- 30 सभी गांवों को मिलेगी जलभराव से राहत
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। जिले में 42 में से 30 गांवों में बारिश के पानी की निकासी का काम पूरा हो गया है। शेष गांवों में 30 सितंबर तक पानी की निकासी करने का लक्ष्य रखा गया है। जलभराव से 4400 एकड़ जमीन में खड़ी फसलें प्रभावित हुईं। फसलों में 25 से 100 प्रतिशत तक नुकसान का आकलन है।
पानी की निकासी के लिए 270 पंप एवं मोटर लगा रखे हैं। जिले का गांव इमलोटा सबसे ज्यादा प्रभावित रहा है। यहां पानी निकासी करवाने में 10 अक्तूबर तक का समय लग सकता है। खेतों से पानी की निकासी समय पर होने से किसान रबी की फसलों की बिजाई कर सकेंगे। मानसून सीजन में जिला में 500 एमएम बारिश हुई है।
गत 20 दिनों से पश्चिमी हवा चलने व मौसम साफ होने से एक ओर जहां जलभराव वाले खेतों से फसलों का पानी कम हुआ है। वहीं, फसलों को रोगों से भी छुटकारा मिला है। पश्चिमी हवा से तापमान बढ़ता है। इससे जमीन पानी को जल्दी सोख लेती है।
यह हवा फसलों में वृद्धि एवं विकास के लिए बेहद गुणकारी मानी जा रही है। यह फसलों के लिए निरोगी होती है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस साफ मौसम में कीट आदि की शिकायत वाली फसलों में कीटनाशक दवा आदि का छिड़काव करने का भी अनुकूल समय है। जिले में इस समय ग्वार, ज्वार, मूंग, धान व कपास की फसलें खड़ी हैं।
इस सीजन में 500 एमएम से ज्यादा बारिश
जिले में इस बार मानसून सीजन में करीब 500 एमएम बारिश हुई है। गत वर्ष 400 एमए बारिश हुई थी। जिले के 42 गांवों में खेतों में ज्यादा जलभराव होने से खरीफ की फसलों में काफी नुकसान हुआ है। गांव भागवी, इमलोटा, सरूपगढ़, सांतौर, साहुवास, फतेहगढ़, रावलधी, साहुवास, मिसरी, जयश्री, झींझर, बिरही कलां, कलियाणा, घसौला, बौंद कलां, ऊण, नीमड़ी, ढाणी फोगाट, समसपुर, लोहरवाड़ा आदि गांवों के खेतों में खड़ी फसलों में ज्यादा मात्रा में जलभराव हुआ।
रोगों से होता है बचाव
कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि पश्चिमी हवा चलने से फसलों में रोग कम लगते हैं। यह निरोगी हवा होती है। इस हवा से फसलों में छोटे-मोटे रोग स्वत: ही खत्म हो जाते हैं। इस हवा के चलने से फसली पौधा तेज गति से विकास एवं वृद्धि करता है। पौधा पीलापन के बजाय गहरे हरे रंग का हो जाता है।
दवा छिड़काव का है अनुकूल समय
पश्चिमी हवा चलने से मौसम साफ होने पर किसान कीटनाशक दवा का छिड़काव आसानी से कर सकते हैं। जून माह से बारिश का सिलसिला शुरू होने व पूर्वी हवा का दबाव बनने रहने की वजह से फसलों में रोगों को बढ़ावा मिला है। बारिश के चलते किसान दवाओं का छिड़काव नहीं कर पा रहे थे। जिले में कपास की फसल करीब 30 हजार हेक्टेयर में है। बाजरे का रकबा एक लाख 60 हजार हेक्टेयर क्षेत्र है।
वर्जन
30 सितंबर तक पानी की निकासी का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। 30 गांवों में हालात सामान्य हो गए हैं। किसान रबी की फसलों की बिजाई समय पर कर सकेंगे। पानी की निकासी के लिए 270 पंप एवं मोटर लगा रखी हैं।
-वेदपाल सांगवान, कार्यकारी अभियंता मैकेनिकल, सिंचाई विभाग।
फोटो 4- पानी की निकासी करते पंप। संवाद