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Charkhi Dadri News: मौसम साफ, सरसों की बिजाई के लिए अनुकूल हुए हालात

Mon, 19 Oct 2026 01:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
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बिजाई के लिए तैयार खेत। 
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चरखी दादरी। जिले में वीरवार को हुई बारिश के बाद मौसम साफ हो गया है। तापमान भी सामान्य के आसपास आ गया है। इस बदलाव से सरसों की बिजाई के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं। किसान खेतों में नमी और तापमान देखकर बिजाई की तैयारी कर सकते हैं।
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कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, सरसों की बिजाई के लिए 10 से 25 अक्तूबर तक का समय उपयुक्त है। अच्छी बढ़वार और बेहतर उत्पादन के लिए सही समय पर बिजाई जरूरी है। उन्नत किस्मों का चयन, संतुलित खाद का प्रयोग और बीजोपचार भी महत्वपूर्ण हैं। बिजाई पूर्व से पश्चिमी दिशा में करें। लाइन से लाइन व पौधे से पौधे के बीच उचित दूरी रखें। कृषि विशेषज्ञ चंद्रभान श्योराण ने बताया कि बिजाई के लिए तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से कम होना चाहिए। किसानों को खेत में उपलब्ध नमी का भी ध्यान रखना चाहिए। सही समय पर बिजाई से फसल की जमवार अच्छी होती है। इससे पैदावार की संभावनाएं बढ़ती हैं। उन्होंने बिजाई से पहले खेत की तैयारी और उर्वरकों की उचित मात्रा सुनिश्चित करने की सलाह दी है।
खाद का सही प्रयोग
चंद्रभान श्योराण के अनुसार, सरसों की फसल में पोषक तत्वों की जरूरत पूरी करने के लिए खाद का उचित प्रयोग करें। यदि किसान डीएपी का इस्तेमाल कर रहे हैं तो प्रति एकड़ बिजाई से पहले 25 किलोग्राम डीएपी डालें। साथ ही 25 किलोग्राम यूरिया, 15 किलोग्राम पोटाश, 10 किलोग्राम जिंक सल्फेट और 10 किलोग्राम सल्फर भी मिलाएं। डीएपी के स्थान पर एसएसपी का प्रयोग करने वाले किसान प्रति एकड़ 75 किलोग्राम एसएसपी का उपयोग कर सकते हैं। इसके साथ 25 किलोग्राम यूरिया, 10 किलोग्राम जिंक सल्फेट और 15 किलोग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश डालें। खाद की मात्रा निर्धारित करते समय मिट्टी की जांच और खेत में पहले से मौजूद पोषक तत्वों पर ध्यान दें।
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बीज की मात्रा और किस्में
कृषि विशेषज्ञ ने बताया कि सरसों की अगेती बिजाई के लिए प्रति एकड़ एक से डेढ़ किलोग्राम बीज पर्याप्त है। पछेती बिजाई के लिए डेढ़ से दो किलोग्राम बीज का प्रयोग करना चाहिए। जिले की परिस्थितियों के अनुसार किसान आरएच-1975, आरएच-725, आरएच-749, आरएच-1706, आरएच-775 और आरएच-881 किस्मों का चयन कर सकते हैं। आरएच-30 किस्म अगेती और पछेती दोनों प्रकार की बिजाई के लिए उपयुक्त मानी गई है। कम पानी वाले क्षेत्रों में आरएच-1706 किस्म का चयन करने की सलाह दी गई है। वहीं, पछेती बिजाई के लिए आरएच-725 किस्म का प्रयोग किया जा सकता है।
तना गलन रोग से बचाव
चंद्रभान श्योराण ने बताया कि सरसों की फसल में तना गलन रोग एक आम समस्या है। इस रोग से फसल को बचाने के लिए बिजाई से पहले बीज का उपचार करना अत्यंत जरूरी है। उन्होंने किसानों को बाविस्टीन या ट्राइकोडर्मा से सूखा बीजोपचार करने की सलाह दी है। यह उपाय फसल को रोगमुक्त रखने में सहायक होगा।
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