नगर पार्षदों द्वारा वार्ड में बांटने के लिए खरीदे गए सैनिटाइजर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। बिना कुटेशन और स्वीकृति के नगर परिषद ने 11 हजार सैनिटाइजर खरीद लिए और शुक्रवार को जब बिल नप में पहुंचा तो अधिकारियों ने इसे पास करने से इन्कार कर दिया है। प्रधान दर्शन नागपाल ने खुद माना है कि बिना स्वीकृति और कुटेशन के सैनिटाइजर खरीदे गए हैं।
मामले के मुताबिक सोमवार को नप कार्यालय में प्रधान दर्शन नागपाल, ईओ जितेंद्र कुमार की मौजूदगी में पार्षदों की बैठक हुई थी। इस मीटिंग में पार्षदों को 20-20 सैनिटाइजर देने पर हंगामा हुआ था। पार्षदों ने सैनिटाइजर लेने से इन्कार कर दिया था। पार्षद प्रतिनिधि सोनू कुक्कड़ और प्रधान दर्शन नागपाल के बीच काफी तू-तड़ाक भी हुई थी। इसके बाद मीटिंग में प्रत्येक पार्षद को 400-400 सैनिटाइजर उपलब्ध करवाने का फैसला लिया गया। आनन-फानन में मेडिकल स्टोर से 11 हजार सैनिटाइजर मंगवा लिए गए और पार्षदों को उपलब्ध करवा दिए। शुक्रवार को जब फर्म ने सैनिटाइजर का 3 लाख 30 हजार रुपये का बिल भेजा तो नप अधिकारियों ने बिल पास करने से इन्कार कर दिया है। नप अधिकारियों का कहना है कि बिल पहले मीटिंग में पास होगा, इसके बाद इसका चेक काटा जाएगा।
सैनिटाइजर ग्रोवर मेडिकल हॉल से खरीदे गए थे। एक पार्षद प्रतिनिधि ने ये सैनिटाइजर मंगवाए थे। इसको लेकर कोई कुटेशन नहीं ली गई और न ही स्वीकृति ली गई है। ऐसा क्यों नहीं किया गया, इस बारे में ईओ ही बता सकते हैं। बिल को जब मीटिंग होगी उस टाइम प्रस्ताव के लिए रखा जाएगा। -दर्शन नागपाल, प्रधान, नगर परिषद।