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श्तिदारों का दावा, अंधविश्वासी नहीं था गोपालदास का परिवार, निरंकारी संप्रदाय में थी आस्था

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अमर उजाला ब्यूरो
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टोहाना। दिल्ली के बुराड़ी इलाके में एक ही परिवार के 11 सदस्यों की मौत के मामले में नया खुलासा हुआ है। इन लोगों का टोहाना कनेक्शन तो था ही, करीब 5 माह पहले वह टोहाना में स्थित अपने मकान की सीढ़ियों का डिजाइन देखने आए थे। वह किसी तंत्र मंत्र विद्या में तो विश्वास नहीं रखते थे, परंतु निरंकारी मिशन से परिवार का जुड़ाव जरूर था। यह खुलासा इस परिवार के रिश्तेदार व टोहाना के पार्षद तिलक भाटिया ने किया है।
तिलक भाटिया ने बताया कि मृतका नारायणी देवी उनकी मौसेरी सास लगती थी। भाटिया ने बताया कि गोपालदास का परिवार राजस्थान के चितौडग़ढ़ के गांव रावत भाटा से लगभग 45 वर्ष पहले रहने के लिए आया था। जिसके बाद उन्होंने यहां अपना जीवन यापन शुरू कर दिया था तथा उनका रिश्ता भी गोपालदास के परिवार से उन्हीं ने करवाया जिसके चलते उनका परिवार के साथ गहरा नाता जुड़ा हुआ था। --------------------
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खेतीबाड़ी से शुरू किया था काम
तिलकराज भाटिया ने बताया कि जब गोपालदास का परिवार यहां रहता था तो गोपालदास ने उपमंडल के गांव शक्करपुरा में एक नंबरदार के खेत में पार्टनरशिप के तौर पर कार्य शुरू किया था। जिसके बाद उन्होंने टोहाना में जमीन लेकर भाटिया नगर में मकान बनाया तथा रतिया रोड पर जमीन ली थी। कुछ समय तक उन्होने भैंस लेकर दूध का भी कार्य किया था। जिसे बेचने के बाद वे लगभग 33 साल पहले दिल्ली चले गए, वहां निरंकारी भवन के नजदीक रहने लग गए थे। उन्होंने बताया कि टोहाना रहने के दौरान उनका बड़ा बेटा भुनेश विदेश में कार्य करता था तथा लगभग 7-8 साल के बाद उसका बेटा भी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर आ गया था।
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अंधविश्वास जैसा कुछ नहीं, भक्ति जरूर करते थे
तिलकराज ने बताया कि जब गोपालदास का परिवार यहां रहता था तो वे भक्ति में लीन रहते थे, लेकिन अंधविश्वास जैसा कुछ नहीं था। उन्होंने बताया कि जब वे दिल्ली गए थे तो उन्होंने निरंकारी मिशन से जुड़ाव कर लिया था। इस परिवार के धार्मिक कार्यों में निरंकारी भवन के संत भी मौजूद रहते थे, एक बार एक कार्यक्रम में वे भी शामिल हएु थे। भाटिया ने कहा कि गोपालदास के पूरे परिवार का नियम था कि वे सुबह व शाम के समय इकट्ठे बैठकर शिव चालीसा व हनुमान चालीसा का पाठ करते थे। जिनमें उनकी रुचि बनी हुई थी।
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दिल्ली में दोनों भाइयों ने शुरू किया काम
तिलकराज ने बताया कि दिल्ली में जाकर गोपालदास के बेटे ललित ने प्लाईवुड की दुकान में नौकरी शुरू कर दी तथा दूसरे बेटे ने भी नौकरी शुरू कर दी थी। उन्होंने बताया कि इस दौरान लगभग 5 वर्ष पूर्व उनके पिता गोपालदास की मौत हो गई। जिससे कुछ समय पहले ही ललित की एक हादसे के दौरान आवाज चली गई थी। जब ललित के पिता की मृत्यु हुई तो उसके कुछ दिन बाद ललित की आवाज शुरू हुई तो वे अपने पिता गोपालदास की आवाज में अपनी माता से बात करने लगे, जिससे सुनकर वे सब हैरान हो गए थे। कुछ समय बाद ललित नार्मल रूप से बात करने लगा तथा उनके अनुसार ललित के पिता उसके स्वपन में आने लग गए थे। भाटिया ने कहा कि कुछ समय पहले ललित ने प्लाईवुड की दुकान कर ली तथा भाई ने भी किरयाने की दुकान कर ली थी।
ऐसा कदम नहीं उठा सकता परिवार
भाटिया ने कहा कि जैसे ही उनके परिवार को इस दुखद घटना का पता चला तो उनकी पत्नी टोहाना से दिल्ली के लिए रवाना हो गई थी। वहीं वह भी उस दिन हिसार में एक कार्यक्रम में थे और वहां से दिल्ली चले गए। पार्षद भाटिया ने बताया कि वह इस घटना के दो दिन तक दिल्ली रहे और उनको गोपालदास के परिवार में अंधविश्वास जैसी कोई चीज नजर नहीं आई। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले का पटाक्षेप होना चाहिए।
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5 माह पूर्व आया था टोहाना में परिवार
भाटिया नगर निवासी रामस्वरूप ने बताया कि गोपालदास ने लगभग 33 साल पहले उनसे भाटिया नगर में मकान खरीदा था। गोपालदास के परिवार से फोन पर कभी-कभी संपर्क होता रहता था। रामस्वरूप ने बताया कि अभी लगभग 5 माह पूर्व गोपालदास की दो बहुएं व पोते टोहाना आए थे। क्योंकि यहां मकान में जो सीढ़ियां लगी हुई हैं, उनका डिजाइन देखा था। यह परिवार दिल्ली में भी मकान बना रहा था और उनको इन्हीं पौड़ियों का डिजाइन वहां लगवाना था। यहां कुछ समय रहने के बाद वह दिल्ली चले गए थे। उस समय भी परिवार के सदस्य खुश लग रहे थे।
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