नगरपालिका के अध्यक्ष पद का चुनाव सोमवार को भारी हंगामे के बीच संपन्न
हुआ। चार दिन पहले इनेलो छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुई सुरेंद्र कौर
पालिका अध्यक्ष चुनी गईं।
इस बीच गेट के बाहर हंगामा होता रहा।
वहीं, एक पार्षद के अगवा होने की सूचना पर पुलिस और कांग्रेसियों में
तनातनी रही। बाद में पार्षद द्वारा अपने इनेलो पार्टी के नेता और रिश्तेदार
के साथ स्वयं जाने की बात कहकर मामला ठंडा किया। बैठक में 10 पार्षद
उपस्थित हुए और विरोधी दलों के पार्षदों की ओर से किसी ने भी चुनाव में
हिस्सा नहीं लिया।
पालिका के गेट के बाहर सोमवार सुबह काफी हंगामा
खड़ा हो गया। इसके बाद पुलिस ने पालिका परिसर को घेर लिया और एसडीएम ने
वहां पहुंचकर बैठक की कार्रवाई शुरू करवाई। कांग्रेस के विधायक जरनैल सिंह
ने इनेलो छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुई सुरेंद्र कौर को पालिका अध्यक्ष का
प्रत्याशी घोषित किया। किसी भी विरोधी पार्षद के बैठक में भाग न लेने के
कारण दूसरा कोई उम्मीदवार नहीं था। सुरेंद्र कौर 11 मत पाकर पालिका की
अध्यक्ष निर्वाचित घोषित की गई।
ये रहे मौजूद
चुनाव में
पार्षद सुरेंद्र कौर, प्रमोद कक्कड़, जसपाल पाली, देवेंद्र ग्रोवर, रमेश
गर्ग, बंत सिंह, जयभगवान सिंह, रामतेज सिंह, गुरजंट खोखर और भाल सिंह शामिल
हुए। रतिया नगर पालिका में 17 पार्षद हैं, जिसमें से 10 उपस्थित रहे।
महिला पार्षद के लापता होने पर हंगामा
बताया
जा रहा है कि चुनावी मीटिंग शुरू होने से पहले पार्षद ईशा नापा व उनके पति
ईश्वर नापा को कुछ लोगों ने नगर पालिका के गेट से बाहर ही उठाने का प्रयास
किया। ईश्वर नापा तो बच गए, लेकिन कुछ लोग पार्षद ईशा नापा को अपने साथ ले
गए। इसके बाद पुलिस में हड़कंप मच गया। ईश्वर नापा ने कांग्रेसी नेताओं के
साथ थाने में जाकर खूब हंगामा किया। बाद में पुलिस ईशा नापा को कहीं से
ढूंढ लाई। ईशा नापा ने पुलिस को ब्यान दिया कि उसका अपहरण नहीं किया गया
बल्कि वह अपनी मर्जी से गई थी। असल में ईश्वर नापा का चाचा लक्ष्मण नापा
इनेलो में है और वह ही अपनी बहू को वहां से ले गया।