कांग्रेस प्रत्याशी संजीव शर्मा पर एनडीपीएस एक्ट के तहत एक गंभीर आपराधिक मामला दर्ज है। इस मामले में स्थानीय अदालत ने उन्हें 10 साल की सजा सुनाई थी। हालांकि, संजीव शर्मा ने इस सजा के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील दायर कर रखी है।
अंबाला सिटी के वॉर्ड नंबर 3 से कांग्रेस पार्टी को बड़ा झटका लगा है, जहां उनके आधिकारिक प्रत्याशी संजीव शर्मा का नामांकन पत्र जांच (स्क्रूटनी) के दौरान रद्द कर दिया गया है। वहीं दूसरी तरफ भाजपा के जिला प्रवक्ता हरीश शर्मा ने बगावत करते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ने के लिए नामांकन किया था अब उनका भी नामांकन बिजली बिल के कारण अटक गया है उन्होंने मीडिया से मुखातिब होते हुए पार्टी के नेताओं पर जबरन नामांकन रद्द करने का आरोप लगाया है।
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नामांकन रद्द होने का कारण
प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा नामांकन पत्रों और शपथ पत्रों की बारीकी से जांच करने पर पाया गया कि संजीव शर्मा पर एनडीपीएस एक्ट (नशीले पदार्थ अधिनियम) के तहत एक गंभीर आपराधिक मामला दर्ज है। इस मामले में स्थानीय अदालत ने उन्हें 10 साल की सजा सुनाई थी। हालांकि, संजीव शर्मा ने इस सजा के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील दायर कर रखी है, लेकिन कानूनी तकनीकी बारीकियों और सजायाफ्ता होने के कारण सोमवार को स्क्रूटनी के दौरान उनका नामांकन अवैध घोषित कर दिया गया।
भाजपा ने किया फैसले का स्वागत
संजीव शर्मा का नामांकन रद्द होने पर उनके प्रतिद्वंद्वी और भाजपा प्रत्याशी आनंद मनी ने खुशी जाहिर की है। उन्होंने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि कानून की नजर में पारदर्शिता जरूरी है।
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कांग्रेस की 'प्लान-बी' रणनीति
भले ही संजीव शर्मा चुनावी दौड़ से बाहर हो गए हैं, लेकिन कांग्रेस ने पहले ही सुरक्षा के लिहाज से एक बैकअप योजना तैयार कर ली थी। संजीव शर्मा ने कवरिंग कैंडिडेट के तौर पर अपनी पत्नी का नामांकन भी दाखिल करवाया था। अब उनकी पत्नी चुनावी मैदान में उतरेंगी और कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर ताल ठोकेंगी।