चरखी दादरी। मानसून सीजन में बारिश कम होने से हाल ही में रोपित 3.10 लाख पौध को बचाना वन विभाग के लिए चुनौती बना है। सवा माह से बारिश की एक बूंद न गिरने से दो माह पूर्व रोपे गए पौधे मुरझाने लगे हैं। करीब 75 हजार से अधिक पौध सूखने के कगार पर पहुंच चुकी हैं।
ताजा रोपित पौधे को हर 10 दिन के अंतराल में पानी की जरूरत होती है, लेकिन पौधरोपण के बाद से सही से बारिश नहीं हुई है। जिसके कारण अब ये मुरझाने लगे हैं। वहीं विभाग के लिए टैंकरों से पौधों की सिंचाई करना भी इतना आसान नहीं है। विभाग ने इन पौधों की सिंचाई के लिए इस समय 15 टैंकर लगा रखे हैं।
बता दें कि 25 जून को हुई 85 एमएम बारिश के बाद विभाग ने पौधरोपण शुरू कर दिया था। सार्वजनिक स्थानों, पंचायती जमीन व सरकारी भू-क्षेत्र में पाैधरोपण किया गया था। उसके बाद से क्षेत्र में सही से बारिश से नहीं हुई है। बढ़ते तापमान के बीच वन विभाग के लिए डेढ़ माह के पौधों का जीवन बचाना मुश्किल बना हुआ है। ये छोटे पौधे अधिक तापमान झेलने की स्थिति में नहीं हैं। पौधों की सिंचाई के लिए वन विभाग को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।
- हर साल 40 प्रतिशत पौध हो जाती है खराब
वन विभाग की ओर से हर साल पौधरोपण किया जाता है। प्रतिवर्ष औसतन तीन लाख पौध का रोपण किया जाता है। लेकिन जितनी मात्रा में पौधे लगाए जाते हैं उतने पेड़ नहीं बन पाते। देखरेख के अभाव में मुश्किल से 60 प्रतिशत पौधे ही पेड़ का रूप ले पाते हैं।
- इस साल यूं किया गया पौधरोपण
वन विभाग ने अपने स्तर पर 1.90 लाख पौधे इस सीजन में लगाए हैं। इसी प्रकार 40 हजार पौधे स्कूली बच्चों के माध्यम से व 40 हजार आम जनता के जरिये लगाए गए हैं। 40 हजार पौधे पंचायतों के माध्यम से लगाए गए हैं। ये पौधे सड़क, नहर किनारे, पंचायती जमीन, सरकारी कार्यालय परिसर, स्कूल परिसर व अन्य सरकारी जमीन पर लगाए गए हैं। अब ये पौधे एक से डेढ़ माह के हो गए हैं। पौधे की इस अवस्था में उसे नियमित रूप से दस दिन के अंतराल में सिंचाई की जरूरत पड़ती है तभी उसका विकास एवं वृद्धि हो पाती है।
- इन प्रजातियों के लगा रखे हैं पौधे
वन विभाग ने क्षेत्र में गुलमोहर, शीशम, नीम, पीपल, बरगद, जामुन, कीकर, सरस, अमरूद, सफेदा आदि के पौधे लगा रखे हैं। इसके अलावा काफी संख्या में औषधीय पौधे भी लगाए हुए हैं।
विभाग ने पौधों की सिंचाई के लिए 15 टैंकर लगा हुए हैं। इन टैंकर को नजदीकी जोहड़ व ट्यूबवेल आदि से भरकर सिंचाई की जाती है। बारिश से सिंचाई का तो अलग से फायदा पहुंचता है। विभाग प्रत्येक पौधे की सिंचाई करने का प्रयास कर रहा है। आम लोगों को भी अपने नजदीक क्षेत्र में लगे पौधों की सिंचाई करनी चाहिए।
-दलीप सिंह, जिला वानिकी अधिकारी