और न ही माल आने और जाने का कोई रिकॉर्ड मिला है। शास्त्री ने बताया कि कंपनी के संचालक केवल कागजों में माल खरीदते-बेचते हैं और फिर करोड़ों की ट्रांजेक्शन भी होती है और टैक्स की चोरी भी। यह फर्जी कंपनियां जहां से माल खरीद रही हैं, जिसे बेची जा रही है जिस वाहन पर माल ला जाता है और जहां माल का स्टॉक किया जाता, इसकी कोई जानकारी जमीन पर दिखी ही नहीं। उन्होंने बताया कि शुरुआती विभागीय जांच में केवल नवंबर और दिसंबर में इन चारों कंपनियों ने करीब 67 करोड़ के बिल काटे है। जिनमें फतेहाबाद के भूना रोड स्थित एक कंपनी ने 18 करोड़ 47 लाख, दूसरी कंपनी ने 13 करोड़ 86 लाख, रतिया की एक कंपनी ने 13 करोड़ 66 लाख और दूसरी कंपनी ने 21 करोड़ के बिल मात्र दो महीने में काटे हैं। फिलहाल कर विभाग के अधिकारी इसकी गहनता से जांच में जुटे हैं और अपने आला अधिकारियों के संज्ञान में मामला ला दिया गया है। वहां से निर्देश आने के बाद इस मामले में आगामी कार्रवाई की जाएगी।
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