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बुरी तरह से ठप्प पड़ी है भूना में स्वास्थ्य सेवाएं

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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी कर रहे इलाज
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद/भूना। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भूना में स्वास्थ्य सेवाएं ठप पड़ी हुई है। मरीजों का इलाज चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी कर रहे हैं और मरीजों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। स्वास्थ्य केंद्र में दो एसएमओ सहित 9 चिकित्सकों के पद रिक्त पड़े हैं। वहीं मात्र एक मेडिकल ऑफिसर के सहारे 40 गांवों के लोगों का स्वास्थ्य ठीक करने की ड्यूटी लगी हुई है। वह भी लड़ाई झगड़ों के मामले में एमएलआर काटने तक ही सीमित रह जाते हैं। इसलिए सरकार द्वारा लोगों को निशुल्क मेडिकल सुविधाएं देने के दावे भूना में खोखले साबित हो रहे हैं। लोग चतुर्थ कर्मचारियों के हाथों अपना इलाज करवाने पर बेबस हो रहे हैं। मामूली घायल व रोगी को प्राथमिक उपचार देने की बजाय तुरंत फतेहाबाद व अग्रोहा मेडिकल कॉलेज रेफर किया जा रहा है।
एक्सरे मशीन को लग रही जंग
स्वास्थ्य केंद्र में एक्सरे मशीन तो है लेकिन चलाने वाला विशेषज्ञ नहीं। इसलिए पिछले दो वर्षों से एक्सरे मशीन बंद कमरे में है। स्वास्थ्य केंद्र में फार्मास्स्टि के दोनों पद रिक्त होने की वजह से डिस्पेंसरी स्टाफ नर्सों को संभालनी पड़ रही है। भूना निवासी कृष्ण कुमार, राजेंद्र सिंह, सुरेश कुमार आदि ने मुख्यमंत्री के ट्विटर पर समस्या से अवगत करवाया है। किंतु 15 दिन बीत चुके हैं कोई भी समाधान नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि भूना में मात्र एक चिकित्सक है, जबकि दो एसएमओ सहित दस चिकित्सक होने चाहिए थे। स्वास्थ्य केंद्र की पूरी जिम्मेदारी एसएमओ के कंधों पर होती है। लेकिन भूना में दोनों पद रिक्त हैं। जिसके कारण मरीजों को सरकारी सुविधाएं देने के दावे हवा हवाई हो रहे हैं।
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गर्भवती को भी अंनट्रेड कर्मचारी लगाते हैं टीके
जच्चा-बच्चा की सुरक्षा को लेकर सरकार भले ही बड़े-बड़े होर्डिंग लगाकर लोगों को सुविधाएं देने का दावा कर रही हो। परंतु भूना में इसके विपरीत हो रहा है। गर्भवती महिलाओं को आयरन व अन्य ग्लोकूज की बोतल लगाने के लिए चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी काम संभाले हुए हैं।
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क्या कहते हैं चिकित्सक
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के एक मात्र चिकित्सक रूस्तम ने बताया कि केंद्र में दो एसएमओ व आठ मेडिकल ऑफिसर के पद है। परंतु मात्र वह अकेले ही मरीजों का उपचार कर रहे हैं। इसके बारे में सरकार को कई बार लिखा जा चुका है। मगर समाधान नहीं हो रहा है। चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों द्वारा जच्चा-बच्चा का उपचार करने पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। लेकिन चिकित्सक ने कहा कि भविष्य में ऐसा नहीं होने दिया जाएगा।
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