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सरसों के खेत में मधुमक्खी के बॉक्स लगाने से सरसों की पैदावार बढ़ जाती है दो से तीन क्विंटल प्रति एकड़

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सरसों के खेत में मधुमक्खी के बॉक्स लगाने से बढ़ जाती है दो से तीन क्विंटल प्रति एकड़ पैदावार
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद । जिला उपायुक्त डॉ. जेके अभीर ने कहा कि मधुमक्खी पालन या जैविक खेती के जरिए आय के माध्यम के बढ़ाया जा सकता है। किसान वर्ग के लिए नए जीवनदान के समान है। उन्होंने कहा कि किसान वर्ग को पारंपरिक खेती के साथ-साथ जैविक खेती को भी बढ़ावा देना चाहिए, ताकि वह अपनी आर्थिक स्थिति और लोगों को स्वस्थ जीवन की मुख्य कड़ी बन सके। वे लघु सचिवालय स्थित प्रांगण में मधुमक्खी पालन में अग्रणी किसान जांडली कलां निवासी ओमप्रकाश जागलान द्वारा तैयार की गई जागृति वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करने के बाद लोगों को संबोधित करते हुए कही। इस दौरान मधुमक्खी पालन कर शहद निर्माण की धुरी बने किसान परिवार ने जिला उपायुक्त के अलावा एडीसी सतबीर जांगू, रतिया एसडीएम, कृषि विज्ञान केंद्र अधिकारी डॉ. संतोष, डीएचओ डॉ कुलदीप श्योराण, पूर्व डीएचओ डॉ. श्रवण कुमार आदि अतिथियों को शहर भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम संचालन सुरेश जागलान ने किया, जबकि जागृति वैन संचालन टीम में माता नारो देवी, किसान रामफल व जोगेंद्र भी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
उपायुक्त डॉ. अभीर ने कहा कि करीब दो दशक पहले से शुरू हुआ मधुमक्खी पालन का व्यवसाय आज अनेक किसानों की कड़ी मेहनत की बदौलत एक बड़ी परियोजना का रूप लेता जा रहा है। जिला फतेहाबाद में जिस प्रकार से जांडली कलां के किसान ओमप्रकाश ने मधुमक्खी पालन के बाद 40 से अधिक शहद उत्पादों को आमजन मानस तक पहुंचाया, वह सराहनीय है। उन्होंने कहा कि अन्य किसानों को भी इस तरह की योजनाओं का लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि जागृति वैन से अन्य किसान भी मधु मक्खी पालन व जैविक खेती के प्रति आकर्षित होंगे।
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मधुमक्खी पालन में अग्रणी किसान ओमप्रकाश ने बताया कि कुछ साल पहले उसने मधुमक्खी के चंद बॉक्सों से यह काम शुरू किया था। धीरे-धीरे काम बढ़ा और वो आज समृद्ध किसानों की श्रेणी में हैं। उन्होंने बताया कि परिवार में उनका बेटा सुरेश व पत्नी नारो देवी सहित अन्य सहयोगी किसानों की मेहनत का ही परिणाम है कि वे आज सबसे अधिक मधुमक्खी के बॉक्सों से शहद का उत्पादन कर पा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों में जो भ्रम हैं कि मधुमक्खी से सरसों का उत्पादन कम हो जाता है, ये गलत धारणा है। एक एकड़ सरसों के खेत में मधुमक्खी के बॉक्स लगाने से सरसों की पैदावार दो से तीन क्विंटल प्रति एकड़ बढ़ जाती है। इसलिए किसान वर्ग को अपनी खेती को अधिक समृद्ध बनाने के लिए इस तरह की योजनाओं का लाभ उठाना चाहिए, जो उन्हें काम में बढ़ोतरी के साथ-साथ बड़े स्तर पर सम्मान दिलाने का काम भी करेगी।
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