फतेहाबाद।
पोलियो मुक्त भारत की ओर तेजी से बढ़ते कदमों के बीच फतेहाबाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की तैयारी कमजोर साबित हुई। अगर इस लापरवाही को जल्द सुधारने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने गलतियों पर काम नहीं किया तो आने वाले समय में पोलियो एक बार फिर जिले में दस्तक दे सकता है। दरअसल रविवार को फतेहाबाद शहर के पोलियो बूथों पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से तय किए टारगेट से आधे बच्चे ही पोलियो रोधक दवा पीने पहुंचे। ये आंकड़े फतेहाबाद शहर के हैं, इसलिए अधिक चौंकाने वाले हैं। ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी बदतर हो सकती है। अमर उजाला द्वारा इस बारे में पूछे जाने पर अब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी सोमवार और मंगलवार को डोर-टू-डोर अभियान में आंकड़े सुधरने की दुहाई दे रहे हैं।
प्रत्येक बूथ पर दिया गया था 3 सौ बच्चों का टारगेट, महज एक बूथ पर दो सौ पर पहुंचा आंकड़ा
फतेहाबाद शहर में स्वास्थ्य विभाग ने नौनिहालों को पोलियो रोधक दवा पिलाने के लिए 25 बूथ निर्धारित किए थे। इन बूथों पर इस बार आशा वर्करों ने हड़ताल के चलते ड्यूटी नहीं दी। ऐसे में इस बार स्टाफ नर्स, नर्सिंग स्टूडेंट्स के सहारे ही स्वास्थ्य विभाग ने पोलियो रोधक अभियान चलाया था। शहर के स्थित 25 बूथों में से महज एक ही संन्यास आश्रम मंदिर स्थित बूथ ऐसा था जिसमें पोलियो रोधक दवा पीने वाले बच्चों का आंकड़ा 2 सौ के पार पहुंचा। इस बूथ पर पार्षद मनोज नारंग व उनकी टीम ने बच्चों को बूथ तक लाने में काफी मेहनत की जिसका लाभ मिला। इसके अलावा पार्षद अनीता कुक्कड़ ने ही अपने वार्ड में वार्डवासियों को पोलियो रोधक दवा के बारे में जागरूक किया था। बाकी लगभग सभी बूथों पर पोलियो रोधक दवा पीने वाले बच्चों के आंकड़े हैरानीजनक रूप से 300 के मुकाबले महज सौ से डेढ़ सौ तक सिमटे हुए थे।
शहर के दस प्रमुख बूथों पर अमर उजाला ने की पड़ताल
रविवार को पोलियो रोधक अभियान के दौरान अमर उजाला ने शहर के दस प्रमुख बूथों का निरीक्षण किया। इनमें एमसी कालोनी स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर, भट्ठा कालोनी स्थित आंगनबाड़ी बूथ, खेमा खाती चौक पर ठक्कर नर्सिंग होम बूथ, रघुनाथ मंदिर बूथ, संन्यास आश्रम मंदिर बूथ, अरोड़वंश धर्मशाला बूथ, नागरिक अस्पताल बूथ और बस स्टैंड के दो बूथ शामिल थे। ये सभी शहर के प्रमुख बूथ माने जाते हैं। सबसे कम आंकड़ा नागरिक अस्पताल में स्थित पोलियो रोधक दवा पिलाने वाले बूथ का था। सांय 3 बजकर 45 मिनट तक इस बूथ पर महज 107 बच्चों ने ही पोलियो रोधक दवा पी थी। पोलियो रोधक बूथों का समय सुबह 9 बजे से लेकर सांय चार बजे तक का था।
सीएमओ ने माना, इस बार कम है दवा पीने वाले बच्चों का आंकड़ा
सीएमओ डा. मनीष बंसल ने भी अमर उजाला की पड़ताल को सही माना है। उन्होंने माना है कि इस बार पोलियो रोधक दवा पीने वाले बच्चों के आंकड़े संतोषजनक नहीं हैं। उन्होंने बताया कि अभियान से जुड़े सभी अधिकारियों व कर्मचारियों की बैठक बुलाई है। उन्होंने ये भी जोड़ा कि आजकल इस वजह से भी लोग पोलियो बूथ पर कम आते हैं कि उन्हें पता है कि अगले दिन स्वास्थ्य कर्मचारी पोलियो रोधक दवा पिलाने डोर टू डोर आते ही हैं। उम्मीद है कि इस बार का लक्ष्य अगले दो दिन में अवश्य पूरा हो जाएगा।
आशा वर्कर हड़ताल के चलते नहीं हुई पोलियो अभियान में शामिल
आशा वर्कर पिछले कई दिनों से पहले धरने व बीते दिन से हड़ताल पर हैं। रविवार को एक ओर स्वास्थ्य विभाग पोलियो रोधक अभियान चला रहा था तो दूसरी ओर आशा वर्कर थाली पीट प्रदर्शन कर रही थी। हड़ताल पर होने के चलते फतेहाबाद जिले के अधिकतर बूथों पर आशा वर्करों ने हिस्सा नहीं लिया। ऐसे में मजबूरन स्वास्थ्य विभाग को कई बूथों पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की डयूटी लगानी पड़ी। नौनिहालों की संख्या कम रहने के पीछे एक वजह ये भी हो सकती है क्योंकि आशा वर्करों को ग्राउंड स्तर पर स्थिति का पता होता है कि किस घर में कितने बच्चे दवा पीने वाले हैं। लेकिन उनके अनुपस्थित रहने पर बाकी टीम को दिक्कत अवश्य झेलनी पड़ी।
ये थी पोलियो बूथों पर नौनिहालों के आंकड़ों की स्थिति
पोलियो बूथ आंकड़ा
लक्ष्मी नारायण मंदिर 120
भटठा कालोनी बूथ 145
खेमा खाती रोड़ 165
संयास आश्रम मंदिर 217
अरोड़वंश धर्मशाला 145
नागरिक अस्पताल 107
नए बस स्टैंड बूथ 100
रघुनाथ मंदिर बूथ 125