अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद। प्राचीन दुर्गा मंदिर मढ़ी सेवा समिति के तत्वाधान में आयोजित 70वां वार्षिक समारोह एवं तीसरा मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर योग आश्रम भिवानी से साध्वी विभानंद सरस्वती ने कहा कि हम प्रभु के अंश हैं और प्रभु सर्वत्र हमारे हैं। प्रभु पर हमारा भरोसा पक्का है तो हम प्रभु के दर्शन करते हैं। यह कार्यक्रम गद्दीनशीन गोस्वामी अर्जुनगिरी महाराज की अध्यक्षता में किया जा रहा है।
साध्वी विभा ने कहा कि प्रभु ने संसार की रचना की तो सबके भाग्य व किस्मत को अलग-अलग बांट दिया। जो जैसा कर्म करता है भाग्य उसके कर्मानुसार उसे देता है। अच्छा बुरा यहीं है। उन्होंने कहा कि धर्म की परिभाषा अलग नहीं हो सकती, धर्म धर्म है तथा अधर्म की व्याख्या अलग है। इंसान अच्छे कर्म करेगा तो सोच और परिणाम भी अच्छा होगा। ठीक उसी प्रकार लागू होता है जैसे खाने पर लागू होता है। जो मनुष्य जैसा खाता है वैसा ही उसका आचार व्यवहार होता है। सात्विक, तामसिक तासीर वाले लोग अपने बोलचाल व लहजे से ही पहचान लिए जाते हैं।
साध्वी विभा ने कहा कि सूर्य हिंदू धर्म में पूजा जाता है, चांद को भी हिंदू धर्म बराबर की मान्यता देता है। हम प्राकृतिक को भी भगवान का दर्जा देते हैं। ऋतु बदलती है तो हम हिंदू लोग पूजा अर्चना, नवरात्रे, माघ, संक्रांति के रूप में उसका आदर करते हैं। उन्होंने हरि नाम प्यारा-प्यारा भगतों का सहारा है, सदा से ही है, सदा ही रहेगा’ गाकर भक्तों को झूमने पर मजबूर कर दिया। इस मौके पर तेजगिरी कुटिया के प्रधान विजय मेहता, राकेश गोस्वामी, अजय सरदाना, इंद्र गोस्वामी, ईश मेहता, रोहित कवात्रा, हंसराज ग्रोवर, देशराज ग्रोवर, मुकेश प्रजापत, विरेंद्र नारंग, फूल गोस्वामी, सरोज नागपाल, कृष्णा मदान, राजू झज्जर, कैदार जांगड़ा, रामचंद्र रेल्हन, मनोज रेल्हन , दर्शन गौरी, अशोक धमीजा उपस्थित थे। सफल मंच संचालन पवन रूखाया ने किया।