सेक्टर-15 की रामलीला में रविवार रात राजा दशरथ- कैकेयी संवाद एवं राम वनवास घोषणा के प्रसंगों का मंचन किया गया। मंच पर राजा दशरथ का दरबार सज रहा होता है।
राजा दशरथ राम को गद्दी पर बैठाने की घोषणा करते हैं। फिर मंथरा रानी कैकेयी को राजा दशरथ द्वारा दिए गए दो वर मांगने की बात याद दिलाती है। मंथरा की बातों में आकर कैकेयी राम को राजगद्दी देने के प्रस्ताव से नाराज होकर कोप भवन में जाती है।
राजा दशरथ उससे पूछते हैं कि आखिर खुशी की घड़ी में कोपभवन में नाराज होकर बैठने का क्या मतलब। इसके बाद वह राजा दशरथ से श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास एवं भरत को राजगद्दी देने की मांग करती है। दशरथ कहते हैं कि ‘ऐ पापिन ऐसा करने से मेरे वंश का नाश हो जाएगा।
तू भरत को राजा बना दे पर मेरे राम को आंखों से दूर मत कर’। लेकिन हठी रानी कैकेयी राम को वनवास भिजवाने की घोषणा करवा देती है। इसके बाद राजा दशरथ वियोग में डूब जाते हैं।
राजा दशरथ की हालत देखकर उनके मंत्री सुमंत रो पड़ते हैं। सीताजी एवं लक्ष्मण भी श्रीराम के साथ वन जाने की जिद करते हैं। रितेश कुमार ने श्रीराम, तान्या भाटिया ने सीता, अनिल चावला ने लक्ष्मण, अनिता गुप्ता ने मंथरा, अंबिका पुंज ने कैकेयी एवं अजय खरबंदा ने राजा दशरथ की भूमिका निभाई।