सुरेंद्र असीजा
फतेहाबाद। फतेहाबाद पंजाबी सभा द्वारा संचालित अस्पताल के कथित गबन तथा फर्जी सदस्य बनाने के मामले में आखिरकार एसआईटी ने जांच शुरू कर दी है। बुधवार को सिरसा के दो डीएसपी रविंद्र कुमार और डीएसपी साधुराम के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम फतेहाबाद पहुंची। एसआईटी के फतेहाबाद पहुंचते ही संबंधित पक्षों में हड़कंप मच गया। काफी देर तक दोनों पक्ष ये निर्णय नहीं कर पाए कि आखिर एसआईटी के अधिकारियों से मिला कहां जाए। दरअसल सभी पक्षों में ये डर था कि कहीं आज ही दोनों डीएसपी इस मामले में कोई गिरफ्तारी ना कर दें। बाद में जांच टीम द्वारा गिरफ्तारी की कोई कोशिश ना करने के आश्वासन के बाद मनकामेश्वर मंदिर के हॉल में एसआईटी टीम को बुलाया गया और वहीं पर संबंधित पक्ष के लोग उनके समक्ष पेश हुए।
गिरफ्तारी की तलवार लटकी तो समझौते की कोशिशें शुरू, सोमवार को सिरसा में होंगे पेश
सिरसा डीएसपी रविंद्र कुमार व ऐलनाबाद के डीएसपी साधुराम जब सभी पक्षों के लोगों से पूछताछ कर रहे थे तो सभी पक्षों को इस बात का इशारा कर दिया गया कि अगर विवाद जल्द न सुलझा तो आरोपी बनाए गए सभी लोगों की गिरफ्तारी भी संभव है। इसके बाद दोनों पक्षों के लोग अपने-अपने चहेतों को बचाने के लिए फिर से एक्टिव हुए और आपसी सुलह की कोशिशें शुरू कर दी। जिसके बाद दोनों पक्षों की ओर से जांच टीम से सोमवार तक का समय मांगा गया है। डीएसपी को आश्वासन दिया गया है कि सोमवार को सिरसा कार्यालय में एक 11 सदस्यीय टीम उनसे मिलेगी। इसमें दोनों पक्षों से पांच-पांच लोग व एक निर्णायक सुभाष जग्गा को शामिल किया गया है। तब तक ये कमेटी दोनों पक्षों से बातचीत कर इस विवाद को खत्म करने की कोशिशें करेगी। अगर ये कमेटी अपने प्रयासों में सफल रहती है तो ठीक है, अन्यथा समाज के बड़े-बड़े दिग्गजों को इस मामले में जल्द ही जेल की हवा खानी पड़ सकती है। पूछताछ प्रक्रिया के दौरान टेकचंद मिड्डा, मोहनलाल जुनेजा, ओमप्रकाश सरदाना, सुनील चौधरी, एडी बजाज, चंद्रभान मुंजाल, दर्शन नागपाल, भीमसेन आनंद, डा. महेंद्र, पवन चुघ, देसराज रेल्हन व सुभाष जग्गा सहित दर्जनों लोग मौजूद रहे।
ये था मामला
पंजाबी सभा अस्पताल में गबन तथा अपने चहेतों को नए सदस्य बनाने के मामले में पंजाबी सभा के संस्थापक सदस्य रहे हरबंस लाल वढ़ेरा व ओमप्रकाश सरदाना ने 18 अप्रैल 2016 को अस्पताल के तत्कालीन प्रोजेक्ट चेयरमैन चंद्रभान व आठ लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी व गबन की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। इस मामले की निगरानी फतेहाबाद की सीजेएम कोर्ट की देखरेख में हो रही है। कोर्ट ने इस मामले की जांच करने के लिए फतेहाबाद पुलिस को कहा था, लेकिन चंद्रभान के पक्ष ने फतेहाबाद पुलिस पर अविश्वास जताते हुए जांच दूसरे जिले की पुलिस को दिए जाने की मांग की थी। तब पुलिस महानिदेशक ने एक साल पहले मामले की जांच हिसार पुलिस को सौंपी थी। लेकिन जांच पूरी ना होते देख एक पक्ष ने फिर से जांच बदलने की मांग की थी। इस पर कार्यवाही करते हुए डीजीपी ने मामले की जांच जींद जिले के एसपी को सौंप दी थी। जींद एसपी ने इस मामले में एसआईटी गठित कर जांच शुरू की थी कि डीजीपी कार्यालय से जांच अधिकारियों को बदलने का निर्देश आ गया था। आशंका जताई गई थी कि राजनीतिक कारणों के चलते जांच को बार-बार एक जिले से दूसरे जिले में शिफ्ट किया जा रहा है ताकि इसमें अनावश्यक देरी की जा सके। अब पिछले दिनों डीजीपी ने ये जांच सिरसा के एसपी को सौंपी है। सिरसा एसपी ने एसआईटी गठित करते हुए सिरसा के डीएसपी रविंद्र कुमार व ऐलनाबाद के डीएसपी साधुराम को जांच सौंपी थी। खास बात ये है कि इसी मामले में 5 दिसंबर 2016 को चंद्रभान और उनके साथियों ने सभा के संस्थापक सदस्य व पूर्व प्रधान हरबंस लाल वढ़ेरा व ओमप्रकाश सरदाना सहित चार लोगों पर केस दर्ज करवाया था।
वर्जन
पंजाबी सभा विवाद की जांच के लिए फतेहाबाद आए थे। पंजाबी समाज के लोगों ने पंचायती तौर पर फैसला निपटाने के लिए 11 सदस्यीय कमेटी का गठन कर सोमवार तक का वक्त मांगा है। सोमवार को दोनों पक्षों के लोग सिरसा आकर अपनी बात रखेंगे। इसके बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी।
- रविंद्र कुमार, डीएसपी, सिरसा।