विदेश भेजे जाने वाले कंटेनर से कीमती इलेक्ट्रिकल सामान चुराने वाले गैंग के एक सदस्य को दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने दबोचा है। आरोपी के पास से 1439 छत के पंखे और कुछ अन्य कीमती इलेक्ट्रिकल सामान के अलावा कुछ कंटेनर पर लगने वाली सील बरामद की गई। गैंग कीमती सामान के बदले कंटेनर में रेत भरे बैग भेज देता था। दो-तीन महीने बाद जब कंटेनर विदेश पहुंचता था, तो चोरी का पता चलता था।
पुलिस की मानें, तो आरोपी पुल प्रह्लादपुर इलाके में कंटेनर से चोरी के चार मामलों में भगोड़ा घोषित है। संयुक्त आयुक्त रविंद्र यादव ने बताया कि पकड़े गए आरोपी की पहचान बिहार निवासी मनोज कुमार (30) के रूप में हुई। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को उनकी टीम को सूचना मिली कि तुगलकाबाद कंटेनर डिपो में कंटेनर से सामान चुराने वाला भगोड़ा आरोपी जसोला गांव के पास आने वाला है।
एसीपी जसबीर सिंह, इंस्पेक्टर अत्तर सिंह और अन्य की टीम ने आरोपी को मौके से दबोच लिया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने चोरी की चारों वारदात में अपना हाथ होने की बात कबूल कर ली। चारों मामलों में पुल प्रह्लादपुर थाने में मुकदमा दर्ज है, जिनमें वह भगोड़ा घोषित है। मनोज ने बताया कि 2014-15 में की गई इन चारों वारदात के बाद वह वापस बिहार भाग गया था। तीन महीने बाद आकर उसने विनोद शर्मा और मोबिन खान नामक शख्स के पास मैनेजर की नौकरी शुरू कर दी थी। विनोद और मोबिन अपना गैंग चलाते थे।
ऐसे देते थे वारदात को अंजाम
क्राइम
इनका गैंग तुगलकाबाद, फरीदाबाद, दादरी और ग्रेटर नोएडा के कंटेनर डिपो से ट्रक चालकों को अपने साथ मिलाकर विदेश भेजे जाने वाले कंटेनर से सामान चुराता था। इन लोगों ने मानेसर और ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर में अपना गोदाम भी बनाया था, जहां चोरी का माल रखा जाता था। पुलिस ने मनोज की निशानदेही पर 416 कार्टन पंखे, 52 कार्टन अन्य कीमती सामान और कंटेनर पर लगने वाली सील बरामद की है।
पुलिस आरोपी से पूछताछ कर मामले की छानबीन कर रही है। मनोज ने बताया कि वह 2007 में बिहार से दिल्ली नौकरी की तलाश में आया था। उसने तुगलकाबाद कंटेनर डिपो में मजदूरी शुरू की। इसी दौरान वह कंटेनर से सामान चुराने वाले चोरों के संपर्क में आ गया। आरोपी, ट्रक चालक को अपने साथ मिलाकर रास्ते में कंटेनर की सील तोड़कर उससे माल निकाल लेते थे।
इसके बाद उतने ही वजन के रेत भरे बैग रखकर कंटेनर के वजन को बराबर कर दिया जाता था। दो-तीन माह बाद जब कंटेनर विदेश पहुंचता था, तो वहां चोरी का पता चलता था। बाद में चोरी की शिकायत होती थी, जिस वजह से कार्रवाई नहीं हो पाती थी।