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Haryana: युवक का हादसे में ब्रेन हो गया था डेड, परिवार ने किए सभी अंगदान; ग्रीन कॉरिडोर से दिल्ली भेजे ऑर्गन

Thu, 09 Apr 2026 11:28 PM IST
शाहिल शर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक

सार

एक जीवन के अंत से 8 लोगों को नई जिंदगी मिलना ही असली दान है। भिवानी के विजेंद्र के परिजनों ने अपने बेटे का अंगदान कर सिखाया है कि जीवन में दान की कीमत क्या होती है।
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ग्रीन कॉरिडोर से अंग पहुंचाते स्वास्थ्य कर्मी - फोटो : संवाद
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विस्तार
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पीजीआई रोहतक में ब्रेन डेड लाए गए भिवानी के जुई कला निवासी विजेंद्र (37) अपनी मौत के बाद भी दो राज्यों के आठ लोगों को नया जीवन दे गए। परिजनों ने विजेंद्र के दो कॉर्निया, हृदय, लिवर, फेफड़े व किडनी दान कर दी। वीरवार को ग्रीन कॉरिडोर तैयार कर विजेंद्र के अंग सुरक्षित तरीके से गुरुग्राम और एम्स दिल्ली पहुंचाए गए।
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पीजीआई के कुलपति डॉ. एचके अग्रवाल ने बताया कि तीन अलग-अलग एंबुलेंस के जरिए अंग ले जाए गए। पहले राउंड में हृदय दिल्ली रवाना किया गया। इसके बाद फेफड़े, लिवर और किडनी भेजी गई। प्रत्येक अंग के साथ पुलिसकर्मियों की तीन गाड़ियां आगे और पीछे चल रही थीं। अंगों को समय पर सुरक्षित पहुंचाने के लिए हर गाड़ी में पांच पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। साथ ही शहर के प्रमुख चौराहों पर भी गाड़ी निकालने के लिए पुलिस तैनात की गई थी। अंग निकालने के बाद विजेंद्र के पार्थिव शरीर को पुष्प वर्षा के साथ विदाई दी गई।

पिता बोले-मेरा बेटा नहीं रहा लेकिन अंग दूसरों के काम आएंगे
भिवानी निवासी पिता राजबीर ने बताया कि 26 मार्च को गंभीर दिमागी चोट के चलते वह अपने बेटे विजेंद्र को पीजीआई लेकर पहुंचे थे। यहां सात दिन उपचार चला लेकिन हालत में सुधार नहीं आया। स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (सोटो) टीम ने उन्हें समझाया कि ब्रेन डेड विजेंद्र के अंग दूसरों को  जीवन दे सकते हैं। इसी के बाद उन्होंने अंगदान का फैसला लिया। राजबीर बोले-मेरा बेटा तो नहीं रहा लेकिन मन में शांति है कि उसके अंग दूसरों के काम आएंगे।
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ब्रेन डेड की पुष्टि के लिए गठित की गई थी कमेटी
विजेंद्र के सात अप्रैल को ब्रेन डेड होने की संभावना के चलते ब्रेन डेड कमेटी गठित की गई। इसमें डॉ. एआर बंसल, एनेस्थेसियोलॉजिस्ट डॉ. तरुण, न्यूरोसर्जन डॉ. अमरनाथ शामिल थे। टीम ने विजेंद्र की दो बार ब्रेन डेड टेस्टिंग की। जांच में पुष्टि होने के बाद ही मरीज को ब्रेन डेड घोषित किया गया। बुधवार को नेशनल ऑर्गन ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन के तालमेल के बाद वीरवार सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक अंग निकाले गए। इसमें विभिन्न अस्पतालों के विशेषज्ञ अंग निकालने के लिए पीजीआई पहुंचे थे।

इन अस्पतालों के मरीजों को मिलेगा नया जीवन
विजेंद्र का कार्निया पीजीआईएमएस रोहतक, हृदय फोर्टिस एसकोर्ट अस्पताल नई दिल्ली, फेफड़े आरटीएमएस अस्पताल गुरुग्राम, लिवर एम्स नई दिल्ली व किडनी पीजीआईएमएस रोहतक में भर्ती मरीज के काम आएंगे।

 
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दानकर्ता परिवार की आर्थिक सहायता की तैयारी
स्वास्थ्य विज्ञान विवि के कुलपति डॉ. एचके अग्रवाल ने कहा कि संस्थान में तीसरी बार मल्टी ऑर्गन दान किए जा रहे हैं। सरकार की तरफ से ऐसे परिवारों को प्रोत्साहित करने के लिए आर्थिक सहायता का प्रावधान नहीं है। इसलिए सरकार से ऐसे परिवारों को प्रोत्साहित करने के लिए आर्थिक सहायता की मांग की जाएगी।

विधायक मनमोहन सिंह भड़ाना ने परिवार को दिए पांच लाख
समालखा विधायक मनमोहन सिंह भड़ाना भी परिवार से मिलने पहुंचे। उन्होंने विजेंद्र के पिता से मुलाकात कर धैर्य बांधा। उन्होंने परिवार को पांच लाख की आर्थिक सहायता देने की घोषणा भी की। कुलपति डॉ. एचके अग्रवाल ने विजेंद्र के पार्थिव शरीर की विदाई पर उनके पिता राजबीर को यह चेक सौंपा।

रोहतक पीजीआई में तीसरा मल्टी ऑर्गन दान
पीजीआई के कुलपति डॉ. एचके अग्रवाल ने बताया कि इससे पूर्व पीजीआई से दो मल्टी ऑर्गन दान हुए हैं। यह तीसरा ब्रेन डेड मल्टी ऑर्गन दान है। यह पहली बार हुआ है कि सारे अंगदान हो पाए हैं। यह सारे अंग किसी दूसरे के लिए नई जिंदगी का कारण बनेंगे।

एक जीवन के अंत से 8 लोगों को नई जिंदगी मिलना ही असली दान है। भिवानी के विजेंद्र के परिजनों ने अपने बेटे का अंगदान कर सिखाया है कि जीवन में दान की कीमत क्या होती है। युवक के परिजनों को हृदय से आभार और सलाम। दूसरों को भी अंगदान के लिए आगे आना चाहिए। -आरती राव, स्वास्थ्य मंत्री हरियाणा सरकार
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