कादमा। विश्व अस्थमा दिवस पर मंगलवार को गांव बडराई स्थित उप स्वास्थ्य केंद्र में लोगों को जागरूक करते हुए आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉ. भूपेंद्र चांदवास ने कहा कि योग, प्राणायाम ,स्वस्थ जीवन शैली व आयुर्वेद चिकित्सा को अपनाकर अस्थमा रोग से बचा जा सकता है।
डॉ. भूपेंद्र चांदवास ने बताया कि अस्थमा सांस से जुड़ी एक दीर्घकालीन बीमारी होती है। आयुर्वेद के अनुसार अस्थमा को तमक श्वास कह सकते हैं, जो वात और कफ दोषों की विकृति से होता है। जो वायुमार्ग में सूजन तथा संकुचन का कारण बनता है। जिससे सांस लेने में कठिनाई होती है।
डॉ. भूपेंद्र चांदवास ने बताया कि अस्थमा से पीड़ित होने के अनेकों कारण होते हैं। जिसमें खराब पाचन, अनेकों एलर्जी कारक, धूम्रपान, शराब सेवन, रासायनिक धुंआ, श्वसन संक्रमण, मोटापा, पर्यावरण प्रदूषण इत्यादि मुख्य होते हैं। उन्होंने लोगों को जागरूक करते हुए कहा कि यदि हमें सांस लेने में परेशानी, सांसों का फूलना, खांसी और खांसते समय सीने में दर्द लगे तो ये अस्थमा के लक्षण हो सकते हैं।
डॉ. भूपेंद्र चांदवास ने अस्थमा से बचाव के उपाय बताते हुए कहा कि हल्का एवं सुपाच्य, ताजा व पौष्टिक पूर्ण भोजन लें। हल्के गुनगुने पानी का सेवन करें। आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार तुलसी, अदरक, इलायची, सौंफ, सौंठ, लौंग, मुलेठी, वासा, पुष्करमूल, हल्दी आदि का प्रयोग लाभकारी हो सकता है।
योग विशेषज्ञ की देखरेख में अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, कपालभाति, श्वासन मुद्रा आदि योगासन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अस्थमा रोग से बचने के लिए शराब, धूम्रपान, ठंडे खाद्य पदार्थ, फास्ट-फूड, जंक फूड, बंद पैकेट फूड, धूल मिट्टी आदि से दूर रहें।