फतेहाबाद।
फरवरी 2016 में रोहतक में जाट आरक्षण के दौरान हिंसा मामले में फतेहाबाद के एक वकील को सीबीआई ने पूछताछ का नोटिस भेजकर चंडीगढ़ कार्यालय में तलब किया है। सीबीआई के नोटिस के मुताबिक फतेहाबाद के वकील रामकुमार गोदारा को 26 दिसंबर को सुबह 11 बजे तलब किया गया है। हालांकि सीबीआई के नोटिस में इस बात का जिक्र नहीं है कि उन्हें किस मामले के लिए बुलाया गया है लेकिन एडवोकेट राजकुमार गोदारा का कहना है कि उन्हें फरवरी 2016 में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान रोहतक में हुई हिंसा के लिए बुलाया गया है।
एडवोकेट राजकुमार गोदारा मूल रूप से ढाणी गोपाल के रहने वाले हैं जहां इसी साल मार्च में हुए जाट आंदोलन के दौरान हिंसा हुई थी। राजकुमार गोदारा के मुताबिक वो खुद हैरान हैं कि उन्हें फरवरी 2016 में हुई हिंसा के लिए क्यों बुलाया गया है। हालांकि नोटिस के मुताबिक एडवोकेट गोदारा को बतौर गवाह ही बुलाया गया है लेकिन उनके अनुसार फरवरी 2016 में हुई हिंसा के दौरान रोहतक जाने के रास्ते तक बंद थे और वे फतेहाबाद में ही थे। इतना ही नहीं, एडवोकेट रामकुमार गोदारा का तो यहां तक दावा है कि इस दौरान वे बाकायदा कोर्ट में केसों की पैरवी भी करते रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके रोहतक और सोनीपत के रहने वाले जानकारों को भी सीबीआई की ओर से नोटिस भेजे गए हैं।
एडवोकेट राजकुमार गोदारा को सीबीआई का नोटिस मिलना अपने आप में आश्चर्यजनक है। क्योंकि अभी तक कहीं भी ये जानकारी सार्वजनिक मंच पर नहीं है कि सरकार ने फरवरी 2016 में हुए जाट आरक्षण की जांच सीबीआई को सौंपी है। ऐसे में सीबीआई के सहायक पुलिस अधीक्षक एमके पुरी की ओर से भेजे गए इस नोटिस की सत्यता पर भी संदेह जताया जा रहा है। इस बारे में नोटिस पर दिए गए सहायक पुलिस अधीक्षक एमके पुरी के नंबर पर फोन किया गया तो कई बार घंटी जाने के बावजूद किसी ने फोन नहीं उठाया। दूसरी ओर एडवोकेट राजकुमार गोदारा ने कहा है कि वो 26 दिसंबर को सीबीआई के नोटिस पर चंडीगढ़ अवश्य जाएंगे और जांच में पूरा सहयोग करेंगे।