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ट्वीट के बाद रेलवे मंत्रालय ने ली पिरथला रेलवे स्टेशन की सुध, रातों रात लगवा दी लाइट

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सुशील सिंगला
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टोहाना।
आजादी से करीब 10 दशक पहले बने पिरथला-ललौदा रेलवे स्टेशन की हालत इतनी दयनीय है कि यहां पर रात को तो कोई भी यात्री उतरने से कतराता था। रात के समय यह रेलवे स्टेशन पूरी तरह से अंधेरे में लुप्त हो जाता था। ग्रामीण अंधेरे में डूबे इस रेलवे स्टेशन की समस्या को कई बार उठा चुके थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं। अब एक जागरूक युवा ने इस मामले में रेलवे मंत्री को ट्वीट किया तो इस समस्या का समाधान मिनटों में हो गया। अब रात के समय में भी यह रेलवे स्टेशन रोशनी से चमकता दिखाई देता है।
गांव ललौदा के पास ललौदा-पिरथला रेलवे स्टेशन का निर्माण वर्ष 1905 में किया गया था। हलके के दर्जन भर गांव के सैकड़ों लोग हिसार, लुधियाना, पंजाब व अमृतसर जाने के लिए इसी रेलवे स्टेशन से रेलगाड़ी से सफर करते हैं। रेलवे स्टेशन पर रात्रि के समय में रोशनी के न होने के कारण यात्रियों को अपने जान माल की सुरक्षा का भय सताता रहता था। रात्रि के समय यात्रियों का वहां से गुजरना इतना मुश्किल होता होगा कि लोग तो रात्रि के सफर को करना ही छोड़ गए थे।
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ऐसे हुआ समस्या का समाधान
सामाजिक कार्यकर्ता विनय शर्मा ने बताया कि कुछ समय पहले वह रात्रि के समय अपने किसी रिश्तेदार को पिरथला-ललौदा रेलवे स्टेशन से लेने के लिए आया था तो स्टेशन पर अंधेरा छाया हुआ था। अंधेरे में उसे स्टेशन का पता नहीं चल पा रहा था। जिस कारण उसे परेशानी का सामना करना पड़ा। इसी बात को लेकर उसने समस्या को जाना। जिसके बाद उसे ग्रामीणों से पता चला कि रेलवे स्टेशन पर जरूरत के मुताबिक ट्यूबलाइट नहीं है, इसके अलावा स्टेशन का बिजली कनेक्शन भी किसानों को ट्यूबवेल के लिए दी जाने वाली सप्लाई लाइन से जोड़ा हुआ है। जिस कारण अधिकतर समय स्टेशन पर लाइट न होने पर अंधेरा रहता था। इस समस्या के समाधान के लिए उसने रेल मंत्रालय व रेल मंत्री को ट्वीट कर गुहार लगाई। जिसके बाद रेल मंत्रालय ने तुरंत समस्या का संज्ञान लेते हुए तीन ट्यूबलाइटें लगवाकर कर उसे ग्रामीण क्षेत्र की 24 घंटे चलने वाली बिजली लाईन से जोड़ दिया। जिससे अब स्टेशन पर रात के समय रोशनी रहती है। महिला यात्री निहाली देवी ने बताया कि चारों ओर जंगल सा माहौल है। लंबे समय से यहां रोशनी नहीं थी। रोशनी न होने के कारण रात को सफर करने में डर लगता था। अब सफर करने में डर नहीं लगता है।
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