नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों के कामों में पारदर्शिता लाने और उनकी जवाबदेही तय करने के लिए फाइलों की हर नोटिंग में अब हस्ताक्षर करने के साथ-साथ नाम और पद की स्टांप लगाने की कवायद शुरू की गई है।
इससे एक ओर जहां फाइलों में होनी वाली गड़बड़ी रोकी जाएगी वहीं नोटिंग करने वाले संबंधित कर्मचारी की जवाबदेही भी तय की जाएगी। निगमायुक्त डॉ. आदित्य दहिया ने इस बाबत निर्देश जारी कर दिए हैं।
कई बार फाइलों की नोटिंग में हस्ताक्षर करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों की जवाबदेही तय नहीं हो पाती है। गड़बड़ी होने पर जब संबंधित व्यक्ति से पूछताछ की जाती है तो वह मना कर देता है। खुद की जवाबदेही से बचने के लिए निगम कर्मचारी ऐसे हस्ताक्षर करते हैं कि उन्हें पकड़ पाना मुश्किल होता है। किसने हस्ताक्षर किया, कुछ पता नहीं चलता है।
निगमायुक्त ने डॉ. आदित्य दहिया ने अब निगम के कामों में पारदर्शिता लाने और हर अधिकारी व कर्मचारी की जवाबदेही तय करने के लिए फाइलों की हर नोटिंग में हस्ताक्षर के साथ पद और नाम की स्टैंप लगाने की व्यवस्था को अनिवार्य कर दिया है। बगैर इसके फाइल एक टेबल से दूसरे टेबल पर नहीं जाएगी।
इन विभागों में होती है फाइलों की मूवमेंट
स्टाम्प
नगर निगम के प्लानिंग विभाग, इंजीनियरिंग विभाग, प्रस्थापना विभाग, बिल्डिंग प्लान, अकाउंट ब्रांच, एमओएच, फायर एनओसी, डीए ब्रांच आदि से प्रतिदिन फाइलें एक दूसरे टेबल पर पहुंचती हैं।
एनआईटी, बल्लभगढ़ और ओल्ड जोन के सभी विभागों से प्रतिदिन 150 से 200 फाइलों पर नोटिंग होती हैं। कई बार तो कर्मचारी, अधिकारियों तक फाइल ले जाने के बजाय खुद ही हस्ताक्षर कर फाइल आगे बढ़ा देते थे लेकिन अब ऐसा नहीं कर सकेंगे।
पढ़ने के बाद करेंगे नोटिंग, लगाएंगे स्टैंप
अब डीलिंग क्लर्क और संबंधित विभाग के अधिकारी फाइल को उचित तरीके से पढ़ेंगे। इसके बाद नोटिंग कर अपने नाम और पद की स्टैंप लगाकर आगे फाइल भेजेंगे। बगैर स्टैंप लगी फाइल उच्चाधिकारी स्वीकार नहीं करेंगे। इस नई व्यवस्था से अधिकारी-कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं पाएंगे।
नगर निगम में पारदर्शिता लाने और हर कर्मचारी की जवाबदेही तय करने के लिए ये व्यवस्था लागू की गई है। इससे निगम कर्मचारी जिम्मेदारी के साथ काम करेंगे और फाइलों में किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं होगी। निश्चित रूप से इसका लाभ आम लोगों को मिलेगा।-डॉ. आदित्य दहिया, निगमायुक्त