सुरेंद्र असीजा
फतेहाबाद। फतेहाबाद में दीवाली के बाद धान उत्पादक किसानों के चेहरों पर रौनक बढ़ती जा रही है। दीवाली के बाद धीरे-धीरे बासमती के दामों में तेजी देखने को मिली। रविवार को तो तेजी ने सारे रिकार्ड तोड़ दिए और बासमती के दाम 33 सौ रुपये के करीब पहुंच गए। जो पिछले साल के मुकाबले भी ज्यादा हैं। किसानों का मानना है कि इस बार उत्पादन के साथ भाव भी ठीक मिलने से उन्हें थोड़ी राहत मिली है। वहीं व्यापारी भी दामों को लेकर खुश है।
पिछले तीन साल से फसल का खराबा, या भाव में मंदी के चलते किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें खिंच गई थी। बीते वर्ष नरमे पर सफेद मक्खी तो धान के भाव ना मिलने से किसानों पर कर्ज बढ़ गया। मंडी के व्यापारी इस बात को स्वीकारते हैं कि अधिकांश किसानों ने फसल से ज्यादा पैसे आढ़ती से ले रखे हैं। दीवाली से पहले परमल धान के रेट को लेकर संशय की स्थिति थी, लेकिन अनुकूल मौसम ने किसानों का साथ दिया। इस बार परमल धान का औसत उत्पादन 30 क्विंटल प्रति एकड़ से अधिक ज्यादा निकला है। सरकार ने इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य 1560 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया। अब बासमती के भाव में एकाएक तेजी आई । शनिवार को तो बासमती 1121 किस्म का धान 3350 रुपये प्रति क्विंटल एवं मुच्छल व 1509 किस्म का धान 3000 रुपये प्रति क्विंटल के करीब बिका। अनुमान के अनुसार बासमती का उत्पादन 22 से 25 क्विंटल ति एकड़ हो रहा है। परमल व बासमती दोनों ही किसान को करीब 70 से 75 हजार रुपये प्रति एकड़ की आमदन दे रहे हैं।
मालूम हों कि बीते वर्ष 1121 एवं मुच्छल धान के दाम करीब 27 सौ प्रति क्विंटल थे। तबसे किसानों ने धान की पैदावार से मुंह मोड़ लिया लेकिन नरमे के बाद दोबारा धान की खेती की ओर रुख किया। जिसके चलते पहले फतेहाबाद में 70 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती होती थी। वहीं इस बार बढ़कर 1 लाख 10 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की बिजाई हुई है। सबसे खास बात ये है कि इस बार औसत उत्पादन बढ़ा है। जिससे कृषि विभाग, व्यापारी और किसान तीनों ही खुश हैं।
बासमती व परमल धान दोनों के उप्तादन एवं भाव का औसत लगाएं तो दोनों ही किस्मों ने किसान को प्रति एकड़ 70 से 75 हजार रूपए प्रति एकड़ मिल रहा है। हालांकि परमल का उत्पादन 80 से सौ मन एवं बासमती का उत्पादन लगभग इससे आधा ही होता है। बासमती 45 से 50 मन प्रति एकड़ उत्पादन हुआ है। लेकिन मंडी में पिछले साल से इस बार धान की आवक 2 लाख 16 हजार मीट्रिक टन धान की आवक ज्यादा हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार किसानों ने धान की परमल किस्म की बिजाई पर बल दिया क्योंकि परमल धान को किसान पक्की फसल एवं सरकारी खरीद वाली नकदी फसल के रूप में जानते हैं।
इस बारे में कृषि उपनिदेशक बलवंत सिंह सहारण ने कहा कि किसानों ने अच्छे बीज का इस्तेमाल किया और बीमारी ना लगने से पैदावार बंपर हुई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगर किसान कृषि विभाग के अनुसार खेती करता है तो धान का उत्पादन और बढ़ सकता है। अनाज मंडी के व्यापारी अरुण ग्रोवर के अनुसार इस बार धान ने किसान को थोड़ा बहुत सहारा लगाया है। अब किसान का कर्ज कम होने लगा है।