जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अंशु शुक्ला की अदालत ने नाबालिग लड़की को अगवा कर उसके साथ कई दिनों तक दुष्कर्म किए जाने के मामले में आरोपी को दोषी करार देते हुए सात साल की कैद और 30 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
अदालत में पेश मामले के अनुसार, नंगला मोठूका गांव में रहने वाली एक महिला ने 24 मार्च, 2013 को यह मामला दर्ज करवाया था। उसने कहा था कि उसकी 15 साल की बेटी इसी इलाके में स्थित एक ट्यूबवेल पर काम करती थी।
इस ट्यूबवेल पर उत्तर प्रदेश के जिला हरदोई का रहने वाला चेतराम उर्फ रामस्वरूप नामक युवक भी काम करता था। चेतराम ने किसी तरह उसकी बेटी को अपने झांसे में ले लिया और अगवा कर फरार हो गया।
महिला का आरोप था कि आरोपी सबसे पहले लड़की को बल्लभगढ़ स्थित एक मकान में ले गया, जहां उसने डरा-धमका कर उसे अपनी हवस का शिकार बनाया। इसके बाद दिल्ली और फिर पंजाब स्थित अपनी बहन के घर ले गया। इस दौरान आरोपी लगातार उसके साथ दुष्कर्म करता रहा।
पुलिस ने पंजाब में छापेमारी कर आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद लड़की को बरामद कर लिया था। मामला तभी से अदालत में विचाराधीन था।